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डीबी ओरिजिनल / कश्मीर में 12 अक्टूबर को इन्वेस्टर्स समिट, अतिसंवेदनशील जिलों में सुरक्षाबल अवेयरनेस प्रोग्राम चला सकते हैं



Jammu Kashmir Investor Summit 2019: Security Forces Will Run Awareness Programs in Kashmir Valley Sensitive Areas
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Jammu Kashmir Investor Summit 2019: Security Forces Will Run Awareness Programs in Kashmir Valley Sensitive Areas

  • आईटीसी, टाटा ग्रुप, महिंद्रा एग्रोटेक, अल्ट्राटेक सीमेंट जैसी कंपनियों को इन्वेस्टर्स समिट में बुलाया गया, नए उद्योगों को 30% सब्सिडी मिलेगी
  • राज्य के उद्योग और वाणिज्य विभाग के संयुक्त निदेशक संदेश कुमार शर्मा के मुताबिक, सीमेंट और सर्विस सेक्टर में निवेश आने की उम्मीद
  • अनंतनाग, पुलवामा, कुलगाम और शोपियां जैसे अतिसंवदेनशील जिलों में सुरक्षाबलों की रणनीति बदल सकती है
  • अनुच्छेद 370 के हटने के बाद सेना और सरकार पूरे राज्य में बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम चला सकेगी

Dainik Bhaskar

Aug 16, 2019, 07:51 AM IST

नई दिल्ली. अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में बदलाव की कोशिशें शुरू हो गई हैं। राज्य में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए 12 से 14 अक्टूबर तक इन्वेस्टर्स समिट होगी। विशेषज्ञों के मुताबिक, सरकार को इसके लिए दो तरह से कदम उठाना होगा। पहला- कंपनियों को आकर्षित करना होगा। दूसरा- आतंकवाद से प्रभावित अतिसंवेदनशील जिलों पर फोकस कर राज्य के हिंसाग्रस्त होने की धारणा बदलनी होगी। भास्कर ऐप ने इस बारे में बीएसएफ की इंटेलिजेंस विंग के प्रमुख रहे के श्रीनिवासन, सीआरपीएफ के सूत्रों, सेवानिवृत्त बिग्रेडियर अनिल गुप्ता, रक्षा विशेषज्ञ मेजर जनरल (रिटायर्ड) जीडी. बख्शी और राज्य के उद्योग और वाणिज्य विभाग के संयुक्त निदेशक संदेश कुमार शर्मा से बातचीत की।


सर्विस और सीमेंट इंडस्ट्री पर फोकस

 

  • जम्मू और कश्मीर में निवेश को बढ़ावा देने के लिए राज्य का उद्योग और वाणिज्य विभाग कई कंपनियों से संपर्क कर रहा है। इनमें आईटीसी, टाटा ग्रुप, सुजलॉन एनर्जी, महिंद्रा एग्रोटेक, अल्ट्राटेक सीमेंट और रेडिसन होटल्स जैसे नाम शामिल हैं। 
  • राज्य के उद्योग और वाणिज्य विभाग के संयुक्त निदेशक संदेश कुमार शर्मा ने भास्कर ऐप को बताया कि अक्टूबर में होने वाली इन्वेस्टर्स समिट में देश के ज्यादातर औद्योगिक समूहों से संपर्क किया गया है। हम उम्मीद कर रहे है कि यहां पर ज्यादा से ज्यादा इन्वेस्टर्स आएं ताकि जम्मू-कश्मीर का विकास हो सके। जम्मू-कश्मीर में मुख्यत: 2 सेक्टर- सर्विस सेक्टर और सीमेंट इंडस्ट्री में इन्वेस्टमेंट की सबसे ज्यादा उम्मीद की जा रही है। चूंकि यहां टूरिज्म का सबसे बड़ा स्कोप है, इसलिए होटल्स के लिए ये बेहतरीन मौका है। सीमेंट से जुड़े रॉ मटेरियल की यहां कमी नहीं है, इसलिए सीमेंट इंडस्ट्री के लिए यहां पर काफी संभावनाएं हैं। हम यहां इन्वेस्टर्स को 30% तक सब्सिडी भी दे रहे हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा उद्योग स्थापित हों और जम्मू-कश्मीर में रोजगार बढ़े।
  • रिटायर्ड ब्रिगेडियर और जम्मू-कश्मीर भाजपा के प्रवक्ता अनिल गुप्ता बताते हैं कि अक्टूबर में जम्मू-कश्मीर में इन्वेस्टर्स समिट है। जल्द ही देश के बड़े उद्योग जम्मू-कश्मीर में निवेश करेंगे। यहां रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इसका सीधा फायदा स्थानीय लोगों को होगा। जब घाटी के लोगों के पास काम होगा तो पत्थरबाजी और अलगाववाद जैसी समस्या ही खत्म हो जाएगी। 
  • रक्षा विशेषज्ञ मेजर जनरल (रिटायर्ड) जीडी बख्शी बताते हैं कि कश्मीर यानी भारत के स्विट्जरलैंड में आखिर कौन निवेश नहीं करना चाहेगा। वहां नौकरियां आएंगी तो तरक्की भी आएगी। अमन के माहौल में विकास का लाभ सब उठाना चाहेंगे। इससे वहां की आवाम को सबसे ज्यादा फायदा होगा। निवेश कोई मुश्किल काम नहीं है। आप वहां शांति बहाल कर दीजिए तो निवेश आएगा। 


