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सीलिएक से पीड़ित महिलाओं को बांझ बना रहा ग्लूटेन युक्त आटा, डॉक्टरों का दावा- शादियां भी टूट रही हैं

2 वर्ष पहले
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एक अनुमान के मुताबिक, दुनिया की 0.7 फीसदी आबादी सीलिएक से पीड़ित है। भारत में 60-80 लाख पीड़ित हैं।  - Dainik Bhaskar
एक अनुमान के मुताबिक, दुनिया की 0.7 फीसदी आबादी सीलिएक से पीड़ित है। भारत में 60-80 लाख पीड़ित हैं। 
  • गेहूं-जौ के आटे और ओट्स में मौजूद एक तरह का प्रोटीन ग्लूटेन से कुछ लोगों में सीलिएक का खतरा बढ़ जाता है
  • इस जन्मजात बीमारी से पीड़ित होने पर सावधानी ही बचाव, ग्लूटेन फ्री खाना ही बेहतर

नई दिल्ली (तरुण सिसोदिया) . एम्स ने बांझपन की बढ़ती समस्या को लेकर शोध किया है। इसमें पाया गया कि महिलाओं में सीलिएक की बीमारी तेजी से बढ़ रही है। यह बीमारी गेहूं, जौ, राई और ओट्स में पाए जाने वाले एक प्रोटीन (ग्लूटेन) से होती है। इसके शुरुआती लक्षणों में अपच, अनीमिया, ऐंठन, मुंह में छाले, उलटी, मतली, चिड़चिड़ापन, हड्डी का दर्द, हाथ-पैर में झुनझुनी, त्वचा पर निशान, सिर दर्द, बाल झड़ना और थकान भी सीलिएक के लक्षण हैं।


यह बच्चों को भी होती है। इससे उनकी लंबाई के साथ ही वजन भी कम हो जाता है। शोध में पाया गया कि इससे पीड़ित महिलाएं बांझपन की शिकार हो रही हैं। शोध से जुड़े विशेषज्ञों का कहना शादियां भी टूट रही हैं।

ग्लूटेन फ्री खाना खाकर जी सकते हैं नॉर्मल लाइफ
एम्स के डिपार्टमेंट ऑफ गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी में प्रोफेसर डॉ. गोविंद मखारिया ने बताया, ज्यादातर महिलाओं की बड़ी समस्या बच्चा न होना है। बहुत से महिलाओं के इसके बारे में पता नहीं होता और वह ग्लूटेन युक्त खाना खाती रहती है। लगातार ग्लूटेन युक्त खाने से ऐसी महिलाएं बांझपन की ओर बढ़ रही हैं। यदि किसी को एक बार सीलिएक हो गया तो उसका एक ही रास्ता है ग्लूटेन फ्री खाना।

संदेह से बचने मरीजों ने घर में चक्की रखी 
गेस्ट्रोएंटरोलॉजी के विभाग अध्यक्ष डॉ. अनूप सराया ने कहा कि ग्लूटेन फ्री दाल, मक्की, चावल, डेयरी प्रॉडक्ट, नॉन वेज, फ्रूट आदि खा सकते हैं। बहुत से मरीजों ने अपने घर में चक्की भी रखी हुई है, ताकि किसी भी संदेह से बचा जा सके।