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भास्कर खास / दो रामलीला : एक यू-ट्यूब और फेसबुक पर लाइव, दूसरी में माइक तक नहीं, दर्शकों में क्रेज कायम



दिल्ली में 40 साल पुरानी यह रामलीला 10 अक्टूबर से शुरू हो गई है। दिल्ली में 40 साल पुरानी यह रामलीला 10 अक्टूबर से शुरू हो गई है।
वाराणसी में आज भी पेट्रोमैक्स की रोशनी में होता है रामलीला का मंचन। वाराणसी में आज भी पेट्रोमैक्स की रोशनी में होता है रामलीला का मंचन।
जहां देशभर में रामलीला के दर्शक कम हो रहे, वहीं वाराणसी में दर्शकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जहां देशभर में रामलीला के दर्शक कम हो रहे, वहीं वाराणसी में दर्शकों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
विजयादशमी, धनुष यज्ञ, राज गद्दी, लंका दहन के दिन यह संख्या 20 हजार तक पहुंच जाती है। विजयादशमी, धनुष यज्ञ, राज गद्दी, लंका दहन के दिन यह संख्या 20 हजार तक पहुंच जाती है।
1834 के आसपास काशी नरेश महाराजा उदितनारायण सिंह उरई गांव में लीला देखने जाते थे। 1834 के आसपास काशी नरेश महाराजा उदितनारायण सिंह उरई गांव में लीला देखने जाते थे।
रामनगर रामलीला देखने के लिए लोग अपनी चटाई खुद लेकर आते हैं। रामनगर रामलीला देखने के लिए लोग अपनी चटाई खुद लेकर आते हैं।
लवकुश रामलीला दिल्ली के चांदनी चौक इलाके में हो रही है। लवकुश रामलीला दिल्ली के चांदनी चौक इलाके में हो रही है।
लवकुश रामलीला को देश की सबसे हाईटेक रामलीला कहा जा सकता है, इसमें 2000 से ज्यादा ड्रेसेज का इस्तेमाल हो रहा है। लवकुश रामलीला को देश की सबसे हाईटेक रामलीला कहा जा सकता है, इसमें 2000 से ज्यादा ड्रेसेज का इस्तेमाल हो रहा है।
लव-कुश रामलीला में केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने इस साल राजा जनक का किरदार निभाया। लव-कुश रामलीला में केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने इस साल राजा जनक का किरदार निभाया।
हर्षवर्धन के अलावा भाजपा नेता सांसद मनोज तिवारी भी रामलीला में किरदार निभाएंगे। हर्षवर्धन के अलावा भाजपा नेता सांसद मनोज तिवारी भी रामलीला में किरदार निभाएंगे।
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दिल्ली में 40 साल पुरानी यह रामलीला 10 अक्टूबर से शुरू हो गई है।दिल्ली में 40 साल पुरानी यह रामलीला 10 अक्टूबर से शुरू हो गई है।
वाराणसी में आज भी पेट्रोमैक्स की रोशनी में होता है रामलीला का मंचन।वाराणसी में आज भी पेट्रोमैक्स की रोशनी में होता है रामलीला का मंचन।
जहां देशभर में रामलीला के दर्शक कम हो रहे, वहीं वाराणसी में दर्शकों की संख्या लगातार बढ़ रही है।जहां देशभर में रामलीला के दर्शक कम हो रहे, वहीं वाराणसी में दर्शकों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
विजयादशमी, धनुष यज्ञ, राज गद्दी, लंका दहन के दिन यह संख्या 20 हजार तक पहुंच जाती है।विजयादशमी, धनुष यज्ञ, राज गद्दी, लंका दहन के दिन यह संख्या 20 हजार तक पहुंच जाती है।
1834 के आसपास काशी नरेश महाराजा उदितनारायण सिंह उरई गांव में लीला देखने जाते थे।1834 के आसपास काशी नरेश महाराजा उदितनारायण सिंह उरई गांव में लीला देखने जाते थे।
रामनगर रामलीला देखने के लिए लोग अपनी चटाई खुद लेकर आते हैं।रामनगर रामलीला देखने के लिए लोग अपनी चटाई खुद लेकर आते हैं।
लवकुश रामलीला दिल्ली के चांदनी चौक इलाके में हो रही है।लवकुश रामलीला दिल्ली के चांदनी चौक इलाके में हो रही है।
लवकुश रामलीला को देश की सबसे हाईटेक रामलीला कहा जा सकता है, इसमें 2000 से ज्यादा ड्रेसेज का इस्तेमाल हो रहा है।लवकुश रामलीला को देश की सबसे हाईटेक रामलीला कहा जा सकता है, इसमें 2000 से ज्यादा ड्रेसेज का इस्तेमाल हो रहा है।
लव-कुश रामलीला में केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने इस साल राजा जनक का किरदार निभाया।लव-कुश रामलीला में केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने इस साल राजा जनक का किरदार निभाया।
हर्षवर्धन के अलावा भाजपा नेता सांसद मनोज तिवारी भी रामलीला में किरदार निभाएंगे।हर्षवर्धन के अलावा भाजपा नेता सांसद मनोज तिवारी भी रामलीला में किरदार निभाएंगे।

