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डीबी ओरिजिनल / ब्रह्मकपाल को छोड़ कहीं भी बारिश से अड़चन नहीं, श्राद्ध के लिए ऑनलाइन बुकिंग और डिजिटल पूजा



Pitru Paksha Shradh 2019: Online Shradh Pitru Paksha Puja, Digital Pitru Puja Booking; From Rameshwaram to Ujjain
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Pitru Paksha Shradh 2019: Online Shradh Pitru Paksha Puja, Digital Pitru Puja Booking; From Rameshwaram to Ujjain

  • गया में 10 लाख लोग पिंडदान और श्राद्ध कराएंगे, फल्गु में गंदे नाले से लोग परेशान
  • ब्रह्मकपाल में इस साल श्राद्ध पूजा सबसे मुश्किल रहेगी, रास्ते बंद और बुकिंग न के बराबर
  • रामेश्वरम के अग्नि तीर्थम में श्राद्धकर्म होंगे, यहां मौसम की मार सबसे कम
  • बारिश की खबरों से त्र्यंबकेश्वर में श्रद्धालुओं की संख्या थोड़ी कम हुई
  • उज्जैन में लगातार बारिश के बाद भी लोगों की आस्था कम नहीं

नितिन आर. उपाध्याय

नितिन आर. उपाध्याय

Sep 13, 2019, 12:49 PM IST

भोपाल. आज से पितृ पूजा का पर्व श्राद्ध पक्ष शुरू हो रहा है। देशभर में जगह-जगह तीर्थों में लोग अपने दिवंगत परिजनों के मोक्ष की कामना से पिंडदान करते हैं। इस साल देश के कुछ इलाकों में रिकॉर्ड तोड़ बारिश के कारण सामान्य जन-जीवन प्रभावित हो रहा है, लेकिन बारिश आस्था के आगे पराजित है। रामेश्वरम् से लेकर उज्जैन तक, श्राद्ध कर्म के लिए प्रसिद्ध तीर्थों में महीनों पहले से ऑनलाइन बुकिंग की जा रही है। पिंडदान और श्राद्धकर्म के लिए पिछले एक-दो साल में 100 से ज्यादा वेबसाइट्स बन गई हैं। इन पर लोग ऑनलाइन बुकिंग कर अपने लिए पूजा की पहले ही व्यवस्था कर रहे हैं। पंडितों ने अपने नामों से भी वेबसाइट्स बनाई हुई हैं, जिससे यजमान उन्हें पहले ही बुक कर लेते हैं।

 

बिहार के गया में इस दौरान सबसे ज्यादा भीड़ होती है। अनुमान है कि इस साल 10 से 12 लाख लोग गया के अलग-अलग स्थानों पर पिंडदान करने आएंगे। केवल गया ही एकमात्र ऐसा तीर्थ है, जहां पितृ पूजा के लिए न आ पाने वाले लोग पंडितों को अपना आचार्य नियुक्त कर उनसे डिजिटल पूजा की बुकिंग भी करा रहे हैं। पूजा के वीडियो यजमानों तक पहुंचाए जाएंगे या फिर वीडियो कॉलिंग के जरिए दूर स्थानों पर मौजूद यजमानों को उनकी तरफ से होने वाली पूजा लाइव दिखाई जाएगी।

 

उत्तराखंड का ब्रह्मकपाल, तमिलनाडु का रामेश्वरम, महाराष्ट्र का नासिक और मध्य प्रदेश का उज्जैन तीर्थ ऐसे स्थान हैं, जहां श्राद्ध के दौरान सबसे ज्यादा भीड़ होती है। केवल उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम के पास मौजूद ब्रह्मकपाल तीर्थ पर ही सबसे कम भीड़ रहेगी। कारण, यहां लगातार बारिश के कारण पहाड़ धंसे हुए हैं, रास्ते बंद हैं, शासन-प्रशासन भी लोगों से न आने की अपील कर रहा है। वहीं, रामेश्वरम, उज्जैन और नासिक में बारिश का आस्था पर कोई असर नहीं है।

 

गया : 10 लाख लोग आएंगे, 1500 से लेकर लाखों तक के पैकेज
गया में भले ही फल्गु नदी में पानी नहीं है, लेकिन यही फल्गु की खासियत भी है। इसे अंतःवाहिनी सलिला यानी भूमि के अंदर बहने वाली नदी माना गया है। लेकिन, पुजारी इससे नाराज हैं कि फल्गु में मिलने वाले गंदे नाले को प्रशासन रोक नहीं पाया। पिंडदान के लिए लोगों को नाले के कीचड़ से निकलकर जाना पड़ रहा है। गया शहर की 6 जगहों गयाकूप वेदी, गयासिर वेदी, वैतरणी तालाब, ब्रह्मसत वेदी, द्यौतपद वेदी, आदि गया वेदी पर पिंडदान और श्राद्ध किए जाएंगे। गया के तीर्थ पुरोहित पं. गोकुल दुबे के मुताबिक, लगभग 4 महीने पहले से देश के अलग-अलग शहरों से लोग फोन करके श्राद्ध के लिए बुकिंग करा रहे हैं। करीब 10 लाख लोग श्राद्ध पक्ष के दौरान गया आएंगे। गया में 1, 3, 5, 7, 9 और 17 दिन की पूजाओं के अलग-अलग पैकेज हैं। 1500 से लेकर 4500 तक की राशि एक दिन की पूजा के लिए है। वहीं 17 दिन की पूजा का खर्च लाखों तक आता है। इसमें ठहरने, ब्राह्मण भोज आदि का खर्च शामिल है।

