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बंबई से बनारस: दसवीं रिपोर्ट / रास्ते में खड़ी गाड़ी देखी तो पुलिस वाले आए, पूछा-पंचर तो नहीं हुआ, वरना दुकान खुलवा देते हैं, फिर मास्क लगाने और गाड़ी धीमी चलाने की हिदायत दी

झांसी में सब इंस्पेक्टर बृजेश कुमार सिंह ने उल्हासनगर से मऊ होते हुए इलाहाबाद जा रहे मजदूरों की गाड़ी खड़ी देखी तो उतरकर उनका हालचाल पूछा। उन्होंने वहां जमा लोगों से खाना-पानी का भी पूछा।
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  • पुलिस वाले बोले, टेंपो स्पीड में न चलाए, 10 घंटे का सफर 12 में भी पूरा हुआ तो कुछ नहीं बिगड़ेगा, बस सुरक्षित सफर करें
  • झांसी पुलिस के सब इंस्पेक्टर बृजेश सिंह दो महीने से इस रास्ते पर गश्त लगा रहे हैं, कोई गरीब दिखता है तो पैसे दे देते हैं, कभी खाना खिला देते हैं

विनोद यादव

May 20, 2020, 04:44 PM IST

झांसी. दैनिक भास्कर के जर्नलिस्ट बंबई से बनारस के सफर पर निकले हैं। उन्हीं रास्तों पर जहां से लाखों लोग अपने-अपने गांवों की ओर चल पड़े हैं। नंगे पैर, पैदल, साइकिल, ट्रकों पर और गाड़ियों में भरकर। हर हाल में वे घर जाना चाहते हैं, आखिर मुश्किल वक्त में हम घर ही तो जाते हैं। हम उन्हीं रास्तों की जिंदा कहानियां आप तक ला रहे हैं। पढ़ते रहिए..

दसवीं रिपोर्ट, नेशनल हाईवे 39 से:

हम उप्र में निमाड़ी से कुछ आगे ही बढ़े थे कि यहां के बांगड़ गांव के पास एक टेंपों खड़ा दिखा। वहां महिला पुरुष बच्चों को मिलाकर करीब 12 लोग थे और हम उनसे बातें करने लगे। कुछ को मऊ जाना है, कुछ इलाहाबाद जाएंगे।

एक छोटे से लोडिंग टेंपों से ये 12 मजदूर 16 मई को महाराष्ट्र के उल्लहासनगर से निकले थे।

बातें अभी शुरू ही हुई थीं कि झांसी पुलिस के दो अधिकारी वहां से निकले। भीड़ देखी तो गाड़ी घुमाकर हमारे पास आए। ब्रजेश कुमार सिंह और धर्मवीर सिंह राजावत उनका नाम था। बृजेश सिंह ने जीप से उतरते ही मजदूरों से पूछा कहीं टेंपों पंचर-वंचर तो नहीं हो गया है? इस पर मजदूरों ने ना में जवाब दिया।

सिंह को लगा कि उनकी पुलिस की वर्दी देख मजदूर थोड़े घबराए हुए हैं। उन्होंने मजदूरों को कहा कि आगे पंचर की दुकान बंद है। यदि मदद की जरूर है तो बता दो मैं दुकान खुलवा देता हूं ताकि आप लोग आगे का सफर कर सकें।

अब मजदूरों ने अपने सफर की जानकारी बृजेश सिंह को देना शुरू किया। एक मजदूर ने उन्हें बताया कि महाराष्ट्र में बाइक से बाहर निकलने वालों को पुलिस डंडे से मार रही है। बातों के बीच ही उन दोनों पुलिस वालों ने लोगों को मास्क लगाने की हिदायत दी। ये भी कहा कि टेंपो स्पीड में न चलाए, बोले- 10 घंटे का सफर 12 में भी पूरा हुआ तो कुछ नहीं बिगड़ेगा। बस सुरक्षित सफर करें।

उल्हासनगर के इन मजदूरों के पास यूपी आने का कोई पास भी नहीं था।

झांसी पुलिस के सब इंस्पेक्टर बृजेश सिंह बताते हैं कि वे दो महीने से इस मार्ग पर गश्त लगा रहे हैं। क्योंकि इस रास्ते से बड़ी संख्या में मजदूर जा रहे हैं इसलिए बीच बीच में लोगों को रोक कर उनका हालचाल भी पूछ लेते हैं।

उन्होंने बताया कि एक दिन उन्हें एक मजदूर के हाथ में बच्चा और सिर पर थैला देखा, उसकी पत्नी के हाथ में भी कुछ सामान और गोद में एक नन्हीं बच्ची थी। इस मजदूर के साथ दो छोटे बच्चे पैदल चल रहे थे। मुझे दया आ गई। मैंने उन्हें जेब से 100 रुपए निकाल कर दिए ताकि वे आगे केला या अन्य कुछ लेकर खा लें।

झांसी पुलिस के सब इंस्पेक्टर बृजेश सिंह अपने साथी पुलिसकर्मी धर्मवीर सिहं राजावत के साथ लॉकडाउन के बाद से ही रात-दिन इस रास्ते पर गश्त करते हैं।

इसी तरह एक रात गश्ती के वक्त उन्होंने 30 सवारियों से भरी बस देखी। पूछताछ करने पर पता चला कि बस के तीन टायर एक साथ पंचर हो गए हैं। लॉकडाउन व रात का वक्त होने की वजह से बस में सवार सभी लोगों चिंतित थे। मैंने इनकी परेशानी को समझा और देर रात पंक्चर वाले को समझा-बुझाकर उसकी दुकान खुलवाई और रास्ते में फंसे मजदूरों की मदद की।

वे बताते हैं कि मैं समझ रहा हूं कि ये मजदूर बहुत ही दिक्कत में अपने शहर को छोड़कर गांव की ओर आ रहे हैं।

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