दिल्ली / डॉक्टरों की हड़ताल से परेशान हुए 40 हजार मरीज, आंसुओं संग छलका दर्द



40 thousand patients troubled by doctors' strike in Delhi
40 thousand patients troubled by doctors' strike in Delhi
हड़ताल करते डॉक्टर। हड़ताल करते डॉक्टर।
जंती देवी, बिजवासन। जंती देवी, बिजवासन।
देवेश राजपूत, मध्य प्रदेश। देवेश राजपूत, मध्य प्रदेश।
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40 thousand patients troubled by doctors' strike in Delhi
40 thousand patients troubled by doctors' strike in Delhi
हड़ताल करते डॉक्टर।हड़ताल करते डॉक्टर।
जंती देवी, बिजवासन।जंती देवी, बिजवासन।
देवेश राजपूत, मध्य प्रदेश।देवेश राजपूत, मध्य प्रदेश।

  • डॉक्टर- हम डॉक्टर हैं, जिंदगी बचाते हैं फिर हमारे साथ मारपीट क्यों...
  • मरीज- हड़ताल से क्या मिलेगा, कोई और रास्ता निकालो, हमारा दर्द भी तो समझो 

Dainik Bhaskar

Jun 15, 2019, 03:24 AM IST

नई दिल्ली. दिल्ली में डॉक्टरों की हड़ताल ने लोगों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में भटकने के लिए मजबूर कर दिया। कोई अपना बच्चा गोद में लिए नजर आया तो कोई घर के बुजुर्ग को कंधे का सहारा देकर इलाज का इंतजार करता दिखा। एम्स में दूर-दराज के शहरों से आए मरीज हताश और परेशान नजर आए तो दूसरे अस्पतालों में भी मरीज पसीना बहाते दिखे। कई लोगों को समझ में ही नहीं आ रहा था कि आखिर मरीज को लेकर जाएं कहां। सुरक्षा की मांग पर अड़े हड़ताली डॉक्टरों और बेहाल मरीजों के बीच एम्स से भास्कर लाइव 

 

मरीज बोले- हमारा क्या कसूर... महीने बाद नंबर आया, फिर नंबर लेना पड़ेगा

बिजवासन की एक मरीज जंती देवा ने कहा कि मुझे ठीक से सुनाई नहीं देता। मेरी आवाज मुझे ही वापस सुनाई पड़ती है। इस समस्या से बहुत लंबे समय से परेशान हूं। कई जगह इलाज भी करा लिया मगर ठीक नहीं हो पाया। मेरे पड़ोसी ने बताया था कि एम्स चले जाओ, वहां अच्छे डॉक्टर हैं। पिछले महीने की 15 तारीख को इस उम्मीद से आई थी कि अब इलाज हो जाएगा लेकिन 14 जून की तारीख मिली। आज जब हम इलाज कराने के लिए आए है तो पता चला हड़ताल है। 
 

किडनी ट्रांसप्लांट होनी थी, नहीं हो पाई

मध्य प्रदेश के देवेश राजपूत ने कहा कि मेरा एम्स में किडनी का इलाज चल रहा है। आज किडनी ट्रांसप्लांट की तारीख देने के लिए बुलाया था। तारीख लेने के लिए विशेष रूप से दमोह (मध्य प्रदेश) से आया हूं। रात को एक धर्मशाला में रुका था। अब आज तो यहां कोई काम नहीं हो रहा। कल फिर आना पड़ेगा, इसलिए रात को फिर से रुकना मजबूरी है। अब पता नहीं कल भी तारीख मिलेगी या नहीं क्योंकि मुझे तो आज बुलाया गया था। परेशान हूं, कोई कुछ भी नहीं बता रहा। 

 

गॉल ब्लेडर में स्टोन है, कई दिनों से काट रहे चक्कर
मथुरा (यूपी) की कंचन देवी ने कहा कि दूर से रोज आ पाना मुश्किल होता है इसलिए रात में सड़क पर ही रुकते हैं, अब एक दिन और बढ़ गया गॉल ब्लेडर में स्टोन है। इंफेक्शन की वजह से पीलिया भी हो गया है। शरीर में सूजन भी हो गई है। पिछले कई दिन से लगातार अस्पताल आ रही हूं। डॉक्टर ने कहा था कि शरीर में पानी भर गया है जिसे इंजेक्शन से निकाला जाएगा। आज आने के लिए कहा था, मगर यहां कोई भी डॉक्टर देख ही नहीं रहा। सुबह से इंतजार करने के बाद अब वापस लौट रहे हैं। कल फिर आना पड़ेगा। 

 

16-16 घंटे काम करते हैं, एक शिफ्ट में 100 मरीज देखते हैं, सुरक्षा के नाम पर कुछ नहीं
हिंदूराव अस्पताल के सीनियर रेजिडेंट डॉ. संजीव चौधरी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के मुताबिक रेजिडेंट डॉक्टर्स से सप्ताह में 48 घंटे काम कराया जा सकता है। मगर अमूमन यह सीमा इससे पार चली जाती है। कई बार तो रेजिडेंट डॉक्टर्स को लगातार 16-16 घंटे डयूटी करनी पड़ती है। इतना ही नहीं एक डॉक्टर पर पूरी शिफ्ट के दौरान करीब 100-100 मरीजों को देखने का भार होता है। प्रशासन चाहता है कि रेजिडेंट डॉक्टर्स अपने तय समय से पहले अस्पताल पहुंच जाए लेकिन उसके रहने की व्यवस्था करने के नाम पर कोई ध्यान नहीं देता।

 

डॉक्टरों ने कहा- हमारा दर्द भी समझो 

डॉ. संजीव ने कहा कि 10 फीसदी से भी कम डॉक्टर्स को हॉस्टल मिल पाता है। काम का बोझ ज्यादा होने की वजह से एक मरीज पर जितना समय दिया जाना चाहिए, वह नहीं दिया जाता। इसकी वजह से मरीज के परिजन गुस्से में आ जाते हैं और डॉक्टर्स के साथ मारपीट करने तक पर उतार आते हैं। डॉक्टर्स की सुरक्षा को लेकर प्रशासन कभी कुछ नहीं सोचता। 

 

सख्त हॉस्पिटल प्रोटेक्शन ऐक्ट बनाने की मांग

मई, 2014 से अगस्त, 2015 किए गए एक अध्ययन के मुताबिक 394 लोगों में से 136 (35 प्रतिशत) ने माना कि पिछले 12 महीनों के दौरान उन्हें कार्यस्थल पर हिंसा झेलनी पड़ी। अध्ययन में शामिल 50 लोगों ने (13 प्रतिशत) शारीरिक हिंसा की बात स्वीकार की। आईएमए ने सख्त हॉस्पिटल प्रोटेक्शन ऐक्ट बनाने की मांग की है।

 

आईएमए 3 दिन विरोध जारी रखेगा. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने शुक्रवार को तीन दिन के विरोध प्रदर्शन की घोषणा कर दी है। इसके अलावा सोमवार को दिल्ली सहित देशभर में आईएमए के करीब 3 लाख से ज्यादा सदस्य डॉक्टर सेवाएं नहीं देंगे। वहीं शनिवार-रविवार विरोध प्रदर्शन जारी रखेगा। इस दौरान काले बिल्ले लगाने के अलावा जगह जगह धरना प्रदर्शन आयोजित होंगे। आईएमए के मुताबिक सोमवार को दिल्ली सहित देशभर में डॉक्टर ओपीडी सहित सभी गैर-जरूरी सेवाओं को 24 घंटे तक के लिए सुबह 6 बजे से अगले दिन सुबह 6 बजे तक स्थगित करेंगे।

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