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दावा- फोर्स की कमी से हिंसा बढ़ती रही; 3 घंटे बाद पुलिस कमिश्नर बोले- हमारे पास पर्याप्त बल

एक वर्ष पहले
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जाफराबाद में हिंसा के दौरान शाहरुख ने पिस्तौल से कई फायर किए। - Dainik Bhaskar
जाफराबाद में हिंसा के दौरान शाहरुख ने पिस्तौल से कई फायर किए।
  • उत्तर-पूर्वी दिल्ली में मंगलवार को लगातार तीसरे दिन हिंसा हुई, इसमें हेड कॉन्स्टेबल समेत 9 लोगों की मौत
  • पुलिस ने गृह मंत्रालय से कहा- 35 में से 20 पैरामिलिट्री कंपनियां ट्रम्प की सुरक्षा में थीं
  • बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली हिंसा मामले पर दायर अपील पर सुनवाई होगी

नई दिल्ली.  सीएए के विरोध में दिल्ली हिंसा में मौतों का आंकड़ा मंगलवार को 10 हो गया। दिल्ली पुलिस और गृह मंत्रालय के आला अफसरों की मीटिंग हुई। बाद में न्यूज एजेंसी से बातचीत में दिल्ली के पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक ने कहा- कुछ समाचार एजेंसियों ने खबर चलाई थी कि दिल्ली पुलिस ने कहा है कि उसे गृह मंत्रालय से पर्याप्त बल नहीं मिला। यह जानकारी गलत है। होम मिनिस्ट्री लगातार हमारा सहयोग कर रही है। हमारे पास पर्याप्त बल है। उपद्रवियों को बख्शा नहीं जाएगा।
दरअसल, मंगलवार दोपहर न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से बताया था कि दिल्ली पुलिस ने होम मिनिस्ट्री से कहा है कि हिंसा रोकने के लिए उसके पास पर्याप्त पुलिस बल नहीं था। जैसे ही इस पर सवाल उठे तो पुलिस कमिश्नर खुद सफाई देने आए।  इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली हिंसा मामले में सुनवाई की मंजूरी दे दी है।

बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट बुधवार को दिल्ली हिंसा में एफआईआर दर्ज करने से संबंधित एक अपील पर सुनवाई करेगा। यही अपील पूर्व सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्लाह और कुछ अन्य लोगों ने दायर की है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अपील की गई है कि वो पुलिस को हिंसा के दोषियों पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दे। शाहीन बाग और अन्य प्रदर्शन स्थलों पर महिला प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा का भी अपील में जिक्र है। जस्टिस एसके. कौल और जस्टिस केएम. जोसेफ अपील पर सुनवाई करेंगे। याचिका में भाजपा नेता पर कपिल मिश्रा पर हिंसा भड़काने का आरोप भी लगाया गया है। दूसरी तरफ, भाजपा के पूर्व विधायक नंद किशोर गर्ग ने भी एक अपील दायर की है। इसमें शाहीन बाग से प्रदर्शनकारियों को हटाने और कालिंदी कुंज क्षेत्र में प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की अपील की गई है।  

सुनियोजित साजिश
दिल्ली पुलिस ने सोमवार को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा को सुनियोजित साजिश बताया है। पुलिस के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भारत दौरे पर हैं। उनके दिल्ली पहुंचने से कुछ घंटे पहले ही राजधानी में हिंसा भड़की। विश्व पटल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत की छवि खराब करने के इरादे से हिंसा की स्क्रिप्ट लिखी गई। इसका माहौल गुरुवार रात से ही बनाना शुरू कर दिया गया था। दिल्ली पुलिस के पीआरओ रंधावा ने मंगलवार शाम को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा- हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में धारा 144 लागू की गई है। हम लोगों से अपील करते हैं कि अफवाहों पर ध्यान न दें। पूर्वी दिल्ली में ड्रोन्स से निगरानी की जा रही है। हमें पता लगा है कि कुछ लोग छतों से पत्थरबाजी कर रहे थे। सीसीटीवी फुटेज और फोटोग्राफ चेक किए जा रहे हैं। हमारे पास पुख्ता सबूत हैं। उस आधार पर कार्रवाई की जाएगी। 