  • दिल्ली की रामलीला सबसे बड़ी, रामनगर में सबसे ज्यादा दिन चलने वाली
  • राजा ने नाराजगी की वजह से शुरू की थी बनारस की रामनगर रामलीला

Dainik Bhaskar

Oct 14, 2018, 10:23 AM IST

नई दिल्ली. आज बात देश की दो बड़ी और चर्चित रामलीलाओं की। पहली दिल्ली की लवकुश रामलीला। इसे देश की सबसे हाईटेक रामलीला कह सकते हैं। यहां तकनीक का जमकर इस्तेमाल हो रहा है। दूसरी बनारस की रामनगर रामलीला है। यहां आज भी पेट्रोमैक्स की रोशनी में मंचन होता है। दर्शकों को कुर्सी भी नहीं दी जाती है। लोग अपने घरों से टाट और चटाई लेकर आते हैं। खास बात यह है कि भले ही आम धारणा हो कि रामलीला के दर्शक कम हो रहे  हैं, लेकिन इन दोनों ही जगह दर्शक हर साल बढ़ रहे हैं। 

 

दिल्ली : दावा- इस रामलीला के दुनियाभर में 25 करोड़ दर्शक

तरुण सिसौदिया, नई दिल्ली. लवकुश रामलीला दिल्ली ही नहीं पूरे भारत और विदेशों में भी प्रसिद्ध है। बीते पांच सालों से रामलीला में अनेकों ऐसे दृश्यों का मंचन हो रहा है, जिसकी कल्पना शायद ही कोई कर सके। इसे दुनियाभर में टीवी पर लाइव दिखाया जा रहा है। लीला का मंचन सोशल मीडिया-फेसबुक, यू-ट्यूब आदि पर भी लाइव हो रहा है। आयोजकों के मुताबिक दुनियाभर में रामलीला के करीब 25 करोड़ दर्शक हैं, जो विभिन्न माध्यमों से जुड़े हैं। लवकुश रामलीला की शुरुआत 1988 में हुई थी और तभी से इसका मंचन हो रहा है।

 

बॉलीवुड से आए कलाकार

पहले इसके मंचन के लिए मंडली मुरादाबाद से आती थी। बीते पांच साल से लीला का मंचन मुंबई और दिल्ली के कलाकारों द्वारा किया जा रहा है। इस साल पुनीत इस्सर रावण की भूमिका निभा रहे हैं। इस साल करीब 2000 कलाकारों की टीम रामलीला में अभिनय कर रही है। इस्सर समेत इस बार करीब 30 बॉलीवुड कलाकार भी इसमें अभिनय कर रहे हैं। रामलीला में राकेश बेदी- सुग्रीव, हम लोग सीरियल में लल्लू का रोल करने वाले राजेश- पुरी नारद और मनोज तिवारी- अंगद की भूमिका में दिख रहे हैं। इससे पहले सुरेंद्र पाल, गजेंद्र चौहान और रवि किशन भी इसमें अभिनय कर चुके हैं। बॉलीवुड कलाकारों के साथ ही राजनेता और खिलाड़ी भी इस लीला में अभिनय करते रहे हैं। इस साल केंद्रीय मंत्री डॉ हर्षवर्धन भी इसमें नजर आ रहे हैं।

 

