• Hindi News
  • Dboriginal
  • PV Sindhu: Badminton Champion PV Sindhu On Korean Coach Kim Ji hyun, Says Improves attacking defensive skills

डीबी ओरिजिनल / पीवी सिंधु ने कहा- नई कोच ह्यून ने मेरी अटैकिंग और डिफेंसिव स्किल सुधारी



PV Sindhu: Badminton Champion PV Sindhu On Korean Coach Kim Ji-hyun, Says Improves attacking defensive skills
X
PV Sindhu: Badminton Champion PV Sindhu On Korean Coach Kim Ji-hyun, Says Improves attacking defensive skills

  • रियो ओलिंपिक और कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक जीत चुकीं सिंधु ने हाल ही में वर्ल्ड बैडमिंटन चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीता
  • सिंधु ने एशियन गेम्स में गोल्ड जीत चुकीं दक्षिण कोरिया की किम जी ह्यून को इस साल की शुरुआत में कोच बनाया था
  • सिंधु ने कहा- स्ट्रेस रिलीज करने के लिए परिवार के साथ वक्त बिताती हूं, भतीजे के साथ खेलती हूं
  • पीवी सिंधु की डाइट में चिकन, मटन और चावल होता है, वे जंक फूड और ऑयली फूड नहीं लेतीं

उदित बर्सले

उदित बर्सले

Sep 05, 2019, 01:13 PM IST

नई दिल्ली. वर्ल्ड बैडमिंटन चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय बनीं पीवी सिंधु की कामयाबी का राज दूसरों से कुछ अलग है। बैडमिंटन कोर्ट पर सिर्फ जीत के इरादे से उतरना उनका इकलौता लक्ष्य नहीं होता। वे कोर्ट पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के इरादे से उतरती हैं। वर्ल्ड चैम्पियनशिप में सबसे ज्यादा 21 मैच खेलने वाली महिला खिलाड़ी बनीं सिंधु ने भास्कर एप से बातचीत में कहा कि खिलाड़ी किसी भी देश का हो, वह फॉर्म में होता है। जो अपना सौ फीसदी देता है, वही जीतता है। सिंधु अपनी कामयाबी का श्रेय लंबे समय उनके कोच रहे पी. गोपीचंद समेत नई दक्षिण कोरियाई कोच किम जी ह्यून को भी देती हैं। पढ़ें सिंधु से बातचीत के अंश...

 

आप डॉक्टर बनना चाहती थीं? फिर बैडमिंटन की राह कैसे पकड़ी? 
सिंधु : बहुत छोटी थी। तब सोचा था डॉक्टर बनना है, लेकिन अब तो बैडमिंटन ही सब कुछ है। जब 8 साल की थी, तब सिर्फ मजे के लिए बैडमिंटन खेलती थी। फिर इसे करियर ही बना लिया। 

 

आपके पिता बड़े वॉलीबॉल प्लेयर रहे हैं। मां भी वॉलीबॉल खिलाड़ी रही हैं। कभी ख्याल नहीं आया कि आपको भी यही खेल खेलना चाहिए?
सिंधु : मैंने कभी ऐसा नहीं सोचा। वे वॉलीबॉल खेलते थे, तब भी मैं बाजू के कोर्ट में बैडमिंटन खेलती थी। मैंने इसे जारी रखा। माता-पिता ने भी मुझे बहुत सपोर्ट किया।   

 

आपने लाल अक्षरों से बैडमिंटन की दुनिया में अपना नाम दर्ज कराया है। लाल इसलिए क्योंकि इस खेल में हमेशा से चीन का दबदबा रहा है। आपने खुद को उनसे मुकाबले के लिए कैसे तैयार किया? 
सिंधु : ट्रेनिंग बहुत महत्वपूर्ण होती है। खासतौर पर ऑन कोर्ट और ऑफ कोर्ट, मेंटल और फिजिकल ट्रेनिंग करनी होती है। मैंने इस टूर्नामेंट के लिए बहुत तैयारी की थी, बल्कि ये कहूं कि हम हर टूर्नामेंट के लिए पूरी तैयारी करते हैं। कई बार टूर्नामेंट में 2-3 हफ्ते का अंतराल होता है, तो उसके अनुसार भी ट्रेनिंग करनी पड़ती है। हम बाकायदा प्रोग्राम बनाकर तैयारी करते हैं। हर टूर्नामेंट में अलग-अलग प्लेयर आते हैं। उसके लिए भी अलग स्ट्रैटजी बनाकर रखनी होती है। रही बात चीन के डॉमिनेंस की तो, खिलाड़ी किसी भी देश का हो, वह एक ही फॉर्म में है। बस मैच के दिन कौन अच्छा खेलता है, सब इस पर निर्भर करता है। जो अपना सौ फीसदी देता है, वही जीतता है। ये जरूर है कि चीन के नए खिलाड़ी आ रहे हैं, उनके पास अलग तरह के स्ट्रोक्स होते हैं। हमें उसकी तैयारी रखनी होती है। 

 