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दक्षिण कश्मीर के 4 जिले अति संवेदनशील
अनंतनाग, पुलवामा, कुलगाम और शोपियां। माना जाता है कि घाटी से जो युवा आतंकी सगठनों में भर्ती होते हैं, उनमें 80% इन 4 जिलों से आते हैं। इनमें भी शोपियां और पुलवामा में हालात ज्यादा चिंताजनक हैं। बुरहान वानी और जाकिर मूसा इसी जिले के त्राल कस्बे से थे। इन 4 जिलों की आबादी करीब 24 लाख है। करीब-करीब 100% आबादी मुस्लिम है।


अब बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम से विकास होगा
कश्मीर में बीएसएफ और सीआरपीएफ की इंटेलिजेंस विंग का नेतृत्व कर चुके के. श्रीनिवासन के अनुसार, बीएसएफ सीमाओं से सटे बाकी राज्यों के गांवों में लगातार बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम (BADP) चला रही है। इसमें फोर्स वहां पर आर्थिक मदद के साथ अवेयरनेस प्रोग्राम भी चलाती है। लोगों की हर तरह की मदद करती है। लेकिन अनुच्छेद 370 के कारण जम्मू-कश्मीर के कुछ जिलों में ऐसा नहीं हो पाता था। खासकर घाटी में लोग पत्थरबाजी करते थे। वे सुरक्षा बलों के सामने तिरंगा जला देते थे। अब बीएसएफ वहां बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम चलाएगी। इससे वहां के लोगों की सोच बदलेगी और उन्हें समझ आएगा कि फोर्स के लिए देश के बाकी लोगों में और कश्मीरियों में कोई फर्क नहीं है। सब भारतवासी हैं। 


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घुसपैठ का असर भी इन्हीं चार जिलों में सबसे ज्यादा 
अनंतनाग, पुलवामा, कुलगाम और शोपियां में सेब के बागान हैं। यह सबसे घने जंगल वाला इलाका है। छोटी नदियां और नाले हैं। आतंकी कई दिन तक छुपे रह सकते हैं। घुसपैठ के लिए नालों और नदियों का इस्तेमाल अब ज्यादा होने लगा है। 2018 में 140 पाकिस्तानी आतंकी घुसपैठ में कामयाब रहे। 110 को मार गिराया गया। जो बचे हैं, वे ज्यादातर इन चार जिलों में ही हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, घाटी में करीब 110 विदेशी आतंकी अब भी मौजूद हैं। 


सियासत का दखल
यही चार जिले महबूबा मुफ्ती की पार्टी पीडीपी का भी मुख्य गढ़ हैं। महबूबा मुफ्ती ने यहां ज्यादा सुरक्षाबलों की तैनाती की इजाजत नहीं दी थी। उनका कहना था कि इससे नागरिकों में दहशत और सरकार के प्रति गुस्सा बढ़ता है।


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इन 4 जिलों में सुरक्षा बलों को अस्थाई कैम्प बनाकर रहना पड़ता था 

 

  • आतंकियों के साथ कुछ मुठभेड़ में शामिल रहे सीआरपीएफ के एक अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर भास्कर ऐप को बताया कि अनंतनाग, पुलवामा, कुलगाम और शोपियां में पहले सुरक्षा बलों को कार्रवाई करने में दिक्कत होती है। वहां के लोग विरोध करते थे। उन्हें राजनीतिक संरक्षण भी मिला हुआ था। सुरक्षा बलों को वहां पर मजबूरी में अस्थाई शिविरों में रहना पड़ता था। अनुच्छेद 370 हटने के बाद यह दिक्कत नहीं होगी, क्योंकि वहां भी भारत का संविधान लागू होगा। दूसरा- अभी इन जिलों के लोगों को भले ही समझ न आए कि 370 हटना उनके लिए फायदेमंद है, लेकिन धीरे-धीरे वे समझ जाएंगे। सरकार वैसे भी यहां पर युवाओं को सेना में भर्ती का मौका दे रही है। उम्मीद है कि अगले 5 से 10 सालों में यहां की पूरी तस्वीर ही बदल जाएगी। 
  • मेजर जनरल (रिटायर्ड) जीडी बख्शी बताते हैं कि साझा सरकार में दक्षिण कश्मीर में सुरक्षा बलों की तैनाती का फैसला महबूबा मुफ्ती के हाथों में था। महबूबा ने कहा था कि दक्षिण कश्मीर में भारत की फौज क्यों है? वहां से फौज हटा दी गई। इसके बाद वहां बुरहान वानी और जाकिर मूसा जैसे आतंकी पनपे। अब वहां सुरक्षा बलों की तैनाती है। अनुच्छेद 370 हटने से वहां शांति आएगी तो चुनाव प्रक्रिया भी बाकी राज्यों की तरह बिना किसी धांधली के पूर्ण कराई जा सकेगी। 
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