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पहली मंजिल का फ्लैट बाहर से बंद था, दम घुटकर मर गया 5 लोगों का परिवार

एक वर्ष पहले
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 इंदिरा एंक्लेव इलाके में बिल्डिंग के अंदर आग कैसे लगी, यह अभी पूरी तरह से साफ नहीं हो पाया है। - Dainik Bhaskar
 इंदिरा एंक्लेव इलाके में बिल्डिंग के अंदर आग कैसे लगी, यह अभी पूरी तरह से साफ नहीं हो पाया है।
  • उदयकांत के रिश्तेदार ने बताया कि मकान मालिक से था रुपयों का विवाद
  • मृतक उदयकांत के जीजा के आरोपों के बाद पुलिस ने साजिश का पहलू जांच में शामिल किया

धर्मेंद्र डागर | नई दिल्ली . इंदिरा एंक्लेव इलाके में बिल्डिंग के अंदर आग कैसे लगी, यह अभी पूरी तरह से साफ नहीं हो पाया है। पुलिस शुरू में इस घटना को महज एक हादसा मानकर चल रही थी। लेकिन किराएदार मृतक परिवार के रिश्तेदारों ने घटना के पीछे साजिश की आशंका जाहिर की है। दरअसल मकान मालिक और किराएदार के बीच रुपयों को लेकर चल रहा विवाद चल रहा था। मृतक उदयकांत चौधरी के जीजा गगन ने बताया कि करीब 12.10 बजे उन्होंने करीब तीन साल पहले अमरनाथ झा का मकान ठेके पर लिया था। इसके लिए पहले ही उसे तीन लाख रुपए दिए गए थे। पिछले कुछ समय से अमरनाथ झा मकान खाली करने के लिए दबाव डाल रहा था।


लेकिन रुपए वापिस नहीं कर रहा था। इस पर उदयकांत का कहना था कि वह रुपए देने पर मकान खाली कर देेंगे। इसको लेकर करीब 2 से 3 बार झगड़ा हो चुका था। रिश्तेदार ने बताया कि मकान एक दिसंबर को खाली करना था, लेकिन मकानमालिक ने रुपए वापिस नहीं किए। रुपयों के लालच और झगड़े का बदला लेने के लिए एक सािजश के तहत यह आग लगाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि मकान में आग लगाकर मकान मालिक के परिवार ने पहली मंजिल की बाहर से कुंडी लगा दी। इससे पूरा परिवार मर गया। जबकि मकान की दूसरी मंजिल से मकान मालिकन और उसकी बेटी बच गई। बाहर से दरवाजा नहीं खुलने पर उदयकांत ने मदद के लिए अपने तीन रिश्तेदारों को कॉल की थी। पहले भांजे गोपाल झा को कॉल किया था, इसके बाद ससुराल वालों को, फिर बडे मामा को। पुलिस ने इस पहलू को भी अपनी जांच में शामिल कर लिया है।


हालांकि अधिकारिक तौर पर पुलिस इस बात पर कुछ भी बोलने से बचती रही। उनका कहना है कि मामले की जांच के बाद ही आग की कारणों का स्प्ष्ट कारण पता चल सकेगा। पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह मामला शार्ट सर्किट के कारण आग का लग रहा है। दककल विभाग के डायरेक्टर अतुल गर्ग का कहना है कि जब दमकल कर्मी गए तो उन्होंने दरवाजा तोड़ा था, उस समय यह नहीं देखा कि उसमें ताला लगा हुआ था या नहीं। हालांकि अमरनाथ झा ने अपने ऊपर और अपनी पत्नी पूजा के उपर लगे सभी आरोपों को गलत बताया है।

