मेट्रो फेज-4 / दिल्ली सरकार ने फंड होने के बावजूद दिए लोन लेने के निर्देश



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  • आप सरकार के खजाने में 5500 करोड़, लेकिन खर्च करने को तैयार नहीं
  • परिवहन मंत्री का निर्देश, एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के दरवाजे पर अधिकारी

Dainik Bhaskar

Oct 17, 2018, 04:53 AM IST

अखिलेश कुमार, नई दिल्ली. दिल्ली मेट्रो फेज-4 में अभी तक प्रोजेक्ट के कॉरिडोर को जहां मंजूरी नहीं मिली है, वहीं फंड क्राइसिस की एक नई आफत आ गई है। वैसे तो सरकार के खजाने में 5500 करोड़ रुपए से ज्यादा सरप्लस हैं लेकिन परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत के निर्देश पर अधिकारी मेट्रो प्रोजेक्ट खर्च के लिए एनसीआर प्लानिंग बोर्ड (एनसीआरपीबी) के दरवाजे पर दस्तक देने को मजबूर हैं।

 

अगर नियमों के अनुसार देखा जाए तो दिल्ली के बजट प्रावधान के हिसाब से सरप्लस बजट पर वित्त विभाग या एनसीआरपीबी सरकार को तर्क दे सकता है कि पहले जो खजाने में पैसा है, उसका इस्तेमाल करें। सूत्र बताते हैं कि परिवहन आयुक्त समेत कुछ अधिकारी एक दौर की चर्चा एनसीआरपीबी अधिकारियों से कर चुके हैं। वित्त विभाग से भी चर्चा जारी है। फंड की नई आफत के चलते जून, 2019 में मेट्रो फेज-3 का काम खत्म होने तक मेट्रो फेज-4 प्रोजेक्ट शुरू होने की संभावना करीब-करीब खत्म हो गई है। इससे पहले दिल्ली सरकार दिल्ली-गाजियाबाद रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) कॉरिडोर में फंड क्राइसिस की चिट्‌ठी केंद्रीय शहरी आवास एवं विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी को लिख चुकी हैं।

 

53 हजार करोड़ का बजट, सिर्फ 2500 करोड़ में दिक्कत 
दिल्ली का बजट प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारी बताते हैं कि पूरे फेज-4 में दिल्ली सरकार को 14 हजार करोड़ रुपये ही 5-6 साल में देने हैं जो सालाना करीब 2300 करोड़ पड़ेगा। फिर इतने सुविधा वाले मेट्रो प्रोजेक्ट को दिल्ली सरकार की तरफ से लटकाना या बजट नहीं देना समझ से बाहर है। दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव व प्रधान वित्त सचिव रह चुके डीएम स्पोलिया का कहना है कि लोन मांगने जाने से पहले वित्त विभाग और बाद में एनसीआर प्लानिंग बोर्ड कह सकता है कि बजट में पैसा है तो पहले उसे खर्च करें। अगर खजाने में पैसे हैं तो उसका इस्तेमाल होना चाहिए।

 

2019 में काम शुरू होता तो मार्च, 2024 तक पूरा हो जाता
डीएमआरसी ने अक्टूबर, 2014 में पहला डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट में 103 किमी के 6 कॉरिडोर का दिया था। 3 बार कैबिनेट मीटिंग हुई, लेकिन मंजूरी अटकती देखकर जनवरी, 2018 में एक वैकल्पिक प्राथमिकता वाले पहले 61 किमी के 3 कॉरिडोर की मंजूरी मांगी। मंजूरी मिलने पर अगर अप्रैल, 2019 में काम शुरू हो जाता है तो मार्च, 2024 तक काम खत्म होगा। तीन कॉरिडोर के निर्माण पर 28, 972 करोड़ रु. अनुमानित खर्च है जबकि 6 कॉरिडोर पर 47,375 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।

 

3 कॉरिडोर पर 2021 में 5.68 लाख यात्रियों को फायदा 
3 कॉरिडोर में 17 भूमिगत समेत 46 स्टेशन बनेंगे। जनकपुरी से आरके आश्रम पर 2021 में 2.75 लाख, मुकुंदपुर से मौजपुर में 96 हजार व एरोसिटी से तुगलकाबाद कॉरिडोर पर दैनिक 1.97 लाख यात्रियों को फायदा होगा। सभी कॉरिडोर की बात करें तो 2021 तक रोज 10 लाख यात्रियों को फायदा होगा इंटरचेंज को शामिल कर लें तो ये संख्या 18 लाख होगी।

 

तीन कॉरिडोर पर बनाए जाएंगे 15 इंटरचेंज स्टेशन 
डीएमआरसी ने जिन तीन कॉरिडोर की जल्द मंजूरी मांगी है उस पर 15 इंटरचेंज स्टेशन पुराने कॉरिडोर को भी स्पीड देंगे। सबसे महत्वपूर्ण सेक्शन मौजपुर से मुकुंदपुर है जिसके शुरू होने से रिंग मेट्रो बनेगा और पूरी दिल्ली आपस में जुड़ जाएगी। मुकुंदपुर से मौजपुर कॉरिडोर पर मुकुंदपुर व मौजपुर स्टेशन इंटरचेंज होगा।

 

सीएम से जब मेट्रो फेज-4 पर बात होती है कहते हैं विचार कर रहे हैं। केंद्र व राज्य की 50-50% भागीदारी के वित्तीय पैटर्न पर सहमति या असहमति नहीं दी। भास्कर ने सवाल किया मोबिलिटी के 5 प्रोजेक्ट की तरह क्या फेज-4 का पैसा केंद्र खर्च करेगा, इस पर वह बोले-अभी स्ट्रेटजी पर काम कर रहे हैं, मीडिया को नहीं बताएंगे। - केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी

 

हरदीप पुरी ने कहा था कि मेट्रो फेज-4 की फंडिंग खुद कर लेंगे। हमें लगा कि वो फंडिंग कर रहे होंगे। -डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया

 

ये क्या कर रहे हो, अरविंद केजरीवाल जी! दिल्ली को 20 साल पीछे ले गए आप। मेट्रो फेज-4 को अब भी मंजूरी दे दो, नहीं तो एक बार इंफ्रास्ट्रक्चर मूव हो गया तो फिर से मोबलाइज करने में वर्षाें लग जाएंगे। - प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी

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