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दिल्ली / एसी ज्यादा बिजली खा रहे, इसलिए विश्व की 8 टीमें नया मॉडल बना रहीं हैं, अगले साल दिल्ली में टेस्टिंग

Your AC is eating more electricity, so 8 teams of the world are making new model, testing in Delhi next year
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Your AC is eating more electricity, so 8 teams of the world are making new model, testing in Delhi next year

  • दुनिया में 120 कराेड़ एसी, 2050 तक हाे 450 कराेड़ जाएंगे, इनकी गर्मी से धरती को बचाने के लिए ग्लाेबल कूलिंग प्राइज स्पर्धा लाॉन्च की
  • प्रतियोगिता के विजेता की घाेषणा नवंबर 2020 में होगी। उसे 10 लाख डाॅलर का अवॉर्ड दिया जाएगा 

Dainik Bhaskar

Dec 01, 2019, 01:59 PM IST

नई दिल्ली. आपके घर, दुकान और कारखानाें काे ठंडा कर रहे एयर कंडीशनर बिजली की अत्यधिक खपत करते हैं। इनसे पर्यावरण काे भी नुकसान पहुंच रहा है। इसके पीछे वजह यह है कि वर्तमान में उपलब्ध एयर कंडीशनर का माॅडल करीब 100 साल पहले ईजाद किया गया था। तबसे इसमें काेई बदलाव नहीं हुआ। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी का अनुमान है कि धरती की 10 प्रतिशत बिजली की खपत एयर कंडीशनर में हाेती है। भारत में फिलहाल 1.40 कराेड़ एयर कंडीशनर हैं। ग्लाेबल वाॅर्मिंग के चलते जिस तेजी से पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है, उससे अनुमान लगाया जा रहा है कि वर्ष 2050 तक इनकी संख्या 100 कराेड़ हाे जाएगी। 

दुनियाभर में अभी 120 कराेड़ एसी हैं, जाे 2050 तक 450 कराेड़ हाे जाएंगे। एयर कंडीशनर की बढ़ती संख्या और  बिजली की खपत से चिंतित भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय पहल की है। विज्ञान एवं प्राैद्याेगिकी मंत्रालय ने अमेरिका के राॅकी माउंटेन इंस्टीट्यूट (आरएमआई) के साथ मिलकर ग्लाेबल कूलिंग प्राइज स्पर्धा लाॉन्च की है। इसमें 24 देशों के साथ यूरोपीय संघ भी शामिल है।

95 देशाें के 2100 प्रतिभागी प्रतियोगिता में शामिल 

प्रतियोगिता के प्रारंभिक चरण में 95 देशाें के 2100 शामिल हुए। इनमें से 8 टीमें चुनी गईं। इनमें तीन भारत की, तीन अमेरिकी, एक-एक चीन और ब्रिटेन की है। इन्हें प्राेटाेटाइप बनाने के लिए दाे लाख डाॅलर दिए गए हैं। विदेशी टीमाें काे प्राेटाेटाइप तैयार कर भारत भेजना हाेगा। इसकी टेस्टिंग अगले साल दिल्ली की गर्मी में 60 दिन तक हाेगी।

मॉडल चलेगा, लेकिन पर्यावरण के अनुकूल हो

आरएमआई के एमडी इयान कैंपबेल के मुताबिक, नई जनरेशन का एयर कूलिंग सिस्टम पर्यावरण पर पांच गुना कम असरकारी हाेना चाहिए। भले कीमत माैजूदा माॅडल से दाेगुनी हाे।
स्पर्धा के तहत कई आइडिया सामने आए हैं। इनमें वेपर कम्प्रेशन प्रौद्योगिकी, वेपर कूलिंग, एवोपरेटिव कूलिंग और सॉलिड-स्टेट कूलिंग प्रौद्योगिकियों के स्मार्ट एवं हाइब्रिड डिजाइन शामिल हैं। कैंपबेल के मुताबिक, असल चुनाैती बाद में  सामने आएगी। लाेगाें काे यह समझना हाेगा कि नई तकनीक भले की महंगी है, लेकिन पर्यावरण के लिहाज से बेहतर है।

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