चुनावी पाठशाला / C से कैट नहीं सीएए, F से फाइट नहीं फ्री, S से शाहीन बाग... ये है राजनीति की नई वर्णमाला

फाइल फोटो। फाइल फोटो।
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  • प्रचार का आज अंतिम दिन, दो दिन बाद उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में बंद हो जाएगी
  • इससे पहले वोटों के हिसाब से जुमलों की ज्योग्राफी तक सबकुछ सीखिए चुनाव के अंदाज में 

दैनिक भास्कर

Feb 06, 2020, 07:42 AM IST

नई दिल्ली | चुनावी प्रचार का आज अंतिम दिन है। ठीक दो दिन बाद उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में बंद हो जाएगी। तीनों दलों के नेता चुनावी पाठशाला में वोटरों को अपने-अपने पक्ष में करने के लिए जनसभाओं-नुक्कड़ सभाओं, डोर-टु-डोर कैंपेन और रैलियों के रूप में आज लास्ट क्लास लगाएंगे। इन क्लासेस में जिन शब्दों की सबसे ज्यदा भरमार रहती है, उनमें सीएए, जुमलेबाजी, फ्री योजनाएं और शाहीनबाग का सबसे ज्यादा जिक्र होता है। भास्कर ने एबीसीडी... को चुनावी अंदाज में समेटा। आप भी जानिए राजनीति की नई A B C D...

A  अंतर्कलह : आप हो या कांग्रेस और भाजपा- तीनों ही पार्टियों में टिकट को लेकर अंतर्कलह हुई और कई नेताओं ने टिकट कटने पर नाराजगी जताई।

B बगावत : इसने तीनाें पार्टियों को परेशान किया। टिकट न मिलने से नाराज कई नेताओं ने पार्टी छोड़ दी या फिर निर्दलीय ही चुनावी मैदान में उतरे।

C  सीएए :  इसने तीनाें पार्टियों को परेशान किया। टिकट न मिलने से नाराज कई नेताओं ने पार्टी छोड़ दी या फिर निर्दलीय ही चुनावी मैदान में उतरे।

D  दलबदल : चुनाव प्रचार के अंत तक नेताओं का दलबदल जारी है। आप, कांग्रेस और भाजपा- तीनों दलों के नेताओं ने अपनी-अपनी पार्टियां छोड़ी।

E  इमोशनल टच : चाहे वोट मांगना हो या रूठों को मनाना हो सबमें नेता और पार्टी इमोशनल टच दे रहे है, राष्ट्रवाद को भी इमोशनल जोड़ दिया गया।

F  फ्री-फ्री-फ्री : आप सरकार ने िबजली-पानी मुफ्त जैसी कई योजनाएं शुरू की थीं। उसकी काट के लिए भाजपा और कांग्रेस ने भी ऐसी घोषणाएं की।

G  गठबंधन : भाजपा-अकाली गठबंधन टूट गया। वहीं, भाजपा ने जेडीयू सीटें शेयर की। कांग्रेस ने चुनाव में राजद की लालटेन पर भरोसा जताया।

H  हल्ला-हंगामा : जामिया-जेएनयू में हो रहे आंदोलनों में छात्र बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। जेएनयू में छात्रों की पिटाई के बाद देशभर में हंगामा हुआ।

J  जुमलेबाजी : चुनाव में आतंकवादी, संयोग नहीं प्रयोग, शाहीनबाग, पाकिस्तान, टुकड़े-टुकड़े गैग जैस जुमले खूब सुनाई दे रहे हैं। एक-दूसरे पर खूब आरोप लगाए जा रहे हैं।

I  इंतकाम लेंगे : कई नेता दल बदलने के बाद अपनी-अपनी पार्टी के खिलाफ इंतकाम लेने के मूड में दिखे। उन्होंने तीखे शब्दों में अपनी पार्टी और शीर्ष नेताओं की निंदा की।

K  किंगमेकर : कुछ पार्टियाें का वृचस्व बड़े स्तर पर तो नहीं है, लेकिन दिल्ली के कुछ इलाकों में उनका प्रभाव है। ऐसे दल राष्ट्रीय पार्टियों को किंगमेकर का एहसास करा रहे हैं।

L  लगन लगी : तमाम उम्मीदवार वोटरों को लुभाने के लिए एक पांव पर खड़े हाे गए हैं। कोई मंदिर जा रहा है तो कोई अन्य धार्मिक स्थल।

M  मोदी है तो : भाजपा दिल्ली चुनाव पीएम मोदी के नाम पर लड़ रही है। आप ने सीएम का चेहरा न होने का मुद्दा भी उठाया और बहस की चुनौती दी।

N  नोट फाॅर वोट : चुनाव आयोग अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर नजर रखे हुए है। अब तक भारी मात्रा में हथियारों के साथ बड़ा कैश भी पकड़ा गया है।

O  ऑपरेशन ललचाओ : तीनों दलों ने विरोधी पार्टियों के बड़े नेताओं को ललचाने का कोई मौका नहीं छोड़ा। किसी को टिकट दिया तो किसी से बड़े वादे किए।

P  प्याज...बेआवाज : चुनाव से कुछ दिन पहले प्याज के दाम आसमान छू रहे थे। अब भी कुछ खास कम नहीं हुए। लेकिन चुनाव में यह मुद्दा गायब हो गया।

Q  कतार : नेताओं की कतार वोट के लिए अब वोटरों के घरों पर लग रही है। तीनों ही पार्टियों डोर-टु-डोर कैंपेन भी जम कर चला रही हैं।

R  राहुल-प्रियंका : चुनाव प्रचार खत्म होने के अंतिम दौर में राहुल और प्रियंका गांधी मैदान में उतरे। उन्होंने पीएम मोदी पर निशाना साधने के साथ ही केजरीवाल पर वार किए।

S  शाहीन बाग : शाहीनबाग में हो रहा प्रोटेस्ट चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा है। इसे सबसे ज्यादा भाजपा ने धार दी।

T  टेंशन में नेता : चुनाव 8 फरवरी को है मतदाताओं का रुख अभी साफ नहीं है। इसी बात को लेकर नेता टेंशन में हैं कि मतदाता किस ओर जाएगा।

U उलटे बयान : चुनाव में करीब-करीब ही रोज नेता उलटे-सीधे बयान दे रहे हैं। इन्हें लेकर चुनाव आयोग उन पर कार्रवाई भी कर रहा है।

V  वोट : सारा खेल इसी का है। भाषणों से लेकर विज्ञापनों में वोट हासिल करने के लिए जतन हो रहे हैं। भाजपा ने पूरी टीम ही मैदान में उतार दी।

W  वेट एंड वॉच : वोट करने से नाराज असंतुष्टों की फौज हर पार्टी में है। और सभी वेट एंड वॉच की मुद्रा में है, मौका मिलते ही इनकी राजनीति चमक जाएगी।

X  एक्स मिनिस्टर : यह तमगा कोई मंत्री नहीं चाहता इसलिए चुनाव में मेहनत कर रहे हैं। अपनी-अपनी सीटों पर प्रचार में भी जुटे हुए हैं।

Y  ये जो पब्लिक है : नेताओं की धींगामुश्ती पब्लिक देख रही है। नारों को परख रही है, किंतु शांत है। बाजार भी अभी खामोश हैं।

Z  जनादेश : ...और अंत में जनादेश जिसे मिला सत्ता उसी की, खंडित हुआ तो फिर नए रिश्ते बनेेंगे-बिगड़ेंगे। सियासी ड्रामा भी खूब चलेगा।

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