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डीबी ओरिजिनल / ट्री-बाइक बनाने वाले गणपति भट्‌ट बोले- मेरे 30 लाख खर्च हुए, पर मैं मुनाफा नहीं कमाऊंगा



Tree Climbing Bike: Karnatak Farmer Ganapati Bhatt Interview to Dainik Bhaskar; Coconut & Areca Nut Trees
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Tree Climbing Bike: Karnatak Farmer Ganapati Bhatt Interview to Dainik Bhaskar; Coconut & Areca Nut Trees

  • 75 हजार रुपए में कंपनी से खरीदी जा सकती है ट्री बाइक
  • मशीन का अपडेटेड वर्जन बनाया, अब बारिश में भी पेड़ पर चढ़ सकेंगे
  • टू-स्ट्रोक इंजन वाली मशीन का वजन 28 किलो, 80 किलो वजन तक का कोई भी व्यक्ति 30 सेकंड में पेड़ की ऊंचाई तक पहुंच सकता है

Dainik Bhaskar

Aug 13, 2019, 12:20 PM IST

अक्षय बाजपेयी/ डीबी ओरिजिनल डेस्क. कनार्टक के साजिपामुडा गांव में रहने वाले किसान गणपति भट्‌ट ने एक "ट्री-बाइक" बनाई है, जिसके जरिए तेजी और सुरक्षित ढंग से सुपारी के पेड़ पर चढ़ा-उतरा जा सकता है। खास बात है कि इसका उपयोग महिला और पुरुष दोनों ही कर सकते हैं। पिछले दिनों उनकी मशीन का वीडियो इतना वायरल हुआ कि 2 हजार लोग मशीन के डेमोन्स्ट्रेशन के लिए उनके घर पहुंच चुके हैं। महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा को यह आविष्कार इतना पसंद आया कि उन्होंने गणपति को एक बड़ा ऑफर भी दिया है।

 

गणपति भट्‌ट ने दैनिक भास्कर मोबाइल ऐप से बातचीत करते हुए बाइक बनाने का अपना एक्सपीरियंस शेयर किया। साथ ही उन्होंने बताया कि उनका आगे का प्लान किया है। 

ऐसे बनी देश की पहली ट्री-बाइक

  1. कैसी है ये मशीन ?

    सुपारी और नारियल के पेड़ दक्षिण भारत के लगभग बगीचों और खेतों में बहुतायत से मिलते हैं। फल तोड़ने के लिए पर चढ़ना हमेशा से एक मुश्किल काम रहा है, क्योंकि ये पेड़ सीधे और चिकने होते हैं। इन पर चढ़ने के लिए कुशल मजदूर भी आसानी से नहीं मिल पाते  हैं और इसी वजह से किसान इनकी खेती से कतराने लगे हैं। इन्हीं पेड़ों पर आसानी से चढ़ने के लिए गणपति ने ऐसी बाइक बनाई है, जो पेट्रोल से चलती है और सुरक्षित ढंग से 80 किलो वजन तक का व्यक्ति मात्र 30 सेकंड में 100 फीट ऊपर तक पहुंच सकता है। 

  2. कैसे आया आइडिया?

    गणपति कहते हैं कि मेरे खुद के 15 एकड़ में सुपारी के प्लांट हैं। मेरे पास 10 हजार सुपारी के पेड़ हैं। इन पर दवा का छिड़काव करना हो या फल तोड़ना हो, काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। बारिश के मौसम में खासतौर पर परेशानी आती थी। काम के लिए मजदूर नहीं मिलते थे और हम जैसे किसान परेशान होते थे। इसी समस्या और जरूरत के चलते मशीन बनाने का आइडिया आया।

     

    गणपति कहते हैं कि मेरे खुद के 15 एकड़ में सुपारी के प्लांट हैं

  3. कितना खर्च करना पड़ा?

