इंटरव्यू / मंगू सिंह बोले- केंद्र व राज्य सरकार के पैसे वाले कॉरिडोर पहले बनेंगे, जाइका वाले समझौते के बाद



Bhaskar interview with DMRC Chief MD Mangu Singh
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Bhaskar interview with DMRC Chief MD Mangu Singh

  • दिल्ली में मेट्रो फेज-4 का निर्माण शुरू होना है, इस पर डीएमआरसी चीफ एमडी मंगू सिंह ने की भास्कर से बातचीत
  • उन्होंने किराया बढ़ाए जाने की आशंका व संभावनाएं, पिंक लाइन की रिंग मेट्रो सर्विस पर अपनी बात रखी

Dainik Bhaskar

Nov 08, 2019, 02:06 AM IST

नई दिल्ली (अखिलेश कुमार). दिल्ली में मेट्रो फेज-4 का निर्माण शुरू होना है। इसे लेकर काफी चुनौतियां हैं। डीएमआरसी बोर्ड में दिल्ली सरकार की तरफ से प्राइवेट सदस्य नामित किए जाने का विवाद भी चल रहा है। दिल्ली सरकार अपना प्रतिनिधि चाहती है लेकिन केंद्र सरकार इसके विरोध में है। सरकार ने महिलाओं के लिए मेट्रो में फ्री यात्रा की भी घोषणा कर रखी है। किराया बढ़ाए जाने की आशंका व संभावनाएं, पिंक लाइन की रिंग मेट्रो सर्विस, सबसे पहले कौन सा कॉरिडोर बनेगा और क्यूआर कोड से हर स्टेशन से यात्रा की सुविधा और दिल्ली सरकार के डबल डेकर कॉरिडोर पर डीएमआरसी चीफ एमडी मंगू सिंह ने भास्कर से विस्तृत बातचीत की। पेश है संपादित अंश...

 

सवाल: फेज-4 में देरी हो गई है। टेंडर किए गए हैं, काम की शुरुआत कब और कौन से कॉरिडोर से होगी?
उत्तर:
काम दो पार्ट में होगा, जो राज्य व केंद्र सरकार के पैसे से एलिवेटेड हिस्सा बनना है, उसका टेंडर चल रहा है। दूसरा जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एजेंसी (जाइका) से मिलने वाले लोन से होता है, ये अंडरग्राउंड हिस्सा है। इस हिस्से का भी टेंडर डॉक्यूमेंट तैयार हैं लेकिन जाइका से एग्रीमेंट के बाद उन्हें डॉक्यूमेंट भेजेंगे और फिर काम शुरू होगा। पिंक लाइन और जनकपुरी में मुकुंदपुर का टेंडर शुरू हुआ है। ऐरोसिटी कॉरिडोर में एलिवेटेड पैकेज है जिस पर काम करेंगे। जनकपुरी से मुकुंदपुर कॉरिडोर पर सबसे पहले काम शुरू होगा। पूरे रिंग में मेट्रो दोनों दिशाओं  में चलती रहे ये संभव है। ट्रैफिक कहीं ज्यादा या कहीं कम रहने पर रिवर्सल ट्रेन का प्रावधान दो डिपो के साथ रखा है।

 

सवाल: फेज-3 के कुछ स्टेशन में पहले से फेज-4 के लिए प्रावधान बनाए थे। क्या अब फेज-4 में भी फेज-5 के लिए कुछ प्रावधान छोड़ेंगे?
जवाब:
फेज-5 की अभी तक ना कोई बात, ना कुछ तय है। कुछ बचता भी नहीं है। फेज-5 में अगर कुछ आएगा भी तो गैप भरने या एडिशनल एरिया को कनेक्ट करने के लिए आएगा। जबकि फेज-4 की प्लानिंग पहले से थी इसलिए हैदरपुर बादली, मुकुंदपुर और मौजपुर स्टेशन में प्रावधान किए गए थे।

 

सवाल: मेट्रो फेज-4 में मौजपुर से मजलिस पार्क सेक्शन पूरा होने पर मेट्रो की पिंक लाइन का रिंग बन जाएगा। क्या ये रिंग रेल और बस की रिंग रोड सेवा की तरह गोल-गोल घूमेगी?
जवाब:
जरूरी नहीं कि सभी ट्रेन पूरी रिंग पर चलाएं। लाइन चालू करने पर कई बार ट्रैफिक पैटर्न का पता चलता है। यात्री इंटरचेंज नहीं करने के लिए लंबे रूट का इस्तेमाल कर लेता है। ऐसे में ट्रेन बस की मुद्रिका सर्विस की तरह बीच में टर्मिनेट करके चला सकते हैं।

