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अन्य सेक्टर की स्थिति में सुधार आने पर देश में प्रॉपर्टी की डिमांड छह महीने में बढ़ सकती है

एक वर्ष पहले
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जीएसटी की दर महज पांच फीसदी, हाेम लोन की दरें 9 फीसदी से भी कम, अफोर्डेबल हाउसिंग पर ब्याज में सब्सिडी समेत कई कदम उठाने के बाद भी रियल एस्टेट सेक्टर मंदी से उबर नहीं पा रहा है। हालात यह हैं कि देश के तीस बड़े शहरों में 12.8 लाख मकानों को खरीदार नहीं मिल पा रहे हैं। लिहाजा, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अब रियल एस्टेट सेक्टर में कर्ज की मांग पूरी करने के लिए हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (एचएफसी) 20 हजार करोड़ रुपए देने का ऐलान कर दिया है। फिर भी हाउसिंग सेक्टर के जानकारों का कहना है कि समस्या की जड़ दूसरे क्षेत्रों में आ रही मंदी है।

नौकरी जाने के डर की वजह से घर खरीदने का सेंटीमेंट गड़बड़ा गया है। रॉयटर्स ने भी अपने सर्वे में कहा है कि मंदी के चलते इस साल घर की कीमतों में महज एक फीसदी और अगले साल दो फीसदी की बढ़ोतरी संभव है। हाल ही में आई ऐनारॉक प्रॉपर्टीज की रिपोर्ट के अनुसार भारत के रियल एस्टेट सेक्टर की हालत एकदम खराब है। देशभर के सात प्रमुख शहरों में 4,51,750 करोड़ रुपए की करीब 5.6 लाख आवासीय इकाइयों का निर्माण समय से पीछे चल रहा है। मार्च 2019 तक भारत के टॉप 30 शहरों में 12.8 लाख अनबिके मकान थे। मार्च 2018 की तुलना में यह संख्या सात फीसदी ज्यादा है।

बिग फैक्टर: एनबीएफसी संकट ने भी रियल एस्टेट की सेहत बिगाड़ी, नकदी की कमी से बिक्री पर असर
रियल एस्टेट सेक्टर का हाल : कई हाउसिंग प्रोजेक्ट अधूरे और खरीदार बाजार से गायब
कई प्रोजेक्ट अधूरे पड़े हैं और बाजार में खरीदार नहीं हैं।

एनबीएफसी संकट से डेवलपर्स को कर्ज नहीं मिल पा रहा है।

नोटबंदी, जीएसटी जैसे कदम और रेरा जैसी नियामक संस्था आ जाने से बिल्डर संभल नहीं पाए।

डेवलपर्स ने अंधाधुंध प्रोजेक्ट दर प्रोजेक्ट लॉन्च किए। जो उनके लिए मुसीबत का कारण बन गए हैं।

बेनामी संपत्ति कानून और ब्लैकमनी पर सख्ती की वजह से बाजार से कई निवेशक गायब हो गए।

69% कंपनियों को बिक्री में और गिरावट आने के आसार

नाइट फ्रैंक की उद्योग संगठन फिक्की और रियल एस्टेट सेक्टर के संगठन नारेडको के साथ जारी नई रिपोर्ट हालात के और बिगड़ने की तरफ इशारा कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक मांग में कमी, न बिके मकानों की बढ़ती संख्या और एनबीएफसी की समस्या का समाधान निकलता नहीं दिख रहा है। इस क्षेत्र में परियोजनाओं की बढ़ती लागत को फिलहाल सबसे बड़ी समस्या बताया गया है।

28% की दर से घटी बीते पांच सालों में देश मेें घरों की बिक्री

एनारॉक की रिपोर्ट की मानें तो घरों की बिक्री भी पिछले 5 वर्षों में 28 फीसदी की दर से घटी है। वर्ष 2014 में जहां 3.43 लाख घरों की बिक्री हुई, वहीं पिछले साल 2.48 लाख घर बिके। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि देश के सात प्रमुख शहरों में पिछले पांच साल के दौरान घरों के दाम में 7% का इजाफा हुआ है, जबकि मांग 28% घटी है। इसी तरह घरों की आपूर्ति में इस दौरान 64% की गिरावट आई है।

संकट से निपटने के उपाय: रियल्टी को मिले इंडस्ट्री का दर्जा, अधूरे प्रोजेक्ट में मदद मिले
किफायती घरों को लेकर आईटी, जीएसटी अौर सरकार की परिभाषा में अंतर की वजह से विरोधाभास है।

रियल एस्टेट सेक्टर को इंडस्ट्री का दर्जा दिया जाए।

अधूरे प्रोजेक्ट को पूरा करने में सरकार मदद करे।

अफोर्डेबल हाउस को बढ़ावा देने के लिए होम लोन की ब्याज में भी अतिरिक्त छूट व घर खरीदारों को अतिरिक्त टैक्स छूट दी जाए।

एनबीएफसी के संकट को हल किया जाए ताकि सेक्टर में नकदी की कमी दुरुस्त की जा सके।

मुद्रा स्फीति की वजह से कीमतों में वृद्धि नकारात्मक ही रहेगी
रॉयटर्स सर्वे के मुताबिक भले ही घर की कीमतों में मामूली इजाफा होगा लेकिन यह नकारात्मक ही होगा। यदि इस साल कीमत में एक प्रतिशत की भी वृद्धि होती है तो महंगाई दर में 3.15 प्रतिशत इजाफे की वजह से कुल कीमत माइनस में चली जाएगी। सभी विश्लेषकों ने सर्वसम्मति से कहा कि नकदी की कमी का प्रभाव कम से कम छह महीने तक रहेगा। यही नहीं, यह या तो गंभीर या बहुत गंभीर होगा।

नौकरी जाने के डर से खराब हुआ मार्केट सेंटीमेंट, हालात सुधरने में लगेगा वक्त
जॉब सिक्युरिटी के बिना मार्केट सेंटीमेंट में सुधार आना मुश्किल
जॉब सिक्युरिटी ही नहीं रहेगी तो मकान कौन खरीदेगा? सीधी सी बात है दूसरे सेक्टर से मंदी दूर होगी तो सेंटीमेंट भी अच्छा हो जाएगा। सरकार को अधूरे पड़े प्रोजेक्ट्स में मदद करनी चाहिए। -सतीश मागर, नेशनल प्रेसिडेंट, क्रेडाई

घरों की डिलीवरी में देरी की वजह से होमबॉयर्स का विश्वास उठ गया है। हालांकि सरकार के नए उपायों से मदद मिलेगी। प्रॉपर्टी की कीमतें कम होने से घर खरीदनें का यह अच्छा समय है।

रेनु सूद कर्नाड, एमडी, एचडीएफसी लिमिटेड

भारत में रोजगार सृजन कम हो रहा है। और एक घर खरीदने के लिए बड़े निवेश की जरूरत होती है। इसके लिए एक स्थिर व अच्छी नौकरी होगी तो खरीदार उत्साहित होगा। स्थिति अंततः सुधरेगी, लेकिन रातोंरात नहीं।

अनुज पुरी, चेयरमैन, एनारॉक प्रॉपर्टी कंसल्टेंट

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