डीबी ओरिजिनल / अहमदाबाद का विश्व विरासत का खिताब खतरे में, वही गलतियां दोहराईं तो जयपुर का गौरव भी गुम हो जाएगा



पहली तस्वीर अहमदाबाद की- हेरिटेज और आधुनिक निर्माण मिक्स हो गए हैं। दूसरी तस्वीर में जयपुर शहर-हेरिटेज सिटी में अतिक्रमण, बाजारों में खंभे, विज्ञापन, तारों का जंजाल है। पहली तस्वीर अहमदाबाद की- हेरिटेज और आधुनिक निर्माण मिक्स हो गए हैं। दूसरी तस्वीर में जयपुर शहर-हेरिटेज सिटी में अतिक्रमण, बाजारों में खंभे, विज्ञापन, तारों का जंजाल है।
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पहली तस्वीर अहमदाबाद की- हेरिटेज और आधुनिक निर्माण मिक्स हो गए हैं। दूसरी तस्वीर में जयपुर शहर-हेरिटेज सिटी में अतिक्रमण, बाजारों में खंभे, विज्ञापन, तारों का जंजाल है।पहली तस्वीर अहमदाबाद की- हेरिटेज और आधुनिक निर्माण मिक्स हो गए हैं। दूसरी तस्वीर में जयपुर शहर-हेरिटेज सिटी में अतिक्रमण, बाजारों में खंभे, विज्ञापन, तारों का जंजाल है।

  • अहमदाबाद में विरासत पर 10 हजार दाग, जयपुर ने तो गिनती भी नहीं की
  • अहमदाबाद : ऐतिहासिक इमारतें खतरे में हैं, ट्रैफिक जरा भी नहीं सुधार पाए, सड़कों पर जानवर घूमते रहते हैं
  • जयपुर: परकोटा, हवेलियां, बाजार और नगर नियोजन, सब पर अतिक्रमण, तंग इतना कि कोई जाना ही नहीं चाहता

Dainik Bhaskar

Sep 15, 2019, 09:06 AM IST

अहमदाबाद (महेश शर्मा/शिवांग चतुर्वेदी). पहले अहमदाबाद की बात... यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज सूची में शामिल देश का पहला शहर। जुलाई 2017 में यह दर्जा मिला। यहां की हेरिटेज वैल्यू को देश-दुनिया ने समझा। हालांकि यह पहचान फिर खतरे में है, क्योंकि नीति नियम बनाने वाले यूनेस्को की गाइड लाइन पर खरा उतरने में फेल रहे हैं।

 

हेरिटेज को बचाने और संवारने के लिए शहर को सालभर में जो काम करने थे, वो तीन साल में भी नहीं हो पाए हैं। बार बार चेतावनी और नोटिस के बाद फिर से दिसंबर 2020 तक का समय मांगा हुआ है। ...लेकिन, चूने-पत्थर की इमारतों वाले अहमदाबाद में आधुनिक शहर की मिलावट इस कदर हो गई है कि ताजा डेडलाइन तक भी बचाव और सुधार मुमकिन नजर नहीं आते। भास्कर ने दो दिन तक अहमदाबाद की खासियतों और दिक्कतों को जाना। लोगों और जिम्मेदारों से बात की, ताकि उसके दो साल बाद वर्ल्ड हेरिटेज सूची में शामिल हुए दूसरे शहर राजस्थान की राजधानी जयपुर को सबक मिल सके।


अब जयपुर... दो महीने पहले ही यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज सूची में शामिल देश का दूसरा शहर। दिसंबर 2020 तक ऐतिहासिक इमारतों को बचाने के साथ आज की जरूरतों जैसी सुविधाएं शहर को देनी हैं। दो माह में दो-तीन बैठकें हुईं हैं, बस। बाकी कुछ नहीं। शहर की जिस सुरक्षा दीवार परकोटा, यहां की हवेलियां और उनमें पलते जीवन ने यूनेस्को पर छाप छोड़ी, उसी को नहीं बचा पा रहे। पुरातत्व विभाग की संरक्षित सूची में शामिल दीवार पर मकान बने हुए हैं। जयपुर के पास तो अहमदाबाद से कई गुना ज्यादा विरासत है। ये न दुनिया में पहचान रखता है, बल्कि रोजगार के भी नए रास्ते देने में भी सक्षम है।

 