पुलिस को अंदेशा था
अधिकारियों के मुताबिक, शाहीन बाग में सुप्रीम कोर्ट के वार्ताकार लोगों से बात कर रहे थे। वहां शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन की इमेज बनाए रखने के लिए दूसरी जगहों पर हिंसक प्रदर्शन की पटकथा लिखी गई। स्पेशल ब्रांच सूत्रों की ओर से दावा किया गया है कि ट्रम्प की भारत यात्रा को लेकर पहले से ही अंदेशा था कि माहौल को जान-बूझकर खराब किया जा सकता है। पुलिस सूत्रों का कहना है इस हिंसक घटना के पीछे बाहरी शक्तियां शामिल हो सकती हैं। इन मंसूबों को पूरा करने के लिए कम उम्र के युवाओं को मोहरा बनाया गया।

पूर्व पुलिस अफसर बोले- पहले ही एक्शन ले लेते, तो यह दिन नहीं देखना पड़ता
दिल्ली में हिंसा की घटना पुलिस की बड़ी नाकामी है। पुलिस ने वक्त रहते कार्रवाई नहीं की, जिसका खामियाजा निर्दोष पुलिसकर्मी को उठाना पड़ा। दिल्ली पुलिस से रिटायर्ड अधिकारी ने माना कि शुरू से ही पुलिस का रवैया ढुलमुल वाला रहा। एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी ने कहा शाहीनबाग में जिस दिन लोगों ने सड़क को ब्लॉक किया था, तभी उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए थी। पुलिस ने तभी एक्शन लिया होता तो यह दिन नहीं देखना पड़ता।

4,000 उपद्रवियों की वीडियो और तस्वीरों से की जाएगी पहचान: पुलिस
पुलिस की टीम उपद्रवियों की पहचान के लिए 30 वायरल वीडियो और फोटो को खंगाल रही। इनसे चार हजार से ज्यादा उपद्रवियों के बारे में अहम जानकारी मिलेगी। दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने इन वीडियो और तस्वीरों को कब्जे में ले लिया है। पुलिस इनकी पहचान के लिए मुखबिर तंत्र की भी मदद ले रही है। जिनके बारे में स्टीक जानकारी मिल जाने पर पुलिस उन्हें मामले में गिरफ्तार करेगी। सीएए के विरोध और समर्थन में भड़काई गई हिंसा में 100 से ज्यादा नामजद हैं। जिनमें कई क्षेत्रीय स्तर के नेता भी बताए जा रहे हैं। नेताओं के नाम भी बताए जा रहे हैं। पुलिस को शक है जो नकाबपोश बवाल करते नजर आ रहे हैं, वे इस हिंसक घटनाओं के पीछे के साजिशकर्ताओं के बड़े मोहरे हो सकते हैं।

सोमवार को जाफराबाद-मौजपुर में क्या हुआ?
करावल नगर रोड स्थित शेरपुर चौक पर सोमवार सुबह से ही बड़ी संख्या में भीड़ जुट गई। एक तरफ सीएए के विरोधी, तो दूसरी तरफ समर्थक डटे हुए थे। बड़ी संख्या में पुलिस भी तैनात थी। डीसीपी नॉर्थ ईस्ट वेदप्रकाश सूर्या ने कहा था कि दोनों पक्षों से बात कर रहे हैं। उन्हें समझाया जा रहा है। हालांकि, लोग माने नहीं और आमने-सामने आ गए। इससे भी भयंकर हालात मौजपुर में देखने को मिले। लगभग 50 मीटर की दूरी पर दोनों गुटों के लोग नारेबाजी करते रहे। न केवल उपद्रवियों ने पुलिस के सामने तलवारें लहराईं बल्कि पथराव भी कर दिया। यह सिलसिला चलता रहा और पुलिस उपद्रवियों को काबू कर पाने में विफल साबित हुई। मौजपुर में घरों से लोग पत्थरबाजी कर रहे थे। दूसरी ओर से भी पथराव हुआ तो कई घरों के शीशे टूट गए। कई दुकानों में तोड़फोड़ भी हुई। यही स्थिति बाबरपुर में भी रही, गोकुलपुरी टायर बाजार में आगजनी हुई। पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी छोड़े। बहुत से उपद्रवी ऐसे थे जो पहचान छिपाने के इरादे से मुंह को रूमाल से कवर किए हुए थे। 

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