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100 साल / पहले विश्व युद्ध में 11 लाख भारतीय सैनिक लड़े; 75 हजार शहीद हुए, इनमें 50% पंजाब प्रांत से थेे



तुर्की में ऑटोमन साम्राज्य के खिलाफ सिख सैनिक गुरु ग्रंथ साहब को साथ लेकर जाते थे। तुर्की में ऑटोमन साम्राज्य के खिलाफ सिख सैनिक गुरु ग्रंथ साहब को साथ लेकर जाते थे।
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तुर्की में ऑटोमन साम्राज्य के खिलाफ सिख सैनिक गुरु ग्रंथ साहब को साथ लेकर जाते थे।तुर्की में ऑटोमन साम्राज्य के खिलाफ सिख सैनिक गुरु ग्रंथ साहब को साथ लेकर जाते थे।
  • ब्रिटिश सरकार ने 9200 सैनिकों को वीरता पदक दिया, 1931 में सैनिकों की याद में दिल्ली में इंडिया गेट बनाया
  • 4 साल तक चली लड़ाई में 30 देशों के 99 लाख सैनिक मारे गए थे, अमेरिका 7 माह युद्ध लड़ा और 1.20 लाख सैनिक गंवाए

Dainik Bhaskar

Nov 11, 2018, 11:25 AM IST

नई दिल्ली. पहले विश्व युद्ध में भारतीय सैनिक सितंबर 1914 में ब्रिटेन की ओर से युद्ध में शामिल हुए थे। कॉमनवेल्थ वॉर ग्रेव कमीशन के मुताबिक 4 साल तक चले इस युद्ध में अविभाजित भारत की ओर से 11 लाख से ज्यादा सैनिकों ने हिस्सा लिया था। भारतीय सेना ने पूर्वी अफ्रीका और पश्चिमी मोर्चे पर जर्मन, ऑटोमन (तुर्क) साम्राज्य के खिलाफ युद्ध लड़ा। इसके अलावा भारतीय सैनिक मिस्र, फ्रांस और बेल्जियम में भी लड़े।


 

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करीब 7 लाख भारतीय सैनिक अकेले तुर्क साम्राज्य के खिलाफ मेसोपोटामिया में मोर्चे पर डटे थे। इस युद्ध में 74,911 भारतीय सैनिक मारे गए। 67 हजार सैनिक घायल हुए। भारत की ओर से युद्ध में शामिल हुए सैनिकों में करीब आधे संयुक्त पंजाब प्रांत से थे। तब पंजाब में साक्षरता दर महज 5% थी। उनमें से कुछ ही सैनिक दस्तखत करना जानते थे। फ्रांस में भारतीय और ब्रिटिश दोनों ही टुकड़ियों का नेतृत्व सर डगलस ने किया था।

 

1915 की शुरुआत में भारतीय सैनिकों को पहले आराम दिया गया, लेकिन जल्द ही उनकी युद्ध में वापसी हुई। युद्ध के बाद ब्रिटिश सरकार ने 9200 भारतीय सैनिकों को वीरता पदकों से सम्मानित किया। सरकार ने पहले विश्व युद्ध में शहीद हुए 74 हजार भारतीय सैनिकों की याद में दिल्ली में 1921 में इंडिया गेट की आधारशिला रखी। यह 1931 में बनकर तैयार हुआ। इसमें 13,300 हजार से ज्यादा सैनिकों के नाम हैं। जोधपुर के राजा सर पेरताब सिंह भी युद्ध में लड़े थे। कहा जाता है कि उन्होंने युद्ध लड़ने के लिए वायसरॉय के दरवाजे पर धरना दे दिया था।

 

युद्ध में भारत से 1.72 लाख जानवर भेजे गए: पहले विश्व युद्ध के दौरान भारत से 172,815 जानवर भेजे गए। इनमें घोड़े, खच्चर, टट्टू, ऊंट, बैल और दूध देने वाले मवेशी शामिल थे। इनमें 8970 खच्चर और टट्टू ऐसे भी थे, जिन्हें बाहर से भारत लाकर प्रशिक्षित किया गया था और फिर युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में भेजा जाता था।

