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  • Hemraj Meena: Even after 5 months, family of Pulwama martyr Hemraj got neither Rs 50 lakh nor 25 bigha land

डीबी ओरिजिनल / पुलवामा शहीद हेमराज के परिवार को 5 माह बाद भी सरकार से न 50 लाख मिले, न 25 बीघा जमीन

शहीद हेमराज की फोटो के साथ उनकी पत्नी मधुबाला और दोनों बच्चे। शहीद हेमराज की फोटो के साथ उनकी पत्नी मधुबाला और दोनों बच्चे।
शहीद हेमराज की मां रतन बाई और पिता हरदयाल मीणा। शहीद हेमराज की मां रतन बाई और पिता हरदयाल मीणा।
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शहीद हेमराज की फोटो के साथ उनकी पत्नी मधुबाला और दोनों बच्चे।शहीद हेमराज की फोटो के साथ उनकी पत्नी मधुबाला और दोनों बच्चे।
शहीद हेमराज की मां रतन बाई और पिता हरदयाल मीणा।शहीद हेमराज की मां रतन बाई और पिता हरदयाल मीणा।

  • देश करगिल विजय दिवस मना रहा है और पुलवामा शहीद के परिजन कर रहे हैं मदद का इतंजार
  • दैनिक भास्कर ने पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हेमराज के परिवार से बात की
  • शहीद के पिता हरदयाल मीणा ने बताया- सरकार, नेता, अफसर सबने वादे किए, लेकिन किसी ने पूरे नहीं किए

दैनिक भास्कर

Jul 31, 2019, 11:52 AM IST

जयपुर (बाबूलाल शर्मा).  हवलदार हेमराज मीणा 14 फरवरी 2019 को जम्मू कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकी हमले के दौरान शहीद हो गए थे। 70 साल के पिता हरदयाल मीणा जवान बेटे के चले जाने से उतने नहीं टूटे, जितने सरकारी तंत्र की वादाखिलाफी से मायूस हैं। वे कहते हैं हेमराज जब शहीद हुआ तो सरकार के बड़े अफसर और सारे नेता हमारे घर आए थे। सबने कहा था- "हम आपके साथ हैं चिंता मत करना। यह भी कहा था कि हेमराज तो देश के लिए शहीद हो गया लेकिन हमें अपना बेटा समझना। आपके परिवार का हमेशा ध्यान रखेंगे। ध्यान रखने की बात तो दूर कोई दुबारा लौट कर नहीं आया।"

 

देश के लिए बलिदान देने वाले शहीदों के परिजनों को उनका हक मिलने में इतना वक्त क्यों लगता है? दैनिक भास्कर की पहली कड़ी में पुलवामा हमले के शहीद हेमराज के परिवार के संघर्ष और इंतजार की कहानी...

 

वादे तो किए, निभाए नहीं

हरदयाल मीणा ने बताया कि अभी तक सरकार से न तो पैकेज मिला और न ही नेताओं के वादे पूरे हुए। उस दिन वसुंधरा राजे से लेकर सांगोद विधायक भरतसिंह, सांसद ओम बिड़ला, मंत्री शांति धारीवाल, रमेश मीणा, प्रताप सिंह खाचरियावास जैसे हर नेता ने आकर यही पूछा- " आपको सरकार से तो तय पैकेज मिलेगा ही उसके अलावा कोई दिक्कत हो तो बताओ, हम पूरी मदद करेंगे। मैंने कहा था- मेरे तीन भाइयों के परिवार के 11 छोटे बच्चे कच्चे रास्ते से स्कूल जाते हैं। बरसात में पानी भरने से बहुत दिक्कत होती है। आप पक्की सड़क बनवा दो। पांच महीने गुजर गए आज तक कच्चा रास्ता सड़क में नहीं बदला। बच्चे कीचड़ भरे रास्ते से स्कूल जा रहे हैं।" हेमराज का परिवार कोटा के गांव विनोद कलां, सांगोद में रहता है।

 

बेटे की याद में मां अब भी रो देती हैं
शहीद की मां रतन बाई की आंखों में हेमराज की बात करते ही आंसू टपकने लगते हैं। कहती हैं- "शहादत से तीन दिन पहले ही गांव आकर गया था। मंगलवार को यहां से गया और गुरुवार को शहीद हो गया। उस दिन दोपहर में ही तीन बजे उसका फोन आया था। कह रहा था- मां मैं पहुंच गया हूं। थोड़ी देर बाद टीवी पर शहीद होने की खबर आ गई। मुझे अगर पता होता तो मैं उसको गांव से वापस जाने ही नहीं देती।" 

 

जहां अंत्येष्टि हुई, वहां मूर्ति तो लगा दो

शहीद की पत्नी कहती हैं, "सरकार की तरफ से घोषित पैकेज अभी हमें नहीं मिला है। स्मारक के लिए पंचायत कहती है पैसे नहीं है। पंचायत ने जमीन तो दे दी लेकिन बाउंड्रीवाल और पानी की व्यवस्था बिना पैसे के हो नहीं पा रही। एक जुलाई को मैं उनके जन्मदिन पर अंत्येष्टि स्थल गई थी, वहां स्मारक की खाली जगह देखकर मन बहुत दुखी हुआ। जहां अंत्येष्टि हुई वहां सरकार उनकी बड़ी मूर्ति लगवा दे।" 

 

परिवार को सहारा, सम्मान, शिक्षा, सुविधाएं, सबका इंतजार

 

सहारा: पत्नी को

 

  • 50 लाख रु नकद या 25 लाख रु नकद और पच्चीस बीघा जमीन या 25 लाख रु नकद और एमआईजी मकान।
  • शहीद की पत्नी या उसके पुत्र-पुत्री को लेवल 10 तक के पद पर सरकारी नौकरी।

 

माता-पिता को

 

  • आर्थिक सहायता के रूप में अल्प बचत योजना की मासिक आय योजना में माता-पिता के नाम से तीन लाख रुपए सावधि जमा।

 

शिक्षा: बच्चों को मेडिकल-इंजीनियरिंग तक फ्री

 

  • शहीद के बच्चों को सरकार के स्कूल, कॉलेज, तकनीकी शिक्षा, मेडिकल, इंजीनियरिंग में निशुल्क शिक्षा। स्कूल जाने वाले बच्चों को प्रतिवर्ष 1800 और कॉलेज या उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे बच्चों को 3600 रुपए प्रतिवर्ष छात्रवृत्ति।

 

सम्मान: शहीद के नाम पर कॉलेज-स्कूल या अस्पताल

 

  • शहीद के नाम से एक स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, पंचायत भवन, मार्ग, पार्क या अन्य किसी सार्वजनिक स्थान का नामकरण।

 

सुविधाएं: परिजनों को फ्री बिजली कनेक्शन, फ्री बस यात्रा

 

  • शहीद के परिवार के नाम दर्ज कृषि भूमि पर निशुल्क बिजली कनेक्शन। रोडवेज की ओर से शहीद की पत्नी, उसके आश्रित बच्चों और माता-पिता को डीलक्स व साधारण बस के लिए निशुल्क रोडवेज पास।
  • हेमराज के परिवार को शहादत के दिन 5 लाख की तत्काल सहायता राशि के अलावा अभी तक कुछ नहीं मिला है।

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