 

ब्रह्मकपाल : रास्ते बंद, बारिश के कारण आना-जाना मुश्किल, बुकिंग के लिए 2-4 ही फोन
उत्तराखंड में बद्रीनाथ मंदिर के पास मौजूद ब्रह्मकपाल को भी श्राद्धकर्म और पिंडदान के लिए श्रेष्ठ तीर्थ माना जाता है। पौराणिक मान्यता है कि इस जगह भगवान शिव को भी ब्रह्महत्या के दोष से मुक्ति मिली थी। आमतौर पर श्राद्धपक्ष में यहां उड़ीसा के लोग सबसे ज्याादा आते हैं। कारण उड़ीसा सूर्य उपासक राज्य है और ब्रह्मकपाली ही वो पितृ तीर्थ है, जहां सबसे पहले सूर्य की रोशनी पड़ती है। हनुमान चट्टी के पंडित किशोरीलाल पंचभैया के मुताबिक इस बार ज्यादा बारिश के कारण लोगों की भीड़ कम है। कई रास्ते बंद हैं, लेकिन तीर्थों पर पूजन जारी है। उड़ीसा से सबसे ज्यादा श्रद्धालुओं का आना होता था, लेकिन इस बार 2-4 लोगों के ही फोन आए हैं। तीर्थों पर पूजन के लिए व्यवस्थाएं तो हैं लेकिन आने के रास्ते बंद हैं।

 

त्र्यंबकेश्वर : 10 से 15 प्रतिशत कम बुकिंग, लेकिन लोगों का आना जारी
नासिक के त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग को पितृ दोष और कालसर्प दोष निवारण के लिए जाना जाता है। महाराष्ट्र में बारिश की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, इस कारण तीर्थ पर पितृदोष के लिए आने वाले लोगों की संख्या में भी कमी आई है। पुरोहित पं. सुशील गणेश कुलकर्णी के मुताबिक, श्रद्धालुओं की संख्या में 10 से 15 प्रतिशत की ही कमी है, लेकिन ऑनलाइन और फोन पर बुकिंग जारी है। बड़े पैमाने पर लोग तीन दिन के नागबलि-नारायण बलि के अनुष्ठान की बुकिंग करा रहे हैं। बारिश इस समय नासिक और आसपास के इलाकों में थोड़ी कम हो गई है तो उम्मीद है कि श्राद्धपक्ष में लोगों की संख्या में इजाफा हो जाएगा।

 

रामेश्वरम् : अग्नि तीर्थम् पर पूजा, लोग वेबसाइट पर करा रहे हैं ऑनलाइन बुकिंग
रामेश्वरम् में भगवान राम को ब्रह्महत्या के दोष से मुक्ति मिली थी, क्योंकि रावण के वध से ब्राह्मण हत्या का दोष लगा था। रामेश्वरम् ज्योतिर्लिंग के पास मौजूद अग्नि तीर्थम् पर हजारों लोग रोज पिंडदान और श्राद्ध कर्म कराएंगे। इसके लिए मंदिर की वेबसाइट सहित कई पुरोहितों की वेबसाइट्स भी हैं, जिन पर ऑनलाइन बुकिंग हो रही है। बड़ी संख्या में लोग अपनी तारीखें बुक करा रहे हैं। एक दिन की पूजा का खर्च 4500 से लेकर 17 हजार तक आ रहा है। पं. वी. राजशेखरम् के मुताबिक लोग यहां आसानी से आ-जा पा रहे हैं क्योंकि मौसम का कोई बड़ा असर यहां नहीं है।

 

उज्जैन : भारी बारिश लेकिन रोज 5 हजार लोग कराएंगे श्राद्ध और पिंडदान
मध्यप्रदेश के उज्जैन को भी श्राद्धकर्म के लिए श्रेष्ठतम स्थानों में से एक माना जाता है। नासिक में जो पूजन तीन दिन में होता है, उसे यहां एक दिन में कराया जाता है। मध्यप्रदेश इस समय अतिवृष्टि से जूझ रहा है और लगभग हर नदी बाढ़ग्रस्त है, लेकिन उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में कोई कमी नहीं है। तीर्थ पुरोहित पं. राजेश त्रिवेदी (आमवाला पंडा) के मुताबिक देशभर से लोगों के फोन आ रहे हैं। यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में कोई कमी नहीं होगी। श्राद्ध पक्ष में प्रतिदिन 5 से 7 हजार लोग घाटों पर आकर पूजा करवाएंगे। नासिक में होने वाली तीन दिन की नागबलि नारायण बलि पूजा का परिष्कृत रुप पितृदोष और कालसर्प दोष पूजा के रूप में एक दिन में यहां कराया जाता है। यहां 500 से लेकर यजमान की इच्छाशक्ति के अनुरूप पूजा होती है। आमतौर पर सभी पंडितों के अपने-अपने तय यजमान हैं, जिनके पास उनकी बुकिंग पहले ही होती है।

 

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