दिल्ली / लापरवाही से गाड़ी चलाने पर आईपीसी के तहत भी दर्ज हो सकता है केस



Case can also be filed under IPC for driving carelessly
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Case can also be filed under IPC for driving carelessly

Dainik Bhaskar

Oct 08, 2019, 12:47 AM IST

 नई दिल्ली. तेज रफ्तार अाैर लापरवाही से गाड़ी चलाने जैसा अपराध करने वालाें पर माेटर वाहन कानून के साथ ही भारतीय दंड संहिता यानी अाईपीसी के तहत भी केस दर्ज हाे सकता है। गुवाहाटी हाई काेर्ट का एक अादेश रद्द करते हुए सुप्रीम काेर्ट ने यह व्यवस्था दी है। सुप्रीम काेर्ट ने कहा कि वाहनाें की संख्या में तेजी से बढ़ाेतरी के साथ ही देश में सड़काें पर माैत अाैर लोगों के घायल हाेने की समस्या भी बढ़ रही है। गुवाहाटी हाई काेर्ट ने 22 दिसंबर, 2008 के आदेश में कहा था कि किसी व्यक्ति के खिलाफ अगर मोटर वाहन कानून के तहत तेज रफ्तार, लापरवाही से गाड़ी चलाने और एेसे ही अन्य अपराधों का केस दर्ज हुअा है तो उसके खिलाफ आईपीसी के तहत केस नहीं चला सकते। 


सुप्रीम काेर्ट में जस्टिस इंदु मल्होत्रा और संजीव खन्ना की बेंच ने हाल में जारी अादेश में कहा, ‘इस काेर्ट ने बार-बार कहा है कि मोटर वाहन के मामले में मोटर वाहन कानून अपने-आप में पूरी संहिता है। हालांकि, मोटर वाहन दुर्घटनाओं से जुड़े अपराध के लिए किसी के खिलाफ आईपीसी के तहत केस चलाने पर कहीं काेई रोक नहीं है।’ काेर्ट ने कहा कि दोनों कानूनों के तहत अपराध के घटक अलग हैं। अपराधी के खिलाफ दोनों के तहत मुकदमा चलाकर एक-दूसरे से स्वतंत्र होकर सजा दी जा सकती है। काेर्ट ने कहा, ‘विशेष कानून के सामान्य कानून पर प्रभावी होने का सिद्धांत आईपीसी और मोटर वाहन कानून के तहत सड़क दुर्घटना के अपराधाें पर लागू नहीं होता।’

 

बेंच ने कहा, ‘हमारी राय में आईपीसी और मोटर वाहन कानून के प्रावधानों में कोई विरोधाभास नहीं।’ उल्लेखनीय है कि हाई काेर्ट ने असम, नगालैंड, मेघालय, मणिपुर, त्रिपुरा, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश को अपने अधीनस्थ अधिकारियों को निर्देश जारी करने को कहा था कि वह मोटर वाहन दुर्घटनाओं से जुड़े अपराधों के लिए मोटर वाहन कानून के तहत मुकदमा चलाएं, न कि आईपीसी के तहत।

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