 

सवाल: फेज-4 में दिल्ली सरकार ने 55 किमी के 3 कॉरिडोर में डबल डेकर ट्रैक बनाने की संभावना तलाशने को कहा था, कितना बनेगा?
जवाब:
पीडब्ल्यूडी के साथ हमने विस्तार से बातचीत की। जहां उनका प्लान था और संभव हुआ, वहां जोड़ लिया। इसमें किमी कितना हुआ, इसे नहीं सोचा। अब रिठाला-नरेला लाइन एलिवेटेड बचता है तो उसमें मेट्रो लाइट सड़क स्तर पर ही होगा और कुछ हिस्सा एनएचएआई के साथ है।

 

सवाल: : किराया बढ़ने पर जब राइडरशिप घटी तो इसका फार्मूला बदल दिया, ऐसा क्यों? 
जवाब:
फार्मूला इसलिए बदला ताकि सही तस्वीर सामने आए। लोग बस, ऑटो-टैक्सी से तुलना करते हैं तो कहते हैं कि दिल्ली मेट्रो 12-15% लोग यूज करते हैं। जबकि ऑटो और बस में 3-5 किमी यूज करने पर एक ट्रिप गिनती होती है। मेट्रो में 20 किमी पर भी एक ट्रिप जबकि 25 किमी में 80% यात्री मेट्रो से की गई। तुलना ठीक हो इसलिए लाइन बदलने पर यूटीलाइजेशन के तौर पर यात्री गिनने शुरू किए। नहीं तो कई लाइन के किसी स्टेशन से व्यक्ति नहीं निकला तो वो लाइन बेकार बता सकते हैं। अभी भी जर्नी लेंथ 11 किमी है जो पहले 17-18 किमी थी। डीटीसी की 5-6 किमी जर्नी लेंथ है। हालांकि डीपीआर में यात्री पुराने सिस्टम से तुलना करते हैं।

 

सवाल: डीएमआरसी बोर्ड में दिल्ली सरकार की तरफ से प्राइवेट नामित सदस्य किए जाने का विवाद चल रहा है तो क्या बिना राज्य सरकार प्रतिनिधि के फैसले लिए जा रहे हैं?
जवाब:
बोर्ड वाली कंपनी तो कंपनी लॉ और बोर्ड के नियमों से चलती है। फैसले उसी हिसाब से लिए जाते हैं। ये सोचकर नहीं लिए जाते कि किसके सदस्य हैं और किसके नहीं? सदस्य बनाए जाने की बात हमारी परिधि से बाहर का मामला है, हमारी भूमिका नहीं। सिर्फ एक बोर्ड मीटिंग हुई जिसमें कानूनी राय लेने के लिए भेजने का फैसला हुआ।

 

सवाल: मई और अक्टूबर, 2017 में किराया जिस समिति की सिफारिश पर बढ़ाया था, उसने कहा था कि डीएमआरसी हर साल किराया बढ़ा सकती है। इसे लेकर क्या प्लान है?

जवाब: देखिए फाइनेशियल हेल्थ देखने की यह रेगुलर एक्सरसाइज है कि किराया जरूरत पूरी कर रहा है या नहीं? कमेटी आगे की भी जरूरत देखकर किराया तय करती है। जनवरी, 2019 में रिव्यू करने पर 109 मेगावाट सोलर पॉवर यूज करने से बिजली से खर्च घटा और किराया बढ़ाने की मांग नहीं करनी पड़ी। अब जनवरी, 2020 में फिर एक्सरसाइज करेंगे। तब देखेंगे कि किराया निर्धारण समिति की सिफारिश की जरूरत है या नहीं।

 

सवाल: क्यूआर कोड से किराया भुगतान और अन्य कार्ड की सुविधा देंगे?
जवाब:
हम ऐसे सिस्टम पर काम कर रहे हैं। सभी स्टेशन व सिस्टम में बदलाव की एक्सरसाइज चल रही है। वो सिर्फ ऊबर के लिए नहीं। सबके लिए होना है। टोंकन फ्री इसलिए नहीं कर सकते क्योंकि उसमें एक बार जो सुरक्षा राशि लेनी पड़ेगी, वो मुद्दा बन जाएगा। अभी कार्ड में पैसा मशीन से डाल सकते हैं लेकिन वापस नहीं ले सकते।

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