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कोरोना वायरस: दवा इंडस्ट्री विकसित करने पर सरकार की 2 हजार करोड़ रु. खर्च की योजना

एक वर्ष पहले
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भारतीय दवा उद्योग के सामने पैदा हुए संकट से स्थाई तौर पर निपटने के लिए भारत सरकार ने पहल शुरू कर दी । - Dainik Bhaskar
भारतीय दवा उद्योग के सामने पैदा हुए संकट से स्थाई तौर पर निपटने के लिए भारत सरकार ने पहल शुरू कर दी ।
  • रसायन व उर्वरक मंत्रालय तैयार कर रहा कैबिनेट नोट, इस माह बैठक में पेश होगा
  • चीन से कच्चे माल का आयात प्रभावित होने से स्थाई समाधान की पहल

नई दिल्ली ( पवन कुमार) . कोरोना वायरस से भारतीय दवा उद्योग के सामने पैदा हुए संकट से स्थाई तौर पर निपटने के लिए भारत सरकार ने पहल शुरू कर दी है। कच्चे माल के लिए चीन पर से निर्भरता खत्म करने और देश में ड्रग इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने दो हजार करोड़ रु से ज्यादा का प्रावधान करने की योजना तैयार की है। रसायन और उर्वरक मंत्रालय के फार्मा विभाग की ओर से कैबिनेट नोट तैयार किया जा रहा है,जो इसी माह कैबिनेट में पेश किया जाएगा। भारत में एपीआई तैयार करने पर चीन की तुलना में जो कीमतों में अंतर होगा उसे कुछ हद तक सरकार पूरा कर सकती है। संभव है कैबिनेट नोट में यह शर्त रखी जाए कि उन्हीं कंपनियों को इसका लाभ मिलेगा जो अपनी एपीआई का इस्तेमाल भारत के मरीजों के लिए ही करंे। दवाओं के कच्चे माल को लेकर भारत अगले पांच से सात वर्षों में चीन से अपनी निर्भरता खत्म करना चाहता है। 

दवाओं का कच्चा माल देश में बनाने के लिए कंपनियों को प्रमोट किया जाएगा
दवा बनाने के लिए रॉ मेटेरियल एपीआई (एक्टिव फार्मास्यूटिकल इनग्रेडिएंट्स) भारत में तैयार किया जा सके, इसके लिए इंडस्ट्री लगाने के लिए प्रमोट किया जाएगा। इंडस्ट्री लगाने वाली कंपनियों को केन्द्र सरकार की ओर से कुछ आर्थिक रियायत दी जाएगी ताकि दवा इंडस्ट्री को बढ़ावा मिल सके। दरअसल चीन में तैयार होने वाली एपीआई की कीमत कम है, लिहाजा उससे तैयार दवा भी सस्ती होती है। इसी वजह से सरकार चाहती है कि देश में ही एपीआई तैयार करने का पूरा ढ़ांचा खड़ा किया जाए, जिसके दूरगामी परिणाम हो।
 

चीन से 50 से 80% एपीआई का आयात, सबसे ज्यादा 378 तरह के मॉलिक्यूल्स भी
भारत में चीन सहित विश्व के अलग-अलग देशों से दवा बनाने के लिए करीब 700 तरह की मॉलिक्यूल्स आयात होते हैं। सबसे ज्यादा करीब 378 तरह के मॉलिक्यूल्स चीन से ही आयात होते हैं। 58 तरह के मॉलिक्यूल्स ऐसे हैं जिसके लिए 50 से 100 फीसदी चीन पर ही निर्भरता है। इसमें एंटीबॉयोटिक्स, एंटीडायबिटिक, विटामिन, एनालजेसिक, स्टेरॉयड, एंटी-टीबी, एंटी-मलेरिया, हृदय संबंधी बीमारी की दवा, एंटी-पार्किंसन, डायरिया प्रमुख है। देश में दवा बनाने के लिए रॉ मेटेरियल का स्टॉक एक माह का है।

2019 में 201 देशों को जेनेरिक दवाएं निर्यात
साल 2019 में भारत ने 201 देशों को जेनेरिक दवाएं निर्यात की। भारत इन दवाओं को बनाने के लिए कच्चा माल (एपीआई) चीन से आयात करता है। ट्रेड प्रोमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2018-19 में भारत से दवाओं का अनुमानित निर्यात 1914 करोड़ डॉलर का था। 

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