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अमेरिका में रहने वाले भारतीयों की कहानियां:वहां भी नौकरियां खोईं, बिजनेस बंद हुआ; लोग फंसे और सामान की किल्लत भी झेलनी पड़ी

नईदिल्लीएक वर्ष पहलेलेखक: अक्षय बाजपेयी
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  • कोरोना के बाद जो नौकरियां गईं, उसमें श्रुति की जॉब चली गई, जॉब जाने के कुछ वक्त बाद श्रुति को नियम मुताबिक अपने देश लौटना है
  • दो महीने का दाल-चावल, पोहा-उपमा स्टॉक किया, इंफेक्शन के डर से सब्जियां घरों में ही उगा रहे लोग

अमेरिका में करीब 27 लाख भारतीय रहते हैं। कोरोना का जितना असर भारत में उससे कहीं ज्यादा प्रभावित अमेरिका है। लॉकडाउन भी दोनों ही देशों में लगाया गया। और जो दिक्कतें भारत में हुई लगभग वैसी ही यूएस में भी। वहां रहने वाले भारतीय इस दौरान क्या कर रहे हैं, हमने उनसे बात की, एक रिपोर्ट...

नौकरियां खोईं और बिजनेस बंद हुआ

आदित्य और श्रुति दोनों मुंबई के रहने वाले हैं। दोनों अमेरिका में नौकरी करते थे। कुछ समय पहले ही वे यूएस पहुंचे। कोरोना के बाद जो नौकरियां गईं, उसमें श्रुति की जॉब चली गई। जॉब जाने के कुछ वक्त बाद श्रुति को नियम मुताबिक अपने देश लौटना है। नई नौकरी की उम्मीद कम ही है। हो सकता है देश लौटना पड़े।

सौरव मालवीय यूएसए में रहते हैं और प्रोफेशनल वेडिंग फोटोग्राफर हैं। सौरव ने बताया कि लॉकडाउन के पहले हर महीने 6 से 7 लाख रुपए की अर्निंग थी लेकिन अभी फील्ड वर्क बंद है।

घर से ही एडिटिंग का कम चल रहा है। उन्होंने बताया कि, लॉकडाउन ने क्रिएटिविटी को और ज्यादा बढ़ा दिया है। अब मैं घर से ही प्रोडक्ट फोटोग्राफी कर रहा हूं।

नेचर की फोटोग्राफी कर रहा हूं क्योंकि यहां आने-जाने में कोई रोक नहीं है। एडिटिंग में नए एक्सपेरिमेंट कर रहा हूं और ब्लॉगिंग भी शुरू कर चुका हूं। प्रोडक्ट फोटोग्राफी के ऑर्डर घर बैठे ही मिल रहे हैं। लॉकडाउन ने हमें और ज्यादा सोचने-समझने का मौका दिया है।

लॉकडाउन और फ्लाइट्स बंद होने से फंसे लोग

महाराष्ट्र की रहनेवाली नेहा दिसंबर में 6 महीने के लिए यूएस आईं थी। लेकिन अब वह समय पूरा होने वाला है और इंटरनेशनल फ्लाइट शुरू होने के कोई आसार नहीं दिख रहे। नेहा का वापस जाने का रिजर्वेशन मई का था। वे आगे की प्रोसेस को लेकर बहुत टेंशन में हैं।

विपुल चावला चंडीगढ़ से हैं। अमेरिका में फेसबुक में नौकरी करते हैं। उनका परिवार भारत में फंसा हुआ है और वह अकेले अमेरिका में हैं। दिवाली पर वह पूरी फैमिली के साथ इंडिया आए थे। अप्रैल में उनके बेटे का पहला बर्थडे था।

इन दिनों विपुल यूएस में अकेले रह गए हैं। उनका परिवार इंडिया में है।
इन दिनों विपुल यूएस में अकेले रह गए हैं। उनका परिवार इंडिया में है।

विपुल कहते हैं वह इस लॉकडाउन में परिवार के साथ समय बिता सकते थे लेकिन वह अकेले रह गए। खाली वक्त में कुकिंग और गार्डनिंग करते हैं। पहले कुकिंग नहीं आती थी लेकिन अब पूछ-पूछकर बहुत कुछ पकाना सीख गए हैं।

माइक्रोसॉफ्ट में जॉब करने वाले जयेश उपाध्याय के मां-पापा जनवरी में उनके पास अमेरिका गए थे। वहां से उन दोनों का ऑस्ट्रेलिया जाने का प्लान था। टूरिस्ट वीजा पर वह छह महीने ही यूएस में रह सकते हैं।

जयेश के पैरेंट्स इन दिनों यूएस में ही हैं और अब बच्चों और परिवार के साथ वक्त बिता रहे हैं।
जयेश के पैरेंट्स इन दिनों यूएस में ही हैं और अब बच्चों और परिवार के साथ वक्त बिता रहे हैं।

उन्हें यही तनाव है कि बस वीजा लिमिट आगे बढ़ जाए। हालांकि पूरा परिवार साथ है तो ये वक्त उनके लिए वेकेशन बन गया है।

सामान की किल्लत वहां भी हुई, संक्रमण के डर से घर में सब्जियां उगाईं

सौरभ कहते हैं मेरा एक फ्रेंड है जोनाथन। एक दिन उसका मैसेज आया कि मोबाइल पर तुम्हें एक लिस्ट भेजी है उसे तुरंत चेक करो। उसमें टूथब्रश से लेकर ऐसे आइटम लिखे थे, जो लंबे समय तक खराब न हों। जिन्हें स्टोर किया जा सके।

शुरूआत में मैंने उसकी बात को ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया। लेकिन बाद में लगा कि कुछ स्टोर कर ही लेते हैं। फालतू की रिस्क क्यों लें।

फेसबुक में काम करने वाले इंदौर के अनिमेश द्विवेदी ने बताया कि लॉकडाउन में कई सामान की किल्लत हो गई थी। इसलिए हमने पोहा, उपमा, रवा, मैगी जैसी चीजें जो हमें लगती ही हैं यह थोड़ी ज्यादा मात्रा में खरीद कर रख लीं।

कुछ दिनों बाद यहां कॉन्टैक्टलेस होम डिलिवरी शुरू हो गई थी। ऑर्डर करने पर डिलीवरी बॉय आता है और घर के बाहर ही सामान रखकर चले जाता है।

अनिमेश वर्क फ्रॉम होम मोड पर हैं। उनकी पत्नी अदिति एपल में काम करती हैं। वे फेसबुक में हैं।
अनिमेश वर्क फ्रॉम होम मोड पर हैं। उनकी पत्नी अदिति एपल में काम करती हैं। वे फेसबुक में हैं।

अनिमेश कहते हैं कि, हम अभी वर्क फ्रॉम होम मोड पर हैं। इसलिए गार्डनिंग के लिए कुछ समय निकल जाता है। मैंने घर पर ही संतरे, नींबू, अमरूद के पेड़ लगाए हैं।

पुदीना, धनिया, मैथी, कद्दू, टमाटर, शिमला मिर्च घर ही उगाए हैं। हर रोज इनमें पानी-खाद देने का काम करता हूं। समर यूएसए में सब्जियों के लिए अच्छा मौसम भी होता है। खूब सब्जियां हो रही हैं।

इन दिनों अनिमेश घर में उगाई सब्जियां ही खा रहे हैं।
इन दिनों अनिमेश घर में उगाई सब्जियां ही खा रहे हैं।

इसलिए बाहर से संक्रमण आने का डर नहीं है। फ्रेश सब्जियां खाने को मिल जाती हैं। हालांकि अब धीरे-धीरे चीजें नॉर्मल मोड पर जा रही हैं। किसी सामान की कोई किल्लत नहीं हो रही।

अनिमेश कहते हैं घर पर हमें जैविक सब्जियां मिल रही हैं। संक्रमण का कोई खतरा नहीं।
अनिमेश कहते हैं घर पर हमें जैविक सब्जियां मिल रही हैं। संक्रमण का कोई खतरा नहीं।
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