    गणपति बताते हैं, ‘‘मैं पिछले कई सालों से इस आइडिया पर काम कर रहा था। चूंकि ये ऊंचे पेड़ों पर चढ़ने वाला काम है और इसमें जान का खतरा हमेशा बना रहता है, इसलिए मैंने आरएंडडी करने में करीब 30 लाख रुपए अपनी जेब से खर्च किए। बाइक के टायर से लेकर ब्रेक तक हर पुर्जे का बार-बार परख कर देखा। अलग-अलग कंपनियों के प्रोडक्ट आजमाए। करीब तीन साल तक ऐसा चला तब जाकर सही मशीन बना पाया। मैंने 2016 में मशीन की मैन्युफैक्चरिंग शुरू की थी। अब इसकी लागत भी कम हो गई है और किसान इसे 75 हजार रुपए में खरीद सकते हैं।’’

  4. मशीन की खासियत क्या है?

    मशीन का वजन 28 किलो है और इसमें टू-स्ट्रोक इंजन दिया गया है। सेफ्टी बेल्ट भी दिया गया है। 80 किलो वजन तक का कोई भी व्यक्ति 30 सेकंड में पेड़ की ऊंचाई तक पहुंच सकता है। 100 फीट ऊंचाई तक मशीन आसानी से जा सकती है। मशीन में शॉक एब्जॉर्वर के साथ हाइड्रॉलिक ड्रम का इस्तेमाल किया गया है। इससे इंजन कभी स्लिप भी हो जाता है तो कोई खतरा नहीं होगा।

     

    मशीन का वजन 28 किलो है

  5. एक लीटर में कितना चलती है?

    इंजन पेट्रोल पर ही चलता है। एक लीटर पेट्रोल के साथ 40 मिली इंजन ऑयल डालना होता है। एक लीटर पेट्रोल में 80 पेड़ों पर चढ़ा जा सकता है। मशीन चलाने वाले व्यक्ति के वजन भी यह निर्भर करेगा कि मशीन एक लीटर पेट्रोल में कितना चल सकेगी। हालांकि 70 किलो वजन तक का कोई व्यक्ति है तो वह एक लीटर पेट्रोल में 80 से 90 बार चढ़ सकता है। 

  6. कितनी क्षमता है?

    सामान्यत: किसी पेड़ पर चढ़ने और दवा छिड़काव के लिए एक मजदूर 2 हजार रुपए लेता है और एक दिन में वह 35 से 40 पेड़ों पर ही चढ़ पाता है। इस हिसाब से मशीन काफी किफायती है। इस मशीन में हाइड्रॉलिक ड्रम डिस्क ब्रेक दिए हैं। स्कूटर की तरह हैंडल दिया है। पेट्रोल और ऑयल की मात्रा दिखाने के लिए इंडिकेटर दिया है। एक पेड़ पर चढ़कर व्यक्ति आसपास के कई पेड़ों पर दवा का छिड़काव इससे कर सकता है।

  7. मुनाफा कितना कमाएंगे?

    गणपति ने बताया, ‘‘इसके व्यावसायिक निर्माण के लिए एक निजी कंपनी से करार किया है। कंपनी में काम करने वाले शख्स मेरे मित्र हैं। कंपनी ने इसे बनाकर बेचना भी शुरू कर दिया है। मुझे इससे कोई मुनाफा नहीं कमाना। मैं इसका अपडेटेड और ज्यादा क्षमता वाला वर्जन भी तैयार कर चुका हूं । इसके बाद बारिश के सीजन में भी इस गाड़ी से पेड़ के ऊपर चढ़ा और उतरा जा सकता है।’’

     

    कंपनी ने इसे बेचना भी शुरू कर दिया है

  8. फ्यूचर प्लान क्या है?

    भट्‌ट के मुताबिक- अब मैं नारियल के पेड़ पर चढ़ने वाली मशीन पर काम कर रहा हूं। इस नए मॉडल की आरएंडडी भी 80% पूरी हो चुकी है। जल्द से जल्द इसे भी सबके सामने पेश करूंगा। मैं सिर्फ किसानों को फायदा पहुंचाना चाहता हूं। मैंने कंपनी से एक ही शर्त पर करार किया है कि वह इस मशीन की गुणवत्ता के साथ किसी तरह का समझौता नहीं करेगी। 

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