दिल्ली / पिछड़े जिलाें में अच्छा काम कर रहे अधिकारियाें का तबादला नहीं करें



Do not transfer officials working in backward districts
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Do not transfer officials working in backward districts

  • नीति आयोग ने सभी राज्याें के मुख्य सचिवाें काे चिट्ठी लिखी, प्रधानमंत्री माेदी आकांक्षी जिले के कलेक्टर और कमिश्नर से वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग करेंगे 

Dainik Bhaskar

Jun 21, 2019, 11:54 PM IST

नई दिल्ली . देश के अाकांक्षी (पिछड़े) जिलाें में तेजी से विकास कर अन्य जिलाें की बराबरी पर खड़ा करने के लिए केंद्र सरकार खास याेजना पर काम कर रही है। इसके लिए नीति अायाेग ने सभी राज्याें के मुख्य सचिवाें काे एक चिट्ठी लिखी है। इसमें कहा गया है कि अाकांक्षी जिलाें में अच्छा काम करने वाले अधिकारियाें का तबादला नहीं किया जाए। स्थानीय स्तर पर अपने-अपने क्षेत्र में बेहतर काम करने वाले चार से पांच लोगों की एक अलग टीम बनाई जाए। इसमें कहा गया है कि आकांक्षी जिले के पांच अधिकारियों की पहचान की जाए, जो बेहतर काम कर रहे हैं अाैर उनका तबादला तब तक उस जिले से बाहर न किया जाए, जब तक वह जिले सामान्य जिले की श्रेणी में न आ जाएं। 


नीति अायाेग की चिट्ठी में यह भी कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी अाकांक्षी जिलाें के कलेक्टराें अाैर कमिश्नराें से वीडियाे काॅन्फ्रेंसिंग के जरिए बात करेंगे। सभी अधिकारियों को इसके लिए तैयार रहने के लिए कहा गया है। इसमें कहा गया है कि वे अपने जिलाें में किए गए कार्याें अाैर विकास याेजनाअाें का खाका तैयार रखें, जिसे प्रधानमंत्री काे बताया जा सके। इसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और पोषण से जुड़े विभागों में खाली पदों को जल्द भरे जाने काे भी कहा गया है। स्वास्थ्य और शिक्षा पर ज्यादा फंड खर्च करने के लिए भी कहा गया है।

 

15 जुलाई से भ्रष्टाचारियों के खिलाफ अब होगी सख्त कार्रवाई: केंद्र सरकार पीएमओ ने कहा }लापरवाह और भ्रष्ट कर्मियों को बख्शा नहीं जाएगा

 

केंद्र सरकार ने बैंकों, सार्वजनिक उपक्रमों एवं अपने सभी विभागों से अपने कर्मियों के सेवा रिकॉर्ड की समीक्षा करने का निर्देश जारी करते हुए कहा कि अब भ्रष्टाचारियों के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके तहत भ्रष्ट और नाकारा कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। लापरवाह और भ्रष्ट कर्मियों को बख्शा नहीं जाएगा। इसकी शुरुआत 15 जुलाई 2019 से होगी। कार्मिक मंत्रालय व पीएमओ ने केंद्र सरकार के सभी विभागों से प्रत्येक श्रेणी के कर्मचारियों के कामकाज की समीक्षा पूरे नियम कायदे से करने के साथ यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ जबरन सेवानिवृत्ति की कार्रवाई में मनमानी न हो। निर्देश में कहा गया है कि सभी मंत्रालयों व विभागों से आग्रह है कि वे सार्वजनिक उपक्रमों व बैंकों और स्वायत्त संस्थानों समेत अपने प्रशासनिक नियंत्रण में आने वाले विभागों के कर्मचारियों के कामकाज की कायदे कानून और सही भावना के अनुसार समीक्षा करें। 

 

कार्मिक मंत्रालय ने कहा कि मंत्रालयों या विभागों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि एक सरकारी कर्मचारी को जनहित में समय से पहले सेवानिवृत्त करने जैसी निर्धारित प्रक्रिया का कड़ाई से पालन हो और ऐसा निर्णय मनमाना नहीं हो। 
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने हाल ही में जनहित में सीमा शुल्क और केंद्रीय उत्पाद विभाग के 15 अधिकारियों को समय से पहले सेवानिवृत्त किया। इस महीने की शुरूआत में भारतीय राजस्व सेवा (आयकर) के 12 अधिकारियों को भी सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था।

 

हर महीने की 15 तारीख को रिपोर्ट : सभी सरकारी संगठनों को अब हर महीने की 15 तारीख को निर्धारित प्रारूप में रिपोर्ट देनी होगी। मूल नियम 56(जे), (आई) और केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम 1972 के नियम 48 के तहत जारी कार्मिक मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अंतर्गत बैंकों, सार्वजनिक उपक्रमों और केंद्र सरकार के विभागों में काम करने वाले कर्मचारियों का सेवा रिकार्ड की समीक्षा की जाएगी।

 

वेंकैया नायडू का सुझाव, राज्यसभा में पांच साल से ज्यादा समय से लंबित विधेयक काे खत्म माना जाए : राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने उच्च सदन में पांच साल से अधिक समय से लंबित विधेयक को खत्म मान लेने का सुझाव दिया है। उन्होंने उस नियम पर भी विचार करने का सुझाव दिया जिसके तहत लोकसभा में पारित होने के बाद राज्यसभा में विधेयक लंबित होने के दौरान लोकसभा के भंग होने पर वह विधेयक अपने अाप खत्म मान लिया जाता है। इसके विपरीत यदि कोई विधेयक राज्यसभा में पेश हो जाए तो वह सदन की संपत्ति रहता है, भले ही लोकसभा भंग हो जाए। नायडू ने सदन की बैठक शुरू होने पर कहा कि पिछले माह 16वीं लोकसभा के भंग होने के बाद राज्यसभा में लंबित 22 विधेयक बेअसर हो गए। प्रभावी तौर पर लोकसभा को इन 22 विधेयकों पर विचार कर उन्हें पारित करना होगा। इसमें कम से कम दो सत्र लग जाएंगे। इसका यह अर्थ हुआ कि इन 22 विधेयकों को पारित करने में लोकसभा के प्रयास व्यर्थ गए। उन्होंने कहा कि जो विधेयक बेअसर हो गए उनमें भूमि अधिग्रहण विधेयक, तीन तलाक संबंधी विधेयक, आधार संशोधन विधेयक और मोटर यान विधेयक शामिल है।


 नायडू ने कहा कि 33 विधेयक ऐसे हैं जो पिछले कई वर्षों से राज्यसभा में लंबित हैं। इसमें से तीन विधेयक 20 साल से अधिक समय से लंबित हैं। पिछले कई सालों से लंबित विधेयकों में सबसे अधिक लंबे समय से विचाराधीन विधेयक भारतीय चिकित्सा परिषद (संशोधन) विधेयक 1987 है। यह 32 सालों से विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि व्यर्थ में समय नष्ट होने के कारण सदन की उत्पादकता कम हुई है। जरूरी विधेयक लंबित रह जाते हैं तथा कुछ विधेयक लोकसभा के भंग होने के साथ ही समाप्त हो जाते हैं।

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