पहले गोपीचंद और अब दक्षिण कोरिया की किम जी ह्यून आपकी कोच हैं। दोनों की कोचिंग से कितनी मदद मिली? 
सिंधु : किम कुछ महीने पहले आई थीं। हमारी ट्रेनिंग में गोपी सर साथ होते थे। बचपन से गोपी सर से ट्रेनिंग ली है। हर स्ट्रोक पर मेरी क्षमता के मुताबिक किम ने मुझ पर ध्यान दिया। अटैकिंग और डिफेंस, दोनों ही स्किल में काफी फायदा मिला।  

 

किसी भी बड़े टूर्नामेंट से पहले आपका रूटीन क्या होता है? 
सिंधु : हर टूर्नामेंट से पहले मेरा फोकस न्यूट्रिएंट डाइट पर होता है। मैं चिकन, मटन और चावल तो खाती हूं, लेकिन मेरी डाइट ज्यादा नहीं होती। जंक फूड और ऑयली फूड तो बिल्कुल नहीं खाती, क्योंकि खिलाड़ी के लिए बहुत जरूरी है कि वह फैट से बचे। रही बात ट्रेनिंग की तो मैं चित्रा अकादमी में फिटनेस ट्रेनिंग करती हूं। वहां पर श्रीकांत मुझे दो साल से फिटनेस ट्रेनिंग दे रहे हैं। हर प्लेयर का फिटनेस लेवल अलग होता है। उसी के अनुसार ट्रेनिंग भी करनी होती है। खेल के लिए शरीर की प्रॉपर स्ट्रेचिंग मायने रखती है, इसलिए शरीर का सही से ध्यान रखना होता है। फिटनेस ट्रेनिंग से मेरे प्रदर्शन में काफी सुधार आया है।

 

स्ट्रेस रिलीज करने के लिए आप क्या करती हैं?
सिंधु : घर में परिवार के साथ वक्त बिताती हूं। मेरा एक साल का भतीजा है। उसके साथ खेलती हूं। कभी-कभी मूवी भी देखती हूं।

 

sindhu

 

वर्ल्ड बैडमिंटन चैम्पियनशिप के फाइनल में 38 मिनट के मैच में किस मोमेंट पर आपको लगा कि खिताब अब आपके हाथ में है?
सिंधु :
मैंने आखिरी प्वाइंट तक मैच को आसान नहीं समझा। हर प्वाइंट मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण था। आखिरी प्वाइंट तक मैंने लीड बरकरार रखी। इसी वजह से जीत सकी।

 

2017 के फाइनल में जिस जापानी नोजोमी ओकुहारा से हारीं थी, इस बार आपने उन्हें आसानी से शिकस्त दे दी। ये कैसे संभव हुआ? 
सिंधु : जापानी खिलाड़ियों के साथ लंबे मैच होते हैं। मैं इसके लिए तैयार थी। इस बार फाइनल पर बहुत फोकस किया था। हालांकि, वो भी काफी तैयार थी। मैंने तय कर लिया था कि जीतना-हारना मायने नहीं रखता। मुझे अपना बेस्ट देना है और मैंने वही किया।  

 

नोजोमी को ओलिंपिक सेमीफाइनल में हराकर आपने देश को पहला सिल्वर दिलाया था। अब उन्हें हराकर बैडमिंटन चैम्पियनशिप में पहला गोल्ड दिलाया। इस संयोग पर क्या कहेंगी?
सिंधु : हार-जीत जिंदगी का हिस्सा है। हारने के बाद मायूसी जरूर आती है, लेकिन गलतियों से सबक लेकर पहले से और मजबूत बनना ही कामयाबी की निशानी है।

 

यह गोल्ड आपके लिए कितना मायने रखता है?
सिंधु : यह बहुत ही अच्छी फीलिंग है। काफी इंतजार के बाद वर्ल्ड चैम्पियनशिप गोल्ड मिला है। दो ब्रॉन्ज और दो सिल्वर के बाद आखिरकार गोल्ड मिला। गोल्ड आपको एक बूस्ट देता है। आगे भी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करता है। 

 

देश के युवाओं को आप क्या मैसेज देना चाहती हैं?
सिंधु : बहुत से लोग अगर मुझसे प्रेरित हो रहे हैं तो मैं कहना चाहूंगी कि कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। बहुत सारे बलिदान देने होते हैं। यदि आप स्पोर्ट्स पसंद करते हैं तो, हार्ड वर्क के लिए तैयार रहें। किसी भी चीज में माता-पिता का सपोर्ट मिलना बहुत जरूरी है। 

 

चार बड़े टूर्नामेंट में पदक जीतने वाली सिंधु इकलौती खिलाड़ी
सिंधु बैडमिंटन इतिहास की पहली महिला खिलाड़ी हैं, जिन्होंने लगातार ओलिंपिक, वर्ल्ड चैम्पियनशिप, एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीता। उन्होंने 2016 रियो ओलिंपिक में रजत पदक अपने नाम किया था। इसके बाद 2018 के कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स में रजत जीता। अब वर्ल्ड चैम्पियनशिप में उन्हें गोल्ड मिला है।

 

DBApp

 

 

 

COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना