डीबी ओरिजिनल / एयरस्ट्राइक की रात बर्थडे केक काटा, ताकि शक न हो; फिर कंट्रोल रूम आकर मिशन पूरा किया: एयर मार्शल हरि



एयर मार्शल सी. हरि कुमार ने बताया कि ऑपरेशन का मकसद सिर्फ आतंक पर चोट करना था। इसके लिए बालाकोट उपयुक्त निशाना बना। एयर मार्शल सी. हरि कुमार ने बताया कि ऑपरेशन का मकसद सिर्फ आतंक पर चोट करना था। इसके लिए बालाकोट उपयुक्त निशाना बना।
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एयर मार्शल सी. हरि कुमार ने बताया कि ऑपरेशन का मकसद सिर्फ आतंक पर चोट करना था। इसके लिए बालाकोट उपयुक्त निशाना बना।एयर मार्शल सी. हरि कुमार ने बताया कि ऑपरेशन का मकसद सिर्फ आतंक पर चोट करना था। इसके लिए बालाकोट उपयुक्त निशाना बना।

  • बालाकोट एयरस्ट्राइक के 6 महीने बाद मिशन के चीफ पहली बार बता रहे हैं उस रात की पूरी कहानी
  • स्ट्राइक से पहले शाम को प्री रिटायरमेंट पार्टी में व्हिस्की जैसे रंग का जूस पीते रहे, पत्नी को भी भनक तक नहीं लगी
  • पाक को चकमा देने के लिए 6 जेट दूसरी तरफ भेजे, तब बालाकोट में हमला किया

मुकेश कौशिक

मुकेश कौशिक

Sep 04, 2019, 08:59 AM IST

नई दिल्ली. पाकिस्तान के बालाकोट में इस साल 25-26 फरवरी की रात जिस एयरस्ट्राइक ने दुनिया को चौंंकाया था, उस मिशन के चीफ रहे एयर मार्शल सी. हरि कुमार हमले के दो दिन बाद रिटायर हो गए। उन्होंने दैनिक भास्कर को बताया कि मिशन वाली रात उन्होंने 12 बजे घर जाकर बर्थडे केक काटा, ताकि किसी को शक न हो। फिर कंट्रोल रूम आकर मिशन पूरा किया। रात 3:28 बजे स्ट्राइक शुरू हुई और 4 बजे विमान लौट आए। एयरस्ट्राइक के बाद मीडिया को दिया यह उनका पहला इंटरव्यू है। 39 साल की सर्विस के आखिरी 15 दिन उनके लिए सबसे रोमांचक रहे। इस दौरान उन्होंने एयरस्ट्राइक की रूपरेखा बनाकर उसे अंजाम दिया। पेश हैं उनसे बातचीत के संपादित अंश...

 

भास्कर: स्ट्राइक का फैसला कब और कैसे लिया गया?
एयर मार्शल हरि: 14 फरवरी को जब पुलवामा में हमला हुआ, उसी दिन एयरफोर्स चीफ ने मुझसे बात की। कहा कि हमारी भूमिका की जरूरत पड़ सकती है, इसलिए हमारे पास योजना होनी चाहिए। तभी कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की बैठक हुई। उसमें एयरचीफ भी थे। चीफ ने ही वहां एयरस्ट्राइक का ऑप्शन दिया था।

 

भास्कर: उसके बाद तैयारी कैसे शुरू हुई? 
एयर मार्शल हरि: ये बताने का कोई फायदा नहीं है। हम मिशन के लिए तैयार थे। हमें बस टारगेट चाहिए थे। 

 

भास्कर: आपको टारगेट (बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद का आतंकी ठिकाना) की जानकारी कब मिली? 
एयर मार्शल हरि: 25-26 फरवरी की रात तय हुई थी। उससे ठीक 7 दिन पहले हमें इसकी जानकारी दे दी गई थी।


