डीबी ओरिजिनल / बंकर स्कूल: सीमा पार से बरसते हैं गोले, इसलिए शिक्षक बच्चों को तहखाने में पढ़ाते हैं



बेसमेंट में बने बंकर में कक्षाएं चलती हैं। बेसमेंट में बने बंकर में कक्षाएं चलती हैं।
स्कूल की दीवारों पर गोलियों के निशान देखे जा सकते हैं। स्कूल की दीवारों पर गोलियों के निशान देखे जा सकते हैं।
DB Original: Bunker school on border of Pakistan with Jammu
DB Original: Bunker school on border of Pakistan with Jammu
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बेसमेंट में बने बंकर में कक्षाएं चलती हैं।बेसमेंट में बने बंकर में कक्षाएं चलती हैं।
स्कूल की दीवारों पर गोलियों के निशान देखे जा सकते हैं।स्कूल की दीवारों पर गोलियों के निशान देखे जा सकते हैं।
DB Original: Bunker school on border of Pakistan with Jammu
DB Original: Bunker school on border of Pakistan with Jammu

  • जम्मू से सटी पाकिस्तान की जीरो लाइन पर बच्चों का स्कूल बंकर में लगता है 
  • प्रिंसिपल ने बताया- जब भी सीमा पर तनाव होता है तो इस इलाके में आठ-दस गोले जरूर गिरते हैं

Dainik Bhaskar

Sep 05, 2019, 07:57 AM IST

श्रीनगर (आरएस पुरा बाॅर्डर से अंकुर सेठी). जम्मू से सटी पाकिस्तान की सीमा का ये बंकर स्कूल ठीक जीरो लाइन पर है। पहली से आठवीं तक के इस स्कूल में सौ से ज्यादा बच्चों का दाखिला है। हर सुबह ये बच्चे पिता के साथ मवेशियों को चराने और दूध बेचने जाते हैं। शिक्षक इन्हें ढूंढ-ढूंढकर, समझा बुझाकर और कभी-कभी कान पकड़कर स्कूल लाते हैं। ‘गुड मॉर्निंग मास्टर जी’ बोलकर बच्चे स्कूल में एंट्री लेते हैं।

 

फिर सुबह की प्रार्थना होती है। इस दौरान जब बच्चे राष्ट्रगान गाते हैं, तो आवाज पाकिस्तान तक गूंजती है। शिक्षकों ने अपने पैसे से स्कूल की चारदीवारी बनवाई है। 1996 से पहले यहां कोई स्कूल नहीं था। आज पक्की बिल्डिंग है, पर दीवारों पर पाकिस्तान से होने वाली बमबारी और गोलियों के निशान हैं। प्रिंसिपल की कोशिशों से यहां कुछ दिन पहले बंकर बनाया गया है। पाकिस्तान की ओर से फायरिंग शुरू होने या इसकी आशंका होने पर शिक्षक बच्चों को लेकर इन बंकरों के भीतर चले जाते हैं। प्रिंसिपल कहते हैं कि जब भी सीमा पर तनाव होता है, तो इस इलाके में आठ दस गोले जरूर गिरते हैं। स्कूल का आंगन जले शेल और गोलों से भरा मिलता है।

 

शेल प्रिंसिपल के कमरे में सजा देते हैं
बच्चे सफाई करते हैं और शेल उठाकर प्रिंसिपल के कमरे में सजा देते हैं। शिक्षक रोज 16 किमी दूर से पढ़ाने आते हैं। प्रिंसिपल कहते हैं कि कोई यहां पोस्टिंग नहीं चाहता था। स्कूल के पास ही बच्चों के पारंपरिक कच्चे कुल्ले (गुज्जरों के घर) हैं। पिछली बार सभी कुल्ले जल गए थे। अब घरों में भी बंकर बनाए जा रहे हैं।

 

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