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डीबी ओरिजिनल / अयोध्या केस: हिंदू और मुस्लिम पक्ष के वकील अदालत में कट्टर विरोधी, बाहर पक्के दोस्त



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  • हिंदू पक्ष के वकील हरिशंकर जैन और मुस्लिम पक्ष के वकील जफरयाब जिलानी 1989 के पहले से केस लड़ रहे
  • इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक दोनों ने इस मामले में साथ-साथ पैरवी की
  • मुस्लिम पक्ष ने कपिल सिब्बल से उनके सहयोगी निजाम पाशा की सेवाएं मांगी
  • इतिहास से जुड़े पहलुओं पर प्रोफेसरों से भी सलाह ली जा रही

Dainik Bhaskar

Oct 13, 2019, 09:33 AM IST

नई दिल्ली से प्रमोद कुमार त्रिवेदी. सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या विवाद की सुनवाई के दौरान हिंदू और मुस्लिम पक्ष के वकील भले ही एक-दूसरे के खिलाफ दलीलें दे रहे हैं, लेकिन निजी जिंदगी में हालात जुदा हैं। 1989 से हिंदू पक्ष की पैरवी कर रहे हरिशंकर जैन और मुस्लिम पक्ष के वकील जफरयाब जिलानी कोर्ट में एकदूसरे के धुर विरोधी हैं, लेकिन बाहर पक्के दोस्त। इस केस से जुड़ने वाले सबसे शुरुआती वकीलों के व्यक्तिगत संबंधों पर भास्कर APP ने उनसे बात की तो रोचक जानकारी सामने आई।

कोर्ट की बात कोर्ट तक, लेकिन बाहर संबंध अलग हैं : हरिशंकर

  1. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच से इस केस की पैरवी कर रहे हिंदू पक्ष के हरिशंकर जैन बताते हैं कि जिलानी साहब के साथ कोर्ट में भले हमारी प्रतिद्वंद्विता हो, लेकिन कोर्ट के बाहर हमारे संबंध बहुत अच्छे हैं। हम एक-दूसरे के बच्चों की शादी से लेकर हर छोटे समारोह में शामिल होते हैं। कोर्ट की बहस के बाद साथ चाय पीने जाते हैं। कई बार साथ खाना भी खाते हैं। 1975 में इलाहाबाद हाईकोर्ट से मुस्लिम पक्ष के वकील बने जफरयाब जिलानी बताते हैं कि हमारे ताल्लुकात बहुत बेहतर हैं। लखनऊ में तो कोर्ट में चाय आ जाती थी तो हम साथ ही पीते थे। जरूरत पड़ने पर एक दूसरे की मदद भी करते हैं। कोर्ट की बात कोर्ट तक, लेकिन हमारे संबंध अलग हैं। एक-दूसरे को मिठाई भी खिलाते हैं।

महंत रामचंद्र दास तो खाना खिलाते थे : जिलानी

  1. जिलानी बताते हैं कि महंत परमहंस रामचंद्र दास जब जिंदा थे, तब फैजाबाद में बहस के बाद वे हमें साथ ले जाते थे और खाना खिलाते थे। हमारे निजी रिश्ते तो दोनों पक्षों से अच्छे हैं।

सिब्बल से निजाम पाशा की मदद मांगी

  1. सुप्रीम कोर्ट में रोज सुनवाई के दौरान रिसर्च और फैक्ट के लिए प्रोफेसर से लेकर अन्य बड़े वकीलों के सहयोगियों की सेवाएं भी कुछ समय के लिए ली जा रही हैं। जिलानी बताते हैं कि मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन को कपिल सिब्बल के सहयोगी एडवोकेट निजाम पाशा की जरूरत महसूस हुई तो सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चलने तक उनकी सेवाएं मांग ली गईं। अब वे कोर्ट के फैसले तक राजीव धवन के सहयोगी के तौर पर काम करेंगे। इसके अलावा इतिहास से जुड़े पहलुओं पर चर्चा के लिए अलीगढ़ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर इरफान हबीब और प्रोफेसर शीरीं मूसवी से भी धवन की फोन पर बात करवाई जाती है। जिलानी के अनुसार, 1994 से राजीव धवन ही केस की पैरवी कर रहे हैं। जब धवन बीमार हुए थे तो उन्हीं की सलाह पर मीनाक्षी अरोड़ा और सिविल एक्सपर्ट की जरूरत होने पर शेखर नाफडे को केस की पैरवी के लिए शामिल किया गया था।

     

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