 

भारत अपने सैनिकों का युद्ध में योगदान दुनिया को बताएगा : पहले विश्वयुद्ध में शामिल 11 लाख भारतीय सैनिकों की बहादुरी को बताने के भारत और ब्रिटेन सरकार ने एक खास योजना बनाई है। इसके लिए यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया (यूएसआई), विदेश मंत्रालय और ब्रिटिश हाई कमीशन मिलकर काम कर रही हैं। इस मिशन को बैटल फील्ड टूरिजम नाम दिया है। इसका मकसद, देश के लोगों को यह बताना है कि भारतीय सैनिकों ने प्रथम विश्व युद्ध में कहां-कहां लड़ाई लड़ी। दोनों देश 100 साल पूरे होने पर कई कार्यक्रमों की तैयारी भी की है।

 

सबसे पहले झेला था गैस अटैक: यूएसआई के डायरेक्टर लेफ्टिनेंट जनरल पीके सिंह (रिटायर्ड) कहते हैं नई पीढ़ी को मालूम ही नहीं है कि भारतीय सैनिकों ने कहां-कहां लड़ाई लड़ी है। उस युद्ध में हम दुनिया के हर हिस्से में लड़े थे। चीन के एक पोर्ट को भारतीय सैनिकों ने जर्मनी से वापस लेकर चीन को दिया था। युद्ध में जो सबसे पहला गैस अटैक हुआ था, उसे भारतीय सैनिकों ने सबसे पहले झेला था। हम लोगों को बैटल फील्ड टूरिज्म के जरिए यह सब बातें बताएंगे। 

 

4 साल तक चला युद्ध: 4 साल, 3 महीने, 2 हफ्ते तक चले पहले विश्व युद्ध में 30 देश शामिल थे। 6 करोड़ 82 लाख सैनिक लड़े। 99 लाख 11 हजार सैनिक मारे गए। इनमें 75 हजार भारतीय थे। यह दूसरे विश्व युद्ध तक सबसे बड़ी मानवरचित त्रासदी थी। दूसरे विश्व युद्ध में सैनिकों समेत कुल 7.3 करोड़ लोग मारे गए थे। लेकिन, सबसे ज्यादा आविष्कार पहले विश्व युद्ध के दौरान हुए।

 

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युद्ध पर 15 लाख करोड़ खर्च हुए

 

  • इस युद्ध में करीब 15 लाख करोड़ रु. खर्च हुए। मित्र देशों ने 10.7 लाख करोड़ रुपए खर्च किए। इसमें ब्रिटिश साम्राज्य ने अकेले 3.4 लाख करोड़ रुपए का योगदान दिया। 
  • केंद्रीय शक्तियों ने 4.4 लाख करोड़ रुपए खर्च किए। सबसे ज्यादा योगदान जर्मनी का 3.3 लाख करोड़ का था।
  • युद्ध के बाद ब्रिटेन, इटली और अमेरिका की जीडीपी में इजाफा हुआ। जर्मनी की अर्थव्यवस्था 27% गिर गई। अन्य देशों की जीडीपी आधी तक घट गई।

 

58 देशों ने लीग ऑफ नेशंस बनाया

 

  • युद्ध के बाद 10 जनवरी 1920 को लीग ऑफ नेशंस का गठन हुआ। इसमें 58 देश शामिल थे। हालांकि ये देश 19 साल बाद दूसरे विश्वयुद्ध को रोक नहीं पाए। 
  • 28 जून 1919 में पेरिस शांति संधि पर दस्तखत हुए। इसमें एक तरफ जर्मनी था, तो दूसरी तरफ फ्रांस, इटली, ब्रिटेन और अन्य दूसरी ताकतें थी। 
  • संधि में जर्मनी से आर्थिक मुआवजे की मांग की गई। 1919 में वारसाय संधि में जर्मनी को युद्ध का जिम्मेदार बताया गया।

 

अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन समेत 70 देशों में कार्यक्रम : पहले विश्व युद्ध के 100 साल पूरे होने पर भारत समेत दुनिया के 70 देशों में कार्यक्रम हो रहे। सबसे बड़ा कार्यक्रम फ्रांस में होगा। वहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, जर्मन चांसलर अंगेला मर्केल, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत 60 देशों के राष्ट्राध्यक्ष पहुंच चुके हैं। ब्रिटेन में शनिवार को शहीद हुए सैनिक को पुष्पांजलि दी गई।

 

युद्ध समाप्त होते ही 9 देश बने

 

  • युद्ध खत्म होते ही ऑस्ट्रिया-हंगरी साम्राज्य से अलग होकर ऑस्ट्रिया, हंगरी, चेकोस्लोवाकिया, यूगोस्लाविया बने। जर्मनी-रूस से एस्टोनिया, लातेविया, लिथुआनिया, पोलैंड और फिनलैंड बने। 
  • 100 साल में दुनिया में 51 अफ्रीकी और 44 नए एशियाई देश बने। दुनिया में सैनिकों की याद में 2 लाख से ज्यादा वार मेमोरियल बनाए गए हैं।

 

ब्रिटेन से 2.50 लाख सैनिक ऐसे भी लड़े, जिनकी उम्र 18 साल से कम थी : युद्ध में ब्रिटिश जनरल को लड़ने से मना कर दिया गया, क्योंकि ब्रिटेन को डर था कि यदि उसके सभी बड़े अधिकारी मार दिए जाएंगे तो रणनीति कैसे बनेगी। युद्ध में ब्रिटेन की ओर से 2.50 लाख सैनिक ऐसे लड़े, जो 18 साल से कम थे। सबसे कम उम्र का सैनिक 12 साल का था। ब्रिटेन की डाक सेवा ने युद्ध के दौरान सैनिकों तक एक सप्ताह में 1.2 करोड़ पत्र पहुंचाए।

 

युद्ध की वजह : 28 जून 1914 को ऑस्ट्रिया-हंगरी साम्राज्य के उत्तराधिकारी आर्क ड्यूक फ्रांज फार्डिनैंड अपनी पत्नी सोफी के साथ बोस्निया में साराएवो के दौरे पर थे। वहां दोनों की सर्ब राष्ट्रवादी गैवरिलो प्रिंसिप ने हत्या कर दी। इसके बाद 28 जुलाई को ऑस्ट्रिया-हंगरी ने सर्बिया के खिलाफ युद्ध का ऐलान कर दिया। एक अगस्त को जर्मनी ने रूस और दो दिन बाद फ्रांस के साथ भी युद्ध शुरू कर दिया। 

 

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30 से ज्यादा देश लड़े: प्रथम विश्व युद्ध में 30 ज्यादा देश शामिल हुए। इसमें दो धुरी थी। एक ओर 17 से ज्यादा मित्र देश थे, जिनमें सर्बिया, ब्रिटेन, जापान, रूस, फ्रांस, इटली और अमेरिका आदि थे। दूसरी ओर सेंट्रल पावर जर्मनी, ऑस्ट्रिया, हंगरी, बुल्गारिया और ऑटोमन साम्राज्य था। यह युद्ध यूरोप, अफ्रीका, एशिया और उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका महाद्वीप में लड़ा गया। इसमें आधी दुनिया प्रभावित हुई। युद्ध से 4 बड़े साम्राज्य रूस, जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी और उस्मानिया ढह गए। यूरोप की सीमाएं फिर से निर्धारित हुईं। अमेरिका महाशक्ति बनकर उभरा। पहली बार इसी युद्ध में जर्मनी ने केमिकल गैस का इस्तेमाल किया। अमेरिका युद्ध में सिर्फ 7 महीने लड़ा, पर उसके 1.20 लाख सैनिक मारे गए और 2 लाख घायल हुए।
 

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