अहमदाबाद : ऐतिहासिक इमारतें खतरे में

  • पुराने शहर में चूने-पत्थर की इमारतों को ईंट-सीमेंट के आधुनिक निर्माण का बड़ा खतरा। 5.6 किमी. में 10 हजार से ज्यादा कब्जे। पुरानी हवेलियों में शाॅपिंग मॉल्स और बाजार खुल रहे हैं। अब एफआईआर दर्ज हो रही हैं।
  • 15वीं शताब्दी के 28 भवन हैं। अहमदाबाद ने यूनेस्को में वर्ल्ड हेरिटेज सूची के लिए अप्लाई किया तो इस बात को मजबूती से रखा। इन्हीं के आसपास अतिक्रमण हो गए। इन्हीं में एक भवन में एएसआई का दफ्तर भी चलता है।
  • कुल 2236 ऐतिहासिक भवन हैं। केवल 80 का सर्वे किया। वक्त गुजरने के साथ अफसरों के लिए लोगों को समझाकर मकानों में घुसना और मुश्किल होता जा रहा है।
  • पूरे शहर में पुलिस की मौजूदगी में भी ट्रैफिक अस्त-व्यस्त। पार्किंग भी सड़कों पर ही। आवारा जानवर घूमते हैं।
  • पुराने शहर के भविष्य की जो तस्वीरें दिखाईं, वहीं ऐतिहासिक भवनों के बाहर लटके बिजली के तार हैं। होर्डिंग्स, एसी के यूनिट, लाइटें, रंग-बिरंगी तस्वीरों हेरिटेज को ढक रखा है। को एकरूपता देनी है। अफसरों के मुताबिक जब भी इनको ठीक करने की बात कहते हैं तो लोग बेसिक सुविधाओं की उलाहना छेड़ते हैं।

 

जिम्मेदार खुद कहते हैं- चुनौतियां बहुत बड़ी हैं
चुनौतियां बड़ी हैं, लगातार काम कर रहे हैं। दिसंबर 2020 तक का वक्त मांगा है। लेकिन जिस तरह की परेशानियां हैं...कम से कम 2 साल और लग सकते हैं। -आशीष त्रंबड़िया, डायरेक्टर, हेरिटेज ट्रस्ट, अहमदाबाद

 

जयपुर: परकोटा, हवेलियां, बाजार ...सब पर अतिक्रमण

  • नगर निगम ने अब जाकर दो उपायुक्तों से अतिक्रमण रिपोर्ट मांगी है। कितने हैं, सूचीबद्ध नहीं। 2 माह में 2013 से 2018 के बीच के 311 अतिक्रमण दर्ज किए हैं। इनमें भी केवल 83 को नोटिस दिए, 46 पर छिटपुट कार्रवाई की।
  • जयपुर की बसावट, इसकी सुरक्षा दीवार और दरवाजे यूनेस्को को भा गए। यही परकोटा हेरिटेज है, यही सबसे असुरक्षित। 9 किमी परिधि वाले परकोटे पर मकान बन गए हैं। चार दरवाजा, घाटगेट, गंगापोल अस्तित्व खो रहे हैं।
  • यूनेस्को को सौंपी रिपोर्ट के मुताबिक 1575 हेरिटेज भवन हैं। अभी तक 400 भवनों का सर्वे किया है। बाकी का सर्वे बाकी। प्लान उसके बाद बनेगा। सर्वे इनटैक कर रहा है।
  • परकोटे में ट्रैफिक जाम स्थायी समस्या बन गया। सांड पर्यटक की जान ले चुका। इनसे निपटना जरूरी है। नगर निगम सड़कों पर ही पार्किंग कराता है। पार्किंग प्रोजेक्ट पूरे ही नहीं हो रहे। गाड़ी बराबर जानवर हैं सड़कों पर।
  • निगम ने चौकड़ी मोदीखाना और मेन बाजारों के भवनों के बाहरी स्वरूप को इकसार करने का प्लान तैयार करने को कहा है। हेरिटेज के सामने एसी यूनिट, साइनेजेज, झूलते तार, लाइटें आदि को हटाना सबसे बड़ी चुनौतियां हैं।

 

जिन पर जिम्मा वे बोले, डेढ़ साल में सारे काम कर लेंगे

जयपुर नगर निगमायुक्त अरुण गर्ग ने कहा कि हमने तीन कमेटियां बना दी हैं। परकोटे सहित वाॅल्डसिटी के अतिक्रमण, फसाड़ कंट्रोल लाइन, हेरिटेज भवनों की लिस्टिंग जैसे चैलेंज हैं। डेढ़ साल में सभी टास्क पूरे करेंगे।

 

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