डीबी ओरिजिनल / कनाडा में 4 लाख रु. महीने की नौकरी छोड़ी, अब पानी बचाने वाले डिजाइनर गमले बना रहे



haryana karnal youth nitin lalit startup makes designer pots from waste material
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  • नए तरह के गमले में पौधे की जड़ें वॉटर कंटेनर में डूबी रहती हैं
  • कंटेनर भरा हो तो करीब एक महीने तक पौधे को पानी देने की जरूरत नहीं

Dainik Bhaskar

Aug 12, 2019, 07:51 AM IST

मनोज कौशिक (पानीपत). कनाडा में चार लाख रुपए महीने की नौकरी, खुद का घर और स्थायी नागरिकता होने के बावजूद करनाल के नितिन ललित ने अपने स्टार्टअप के लिए यह सब छोड़ दिया। उन्होंने यह फैसला इसलिए किया, क्योंकि वे अपने देश में वेस्ट मटेरियल से पानी बचाने वाले गमले बनाकर घर-घर पहुंचाना चाहते थे। 2016 में भारत वापसी के बाद इस सपने को पूरा करने में उन्हें 3 साल लग गए। नितिन बताते हैं कि जितनी सेविंग कनाडा में की थी, लगभग सारी इस प्रोजेक्ट में लग गई। डिजाइन, तकनीक, साइंस और कड़ी मेहनत के बाद नितिन अब 40% वेस्ट मटेरियल से वॉटर सेविंग गमला बनाने में कामयाब हुए हैं।


गमलों का नए तरह का डिजाइन
नितिन के डिजाइन किए गमले ऐसे हैं कि हर कोई उन्हें देखने के लिए एक बार ठहर जाता है। गमले वेस्ट प्लास्टिक शीट से बने हैं। इनके अंदर प्लास्टिक के ही स्क्रू लगाए गए हैं। उन्हें पूरी तरह खोला जा सकता है। प्लास्टिक शीट का नुकीला उभार गमले को आकर्षक बनाता है। नुकीला उभार इसलिए दिया गया है ताकि गमले के अंदर हवा और पानी के कण रह सकें और पौधे में लंबे समय तक नमी कायम रखी जा सके।


पानी बचाने के लिए जड़ों के नीचे वॉटर कंटेनर 
इन गमलों में नीचे वॉटर कंटेनर लगा है। पौधे को दिया अतिरिक्त पानी उस वॉटर कंटेनर में चला जाता है, जो उसमें जमा रहता है। पौधे की जड़ें इस वॉटर कंटेनर में डूबी होने के कारण वहां से पानी लेती रहती हैं। वॉटर कंटेनर अगर भरा हो तो करीब एक महीने तक पानी देने की जरूरत नहीं है। नितिन बताते हैं कि वे इसका टेस्ट कर चुके हैं। इससे पानी की बचत होती है। उन्होंने इतना बड़ा गमला भी बनाया गया है कि उनमें सब्जियां उगाई जा सकती हैं।


कनाडा में लोगों को बागवानी का शौक, वहीं से आइडिया मिला
इंजीनियरिंग में डिप्लोमा के बाद नितिन 2007 में कनाडा चले गए थे। वहां डिग्री पूरी की और नौकरी करने लगे। 2016 में जब नौकरी छोड़ी तो जनरल मोटर्स में बतौर टेक्नीशियन जुड़ गए। उन्होंने बताया कि कनाडा में कुछ महीने ऐसे होते हैं, जब बर्फ नहीं पड़ती और ठंड कम होती है। इन दिनों में लोग जमकर बागवानी करते हैं। हर किसी में होड़ होती है कि किसका गार्डन ज्यादा सुंदर दिखेगा। जैसे ही बर्फ पड़ती है तो लोग गमलों को घरों के अंदर रख देते हैं। उन्हें बागवानी का शौक वहीं से लगा। तभी बागवानी तकनीक के बारे में पढ़ना शुरू किया। टेक्नीशियन होने का फायदा ये हुआ कि वे गमलों पर एक्सपेरिमेंट करने लगे। प्रयोग करते-करते ऐसा गमला तैयार किया जो खुल सकता था। उसमें स्क्रू लगाए।


भारत आए तो किराए पर जगह लेकर काम शुरू किया, तीन साल बाद गमले तैयार
भारत आए तो बागवानी में पानी की बर्बादी देखकर लगा कि इसके लिए भी कुछ काम करना चाहिए। करनाल आकर नितिन ने अपने पिता रिटायर्ड बैंककर्मी जेके ललित को अपने साथ जोड़ा। दोनों ने अल्फा प्लांटर नाम से कंपनी बनाई। एक बंद पड़ी फैक्ट्री को किराए पर लिया और काम शुरू किया। पहले पिता-पुत्र ने काम शुरू किया, फिर धीरे-धीरे स्टाफ रखा। लगातार एक्सपेरिमेंट कर वेस्ट मटेरियल का प्रयोग कर वॉटर कन्जर्वेटिव गमला तैयार किया। तीन साल में कई बार डिजाइन बदलने पड़े। एक बार डिजाइन बदलने में 2 से 4 लाख रुपए खर्च आता था। वे अभी तक करीब 50 लाख रुपए इस प्रोजेक्ट पर खर्च कर चुके हैं। अब उनका फाइनल प्रोडक्ट तैयार है। हालांकि, इस पर उनकी रिसर्च अभी भी जारी है।

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