घटना से कुछ घंटे पहले शादी से लौटा था किराएदार उदयकांत का परिवार, सोए लेकिन सुबह तक टूट गई जीवन डोर
कुछ घंटे पहले तक एक परिवार शादी समारोह में शरीक होकर पार्टी एंजाॅय कर रहा था। उन्हें अंदेशा नहीं था एक साथ मनाई जा रही खुशियाें का यह मौका फिर कभी नहीं आएगा। यह दर्द भरी कहानी किराड़ी की आग लगने वाली इमारत की पहली मंजिल मेें रहने वाले उस परिवार की, जिसके सभी 5 सदस्य मौत के आगोश मंे चले गए। मृतक उदयकांत चौधरी के भांजे गोपाल ने बताया कि उनके मामा ने उन्हें फोन किया तो वह तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे, लेकिन आग इतनी भयंकर थी कि वह अंदर नहीं घुस पाए। दरवाजा खोलने का भी प्रयास किया तो वह भी नहीं खुल पाया। वह किसी तरीके से पड़ोस की छत से ऊपर पहुंचे लेकिन वहां से भी वह नहीं पहुंच पए।


थोड़ी देर बाद एक सिलेंडर फटा तो सब इधर-उधर भागे। गोपाल ने बताया कि उनके मामा काफी दिनों से उससे एक प्रिंट आउट निकालने के लिए कह रहे थे। सोमवार रात को उसके मामा उसके घर आए थे उसने प्रिंटआउट निकाल कर दिया। उदय ने अपने भांजे गोपाल को बताया कि गली में ही एक शादी समारोह है, वहां पर जा रहे हैं। बस यही आखरी बार उनसे उनकी मुलाकात हुई थी। इंदिरा एंक्लेव में रहने वाले लोगों का आरोप है कि फायर विभाग की गाड़ियां घटनास्थल पर लगभग 1.40 घंटे की देरी से पहुंची।

अमरनाथ झा ने अपने और पत्नी पर लगे आरापों से किया इंकार
अमरनाथ झा ने आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि रविवार शाम 5 बजे वह हरिद्वार के लिए निकले थे। देर रात करीब 12 बजे हरिद्वार के नजदीक उनकी का फोन आया लेकिन बात नहीं हो सकी। मैंन नेटवर्क की समस्या समझी। फिर पड़ोसियों का फोन आने लगा। उनसे आग की खबर लगी। मैं लौटा तो पता चला कि मेरे माता-पिता, मेरी भाभी उनकी मां इसके अलावा हमारे मकान के पहली मंजिल पर रहने वाले किराएदार का पूरा परिवार की मौत हो चुकी है। मेरी बेटी और भतीजी भी अस्पताल में है, पत्नी भी घायल है।

संजू की बहन ने भी अमरनाथ झा पर जताया साजिश रचने का शक
मौत का शिकार हुई संजू की बड़ी बहन ने भी अमरनाथ झा और देवरानी पूजा पर साजिश का आरोप लगाया। संजू के पति विद्यानाथ झा की मौत लगभग 1 साल पहले हुई थी। वह कैंसर रोग से पीड़ित थे। उनकी मौत के बाद से ही अमरनाथ झा और उनकी पत्नी पूजा संजू को परेशान करते थे। यह भी आरोप लगाया गया है कि यह सारा विवाद संपत्ति को लेकर था। अमरनाथ झा और पूजा इस मकान को बेचना चाहते थे, लेकिन संजू और उसके ससुर रामचंद्र झा इसके विरोध में थे। 31 दिसंबर को संजू के पति की बरसी होने वाली थी। इस वजह से ही संजू ने अपनी मां गुड्डन उर्फ बालमुखी को गांव से बुला लिया था। संजू की बहन ने यह आरोप भी लगाया कि पूरी साजिश के तहत अमरनाथ झा रविवार शाम को घर से बाहर चले गए और पीछे से उनकी पत्नी ने इस पूरी वारदात को अंजाम दिया।

