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कैसे बनेंगे आत्मनिर्भर? / हम बेचते कम और खरीदते ज्यादा हैं; चीन से कारोबार में 6 साल में 20 लाख करोड़ का नुकसान, बीते साल चीन से 3 हजार करोड़ रु के खिलौने खरीदे थे

We sell less and buy more; China lost 20 lakh crores in business in 6 years, bought toys worth 3 thousand crores from China last year
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We sell less and buy more; China lost 20 lakh crores in business in 6 years, bought toys worth 3 thousand crores from China last year

  • पहले यूएई था, फिर चीन और 2018-19 से अमेरिका हमारा सबसे बड़ा कारोबारी साझेदार बन गया
  • चीन के साथ हमारा ट्रेड बैलेंस हमेशा निगेटिव में रहता है, लेकिन अमेरिका के साथ हमेशा पॉजिटिव

दैनिक भास्कर

May 17, 2020, 09:40 AM IST

नई दिल्ली. 12 मई को प्रधानमंत्री मोदी ने जब देश को संबोधित किया, तो उनका फोकस एक ही शब्द पर सबसे ज्यादा रहा और वो शब्द था 'आत्मनिर्भर भारत'। यानी, ऐसा भारत जिसे किसी चीज के लिए दूसरे पर निर्भर रहने की जरूरत न पड़े। फिलहाल हम दूसरे देशों से खरीदते ज्यादा हैं और बेचते कम हैं। कारोबार की भाषा में इसे एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट कहते हैं। लेकिन, जब हम खरीदते ज्यादा हैं और बेचते कम हैं, तो उससे हमारा ट्रेड बैलेंस निगेटिव में चला जाता है यानी घाटा होता है। 

6 साल में हमें 56 लाख करोड़ से ज्यादा का नुकसान, अकेले चीन से ही 20 लाख करोड़ का घाटा

भारत के एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट डेटा के लिए हमने मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स की वेबसाइट पर मौजूद डेटा खंगाले। इसके मुताबिक, अप्रैल 2019 से जनवरी 2020 के बीच हमने 18.60 लाख करोड़ रुपए का एक्सपोर्ट किया। जबकि, 28.40 लाख करोड़ रुपए का इम्पोर्ट। इस तरह हमारा ट्रेड बैलेंस -9.79 लाख करोड़ रुपए रहा।

2014-15 से लेकर 2019-20 (अप्रैल से जनवरी) के बीच हमने 115.85 लाख करोड़ रुपए का एक्सपोर्ट किया यानी बेचा। जबकि, 172.39 लाख करोड़ रुपए का इम्पोर्ट किया यानी खरीदा। इससे हमें इस 6 साल के दौरान 56.54 लाख करोड़ रुपए का घाटा हुआ।

इसी तरह से 2014-15 से लेकर 2019-20 (अप्रैल से जनवरी) के बीच हमने अकेले चीन को 5.04 लाख करोड़ रुपए का सामान बेचा, जबकि उससे 25.76 लाख करोड़ रुपए का सामान खरीदा। यानी, चीन से हमें 6 साल में 20 लाख करोड़ रुपए का घाटा हुआ।

चीन से सबसे ज्यादा इलेक्ट्रिकल मशीनरी और इक्विपमेंट खरीदते हैं

भारत ने चीन से 2018-19 में 4.92 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का सामान खरीदा। यह 2017-18 से 0.3% कम है। 

चीन से सबसे ज्यादा हम इलेक्ट्रॉनिक आइटम खरीदते हैं। 2018-19 में भारत ने चीन से 1.44 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा के इलेक्ट्रिक मशीनरी और इक्विपेंट खरीदे थे। हालांकि, इसमें भी 2017-18 के मुकाबले करीब 22% की गिरावट आई थी। 

2017-18 के दौरान भारत ने 1.84 लाख करोड़ रुपए के इलेक्ट्रिक मशीनरी और इक्विपमेंट खरीदे थे।

इनके अलावा न्यूक्लियर रिएक्टर्स, ऑर्गनिक केमिकल्स, प्लास्टिक आर्टिकल और फर्टिलाइजर जैसे सामान चीन से इम्पोर्ट होने वाले टॉप-10 कमोडिटी में आते हैं।

इतना ही नहीं, 2018-19 में हमने चीन से 3 हजार 162 करोड़ रुपए से ज्यादा के खिलौने खरीदे थे। जबकि, 784 करोड़ रुपए के तो साबुन, वॉशिंग डिटर्जेंट जैसे सामान भी खरीदे थे।

2011-12 से पहले तक यूएई हमारा सबसे बड़ा कारोबारी देश हुआ करता था। लेकिन, उसके बाद यूएई की जगह चीन ने ले ली। 2011-12 से लेकर 2017-18 तक चीन हमारा सबसे बड़ा कारोबारी देश बना रहा। इस दौरान दोनों देशों के बीच कारोबार भी बढ़ा।

2011-12 में भारत-चीन के बीच 3.52 लाख करोड़ रुपए का कारोबार हुआ था। जो 2017-18 में बढ़कर 5.78 लाख करोड़ रुपए का हो गया। चीन के साथ होने वाले कारोबार में 2011-12 की तुलना में 2017-18 में 60% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई।

लेकिन, 2018-19 में चीन की जगह अमेरिका ने ले ली और अमेरिका भारत का सबसे बड़ा कारोबारी साझीदार बन गया। 2017-18 में भारत-अमेरिका के बीच 4.80 लाख करोड़ रुपए का कारोबार हुआ था। जबकि, 2018-19 में 6.15 लाख करोड़ रुपए का कारोबार हुआ।

अप्रैल 2019 से जनवरी 2020 के बीच ही भारत-अमेरिका के बीच 5.30 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का कारोबार हो चुका है। अच्छी बात ये भी है कि चीन के साथ हमारा ट्रेड बैलेंस हमेशा निगेटिव में रहता है, लेकिन अमेरिका के साथ ये हमेशा पॉजिटिव में ही रहता है। पिछले 6 साल में भी अमेरिका के साथ ट्रेड बैलेंस हमेशा 1 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का रहा।

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