भास्कर: मिशन के लिए पायलट कैसे चुने? 
एयर मार्शल हरि: यह जानने से किसी को कोई फायदा नहीं होगा। हमने हर जरूरी संसाधन झोंक दिया था।


भास्कर: मिशन की रात क्या हुआ? उस शाम रिटायरमेंट पार्टी थी। 28 फरवरी को आप रिटायर होने वाले थे...
एयर मार्शल हरि: दिल्ली के इंडिया गेट पर आकाश मैस की वह शाम हमेशा यादगार रहेगी। उसी रात 12 बजे के बाद मेरा जन्मदिन था और मेरे जहन में एक बड़ा मिशन था। रिटायरमेंट पार्टी पहले से तय थी, इसलिए मिशन की सीक्रेसी बनाए रखने के लिए उसे स्थगित नहीं किया। पार्टी में मैंने वेटर को बुलाया और उसके कान में कहा कि लाइम कोर्डियल (जूस और चीनी से बनी नॉन-अल्कोहलिक ड्रिंक) की डबल डोज के साथ पानी देना, ताकि रंग व्हिस्की सा दिखाई दे। पार्टी में 80 अफसर थे। एयरचीफ बीएस धनोआ मुझे लॉन की तरफ ले गए। मुझसे अंतिम तैयारियों के बारे में पूछा और कहा कि जब ऑपरेशन हो जाए तो फोन पर सिर्फ ‘बंदर’ बोल देना।


भास्कर: मिशन को सीक्रेट रखना कितना कठिन था? 
एयर मार्शल हरि: रात को आकाश मैस से लौटते समय मैंने पत्नी से कहा कि कल शायद चंडीगढ़ में विशेष बच्चों के लिए बने स्कूल के उद्घाटन पर नहीं जा सकूंगा। यह सुनकर वह बहुत नाराज हो गईं। वह एयरफोर्स वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष होने के नाते मेरे साथ एयरक्राफ्ट में चलने की हकदार थीं। पश्चिमी कमान पहुंचते ही मैं जरूरी काम के बहाने घर से निकलकर ऑपरेशन रूम में पहुंच गया। मिशन की जानकारी एयरचीफ को देनी थी, जो एनएसए के संपर्क में थे। रात 12 बजे घर से संदेश आया कि दोस्त केक लेकर जन्मदिन मनाने पहुंचे हैं। किसी को मिशन का शक न हो, इसलिए मैं घर गया। केक काटा और कंट्रोल रूम आ गया।

 

भास्कर: एयर स्ट्राइक के लिए 25-26 फरवरी की रात का समय ही क्यों चुना गया?
एयर मार्शल हरि: कुछ कारण तो मैं आपको नहीं बता सकता लेकिन, मकसद से जुड़ी तीन परिस्थितियों से आपके सवाल का समाधान हो जाएगा। पहला और बड़ा कारण यह था कि हम ऐसे समय हमला करना चाहते थे, जब सभी आतंकी एक जगह जमा हों। यह रात का समय हो सकता था। हमने गौर किया था कि इस आतंकी ठिकाने पर सुबह चार बजे हलचल शुरू हो जाती है, जब तड़के की नमाज होती है। लिहाजा एक घंटे पहले वे अपने बिस्तरों में होने थे। भारत में उस समय साढ़े तीन बजे होंगे और पाकिस्तान में तीन। दूसरा कारण, चांद की खास स्थिति थी। 19 फरवरी को पूर्णमासी थी। मिशन के समय 3 से 4 बजे तक चांद क्षितिज से 30 डिग्री पर होना था। ऐसे में चांदनी एकदम आदर्श थी। उस दिन मौसम की पश्चिमी हलचलों का असर कम था। सटीक बमबारी में हवाएं आड़े आ सकती थीं।

 

भास्कर: हमले का टारगेट किसने दिया था? 
एयर मार्शल हरि: खुफिया एजेंसियों ने। सरकार ने पाक के आतंकी ठिकानों की जानकारी रॉ से जुटा ली थी।

 