क्रेन की मदद से उड़ते हैं हनुमान

वहीं खिलाड़ियों की बात की जाए तो पहलवान कालीरमन, बिंदू दारासिंह इसमें अभिनय कर रहे हैं। समय के साथ-साथ रामलीला में नई-नई तकनीक का इस्तेमाल भी किया जा रहा है। कभी हनुमान जी को हवा में उड़ाने के लिए रस्सी का सहारा लिया जाता था, अब क्रेन की सहायता से हनुमान का किरदार निभाने वाले को 100 फीट की ऊंचाई पर लटका दिया जाता है। यह बिल्कुल रियल दिखाई देता है। वहीं रामलीला के दृश्य असली लगें इसके लिए एलईडी का इस्तेमाल कर उन्हें बिल्कुल नेचुरल बनाया जा रहा है। पहले पर्दे की सहायता से समुद्र, पंचवटी आदि दिखाया जाता था, अब इन दृश्यों को एलईडी के जरिए दिखाया जा रहा है। इस रामलीला के किरदारों की ड्रेसेज अन्य रामलीलाओं से बिल्कुल अलग हैं।

 

रामायण-महाभारत धारावाहिक के ड्रेस डिजानर ने तैयार कीं पोशाक

इस बार यहां 2000 से ज्यादा ड्रेसेज का इस्तेमाल हो रहा है। लीला के मुख्य किरदार राम, लक्ष्मण, सीता, हनुमान, रावण आदि की ड्रेस रामायण-महाभारत सीरियल के कलाकारों की ड्रेस डिजायन करने वाले विष्णु पटेल ने तैयार की हैं। बाकी डांस ग्रुप और अन्य ग्रुपों की ड्रेस दिल्ली और अन्य स्थानों पर तैयार हुई हैं। समय के साथ-साथ रामलीला रोचक तो हुई इसके साथ ही दर्शकों की तादाद भी बढ़ी। लीला का संचालन भोजपुरी फिल्मों के डायरेक्टर रहे अभय के निर्देशन में हो रहा है।

 

तीन साल में तैयार हुई रामलीला की नई स्क्रिप्ट

इसके अलावा एक्शन, डांस के भी अलग-अलग डायरेक्टर हैं। बाबू भाई त्यागी एक्शन डायरेक्टर हैं। पूरे डायरेक्शन की टीम करीब 50 लोगों की है। रामलीला में लोगों की रुचि बनी रहे इसलिए इस साल नई स्क्रिप्ट के आधार पर मंचन हो रहा है। यह बीते तीन साल से तैयार की जा रही थी, इस साल पूरी हुई है।
 

रामनगर : सबसे प्रसिद्ध रामलीला लेकिन पेट्रोमैक्स की रोशनी में होता है मंचन
अमित मुखर्जी, बनारस. बनारस के रामनगर की रामलीला पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है, लेकिन खास बात यह है कि यहां इस तकनीक के दौर में भी कृत्रिम लाइट या माइक तक का इस्तेमाल नहीं होता है। यह रामलीला 35 से 40 पेट्रोमैक्स और लैम्प की रोशनी में होती है। 1834 के आसपास काशी नरेश महाराजा उदितनारायण सिंह उरई गांव में लीला देखने जाते थे। लेकिन एक दिन वे देर से पहुंचे। तब तक लीला शुरू कर दी गई। नाराज काशी नरेश ने उसी साल रामनगर में रामलीला शुरू कर दी। यहां पंडित रामनारायण पांडेय ने 1970 से 2010 तक लगातार 40 वर्षों तक हनुमान का किरदार निभाया।

 

दर्शक घर से लाते हैं टाट पट्टी : रोचक यह है कि यहां दर्शकों को कुर्सी तक नहीं दी जाती है। लोग अपने घरों से टाट, चटाई लेकर आते हैं। यहां रोज 5 से 10 हजार लोग रामलीला देखने आते हैं। विजयादशमी, धनुष यज्ञ, राज गद्दी, लंका दहन के दिन यह संख्या 20 हजार तक पहुंच जाती है। महाराज बनारस रोज हाथी पर सवार होकर लीला स्थल तक जाते हैं। लेकिन वो रावण वध नहीं देखते क्योंकि परम्परा के अनुसार एक राजा दूसरे राजा का वध नहीं देखता। यह रामलीला 31 दिनों तक चलती है। यह देश की एक मात्र ऐसी लीला है जो करीब पांच किमी के क्षेत्र में होती है। अलग-अलग दृश्यों का मंचन अलग-अलग स्थानों पर होता है।

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