अन्य सेक्टर की स्थिति में सुधार आने पर देश में प्रॉपर्टी की डिमांड छह महीने में बढ़ सकती है

Delhi-ncr News - जीएसटी की दर महज पांच फीसदी, हाेम लोन की दरें 9 फीसदी से भी कम, अफोर्डेबल हाउसिंग पर ब्याज में सब्सिडी समेत कई कदम...

Aug 29, 2019, 02:35 PM IST
जीएसटी की दर महज पांच फीसदी, हाेम लोन की दरें 9 फीसदी से भी कम, अफोर्डेबल हाउसिंग पर ब्याज में सब्सिडी समेत कई कदम उठाने के बाद भी रियल एस्टेट सेक्टर मंदी से उबर नहीं पा रहा है। हालात यह हैं कि देश के तीस बड़े शहरों में 12.8 लाख मकानों को खरीदार नहीं मिल पा रहे हैं। लिहाजा, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अब रियल एस्टेट सेक्टर में कर्ज की मांग पूरी करने के लिए हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (एचएफसी) 20 हजार करोड़ रुपए देने का ऐलान कर दिया है। फिर भी हाउसिंग सेक्टर के जानकारों का कहना है कि समस्या की जड़ दूसरे क्षेत्रों में आ रही मंदी है।

नौकरी जाने के डर की वजह से घर खरीदने का सेंटीमेंट गड़बड़ा गया है। रॉयटर्स ने भी अपने सर्वे में कहा है कि मंदी के चलते इस साल घर की कीमतों में महज एक फीसदी और अगले साल दो फीसदी की बढ़ोतरी संभव है। हाल ही में आई ऐनारॉक प्रॉपर्टीज की रिपोर्ट के अनुसार भारत के रियल एस्टेट सेक्टर की हालत एकदम खराब है। देशभर के सात प्रमुख शहरों में 4,51,750 करोड़ रुपए की करीब 5.6 लाख आवासीय इकाइयों का निर्माण समय से पीछे चल रहा है। मार्च 2019 तक भारत के टॉप 30 शहरों में 12.8 लाख अनबिके मकान थे। मार्च 2018 की तुलना में यह संख्या सात फीसदी ज्यादा है।

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69% कंपनियों को बिक्री में और गिरावट आने के आसार

नाइट फ्रैंक की उद्योग संगठन फिक्की और रियल एस्टेट सेक्टर के संगठन नारेडको के साथ जारी नई रिपोर्ट हालात के और बिगड़ने की तरफ इशारा कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक मांग में कमी, न बिके मकानों की बढ़ती संख्या और एनबीएफसी की समस्या का समाधान निकलता नहीं दिख रहा है। इस क्षेत्र में परियोजनाओं की बढ़ती लागत को फिलहाल सबसे बड़ी समस्या बताया गया है।

28% की दर से घटी बीते पांच सालों में देश मेें घरों की बिक्री

एनारॉक की रिपोर्ट की मानें तो घरों की बिक्री भी पिछले 5 वर्षों में 28 फीसदी की दर से घटी है। वर्ष 2014 में जहां 3.43 लाख घरों की बिक्री हुई, वहीं पिछले साल 2.48 लाख घर बिके। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि देश के सात प्रमुख शहरों में पिछले पांच साल के दौरान घरों के दाम में 7% का इजाफा हुआ है, जबकि मांग 28% घटी है। इसी तरह घरों की आपूर्ति में इस दौरान 64% की गिरावट आई है।

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मुद्रा स्फीति की वजह से कीमतों में वृद्धि नकारात्मक ही रहेगी

रॉयटर्स सर्वे के मुताबिक भले ही घर की कीमतों में मामूली इजाफा होगा लेकिन यह नकारात्मक ही होगा। यदि इस साल कीमत में एक प्रतिशत की भी वृद्धि होती है तो महंगाई दर में 3.15 प्रतिशत इजाफे की वजह से कुल कीमत माइनस में चली जाएगी। सभी विश्लेषकों ने सर्वसम्मति से कहा कि नकदी की कमी का प्रभाव कम से कम छह महीने तक रहेगा। यही नहीं, यह या तो गंभीर या बहुत गंभीर होगा।

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रेनु सूद कर्नाड, एमडी, एचडीएफसी लिमिटेड


अनुज पुरी, चेयरमैन, एनारॉक प्रॉपर्टी कंसल्टेंट

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