भास्कर: कितने टारगेट थे? हमला सिर्फ बालाकोट में क्यों? 
एयर मार्शल हरि: हम नागरिक आबादी को चपेट में नहीं लेना चाहते थे। जहां लोगों को नुकसान हो सकता था, वे निशाने छोड़ दिए। मकसद सिर्फ आतंक पर चोट करना था। इसके लिए बालाकोट उपयुक्त निशाना बना था।

 

भास्कर: बालाकोट के लिए ग्वालियर से भी कुछ विमान उड़े थे, उस समय ग्वालियर में क्या हो रहा था? 
एयर मार्शल हरि: 
गोपनीयता बनाए रखने के लिए हमने इस बात पर गहन विचार किया कि ग्वालियर में बेस के आस-पास लोकल एरिया में क्या इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं जाम कर दी जाएं? लेकिन, आखिरकार तय किया गया कि इस तरह का कोई भी कदम गोपनीयता को खत्म कर सकता है।

 

भास्कर: लेकिन, बड़ी संख्या में वायुसेना के पायलटों की गतिविधि को कैसे गोपनीय रखा जा सकता था? 
एयर मार्शल हरि: 
इसके लिए व्यापक रणनीति बना ली गई थी। मिशन पर जाने वाले जांबाज पायलटों से व्यक्तिगत तौर पर मेरा मिलना जरूरी था। मैं 21 फरवरी को ग्वालियर गया। पायलटों से मुलाकात की। बड़ी समस्या उड़ान को सीक्रेट रखने की थी। उनके हवाई मार्ग की दिक्कत यह थी कि दिल्ली से रवाना होने वाली रोज की सिविलियन उड़ानें ऊपर की ओर रुख कर रही होती हैं, जबकि आने वाली घरेलू और विदेश उड़ानें नीचे उतर रही होती हैं। ऐसे में नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर लगे रडार में बड़ी संख्या में फाइटर विमानों की ब्लिप (एक तरह की सूचना) आने से हल्ला मच सकता था। यह संभावना खत्म करने लिए एयरपोर्ट पर वायु सेना के एक अधिकारी को विशेष सरकारी दूत के साथ भेजा गया, ताकि रेथियॉन रडार पर आने वाली ब्लिप को नजरअंदाज कराया जा सके।


भास्कर: एयरस्ट्राइक के दौरान ऐसी कोई परिस्थिति भी बनी होगी, जिससे आपकी भी धड़कने बढ़ गई हों?
एयर मार्शल हरि: 
हां, एक मौका आया था। दरअसल हमारे फाइटर जब अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे थे तो हमने देखा कि मुरीद (रावलपिंडी के पास एक जगह, जहां पाकिस्तान का एक एयर बेस है) के आकाश में पाकिस्तानी वायुसेना का एक टोही विमान और एक लड़ाकू विमान गश्त कर रहा है। उन्हें वहां से भटकाने के लिए हमने दो सुखोई-30 और चार जगुआर विमानों को बहावलपुर की ओर तेजी से रवाना किया। हमारे इन विमानों की मूवमेंट देख पाकिस्तानी विमान उनकी ओर लपके और खतरा टल गया। हमारे फाइटर पोजिशन ले चुके थे। पहली एयरस्ट्राइक 3 बजकर 28 मिनट पर हुई और चार बजे तक मिशन पूरा हो गया था। सभी लड़ाकू विमान सुरक्षित लौटकर पश्चिमी कमान के दो अड्डों पर उतर गए।

 

भास्कर: इस मिशन के दौरान पाकिस्तानी एयरफोर्स की क्या प्रतिक्रिया थी? 
एयर मार्शल हरि: 
वे हाई अलर्ट पर थे, पर इस स्ट्राइक से वे हक्के-बक्के रह गए। हमने गौर किया कि स्ट्राइक के तुरंत बाद उनके विमान बालाकोट में मंडरा रहे थे। शायद उन्हें लग रहा था कि एक और स्ट्राइक होने वाली है।

 

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