रामचंद्र झा और उदयकांत के बिहार स्थित गांव में पसरा मातम

नवंबर में दिल्ली आए थे रामचंद्र झा
मधुबनी|सूचना मिलते ही खजौली के पालीमोहन गांव में मातम पसर गया। गांव के लोगों को टीवी से सूचना मिली। रामचंद्र झा के पैतृक घर की देखभाल करने वाले गांव के रंजीत पासवान ने बताया कि मालिक 30 नवंबर को दिल्ली गए थे। खेती के सीजन में साल में एक-दो बार गांव आते थे। उनके बड़े पुत्र गुड्‌डू झा की एक वर्ष पहले ही बीमारी के कारण मौत हो गई थी। वहीं पड़ोसी भोगेन्द्र झा बताते हैं कि रामचंद्र पांच भाइयों में सबसे बड़े थे। मिलनसार प्रवृति के थे। लोगों की मदद के लिए तैयार रहते थे।

परिवार में सबसे बड़े थे उदयकांत चौधरी
दरभंगा| लगमा निवासी रामप्रकाश चौधरी के दो पुत्र और दो पुत्रियों में सबसे बड़े थे उदय कांत चौधरी। छोटा भाई विजय चौधरी भी पत्नी-बच्चों के साथ दिल्ली में रहते हैं। माता-पिता का देहांत दो साल पूर्व हो गया था। ग्रामवासी शंकर झा, सुशील झा ने बताया कि जून माह में ही मृतक उदयकांत सपरिवार आठ वर्षीय पुत्र के मुंडन के लिए गांव आए थे। पूरा घर भरा पड़ा था। भगवान की लीला देखिए, सब कुछ छीन लिए। उदयकांत के संबंधी पंकज चौधरी ने फोन पर बताया कि उदयकांत ने रात 12 बजे वाट्स एप पर मैसेज भेजा था। सुबह साढ़े छह बजे मौत की सूचना मिली।

जान बचाने की मशक्कत
आग से दूसरी मंजिल पर रखे एलपीजी सिलेंडर में विस्फोट हो गया और दूसरी मंजिल की दीवार टूट गई। हादसे में जो लोग झुलसे िमले उनकी जान बचाने के लिए बचावकर्मियों ने पूरी कोशिश की।

सरकार ने दिए जांच के आदेश, मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपए
दिल्ली सरकार ने घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। 7 दिन में जांच रिपोर्ट आने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी। सोमवार सुबह घटना स्थल पर गृह मंत्री सत्येन्द्र जैन पहुंचे। उन्होंने मृतकों के परिजन को 10-10 लाख रुपए और घायलों का पूरा इलाज के साथ 1-1 लाख रुपए देने का ऐलान किया। सत्येंद्र जैन ने इमारत में गोदाम होने की बात कही। हालांकि नॉर्थ दिल्ली के मेयर अवतार सिंह ने कहा कि वहां गोदाम नहीं था। घर के मालिक के किसी जानकार को गोदाम खाली करना था इसलिए वह एक-दो दिन पहले ही अपना सामान वहां रखने के लिए लाया था।

इधर, अनाज मंडी अग्निकांड हादसे में घायल हुए एक और की मौत, संख्या पहुंची 46
अनाज मंडी हादसे में घायल हुए एक और मरीज शहजाद की मौत हो गई है। वह हादसे के बाद से ही लोकनायक अस्पताल के आईसीयू में भर्ती था। हादसे में मरने वालों की तादाद अब बढ़कर 46 हो गई है। हादसे में 43 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद तीन और लोगों की मौत हो गई है। हालांकि अस्पताल प्रशासन रविवार को हुई मौत की पुष्टि नहीं कर रहाए लेकिन प्रशासन यह जरूर कह रहा है कि दो दिन से उसकी तबियत ज्यादा खराब थी। पुलिस अधिकारी का कहना है कि रविवार को आईसीयू में भर्ती 25 वर्षीय सज्जाद की भी मौत हो गई। वह पिछले कई दिनों से आईसी में थे। सज्जाद की तबीयत दो दिन पहले तेजी से बिगड़ गई थी। घटना के बाद अस्पताल में कुल 15 लोगों को इलाज के लिए एडमिट किया गया थाए जिसमें इलाज के बाद तीन लोगों की की मौत हो गई।



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