सरकार ज्यादा ढील देने की स्थिति में नहीं: फिच

Delhi-ncr News - रिजर्व बैंक ने बैंकों को एक अक्टूबर से अपने फ्लोटिंग दर वाले कर्ज को बाहरी बेंचमार्क से अनिवार्य रूप से जोड़ने का...

Sep 11, 2019, 07:25 AM IST
रिजर्व बैंक ने बैंकों को एक अक्टूबर से अपने फ्लोटिंग दर वाले कर्ज को बाहरी बेंचमार्क से अनिवार्य रूप से जोड़ने का आदेश दिया है। यह कर्जदाताओं के लिए निगेटिव है क्योंकि यह रिस्क मैनेजमेंट में उनके लचीलेपन को सीमित करेगा। मूडीज इन्वेस्टर सर्विस ने मंगलवार को यह बात कही। पिछले सप्ताह रिजर्व बैंक ने कहा था कि बैंक नीतिगत दरों में कटौती का लाभ संतोषजनक तरीके से उपभोक्ताओं को नहीं दे रहे हैं। रिजर्व बैंक ने इस साल रेपो रेट में 1.10% की कटौती की है। वहीं बैंकों ने इसका थोड़ा लाभ ही उपभोक्ताओं को दिया है।

गिरावट जारी : निजी उपभोग औसत 4.6% से गिर कर 1.8 पर

विकास दर के कम अनुमान के साथ ही ज्यादातर सेक्टरों में गिरावट जारी है। निजी उपभोग अप्रैल जून तिमाही में औसत 4.6% से कम होकर 1.8% पर आ गया है। मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ भी मात्र 0.6% की दर से हो रही है। सरकार अर्थव्यवस्था को तेज करने के लगातार प्रयास कर रही है। ऑटो सेक्टर को सपोर्ट, कैपिटल गेन टैक्स को कम करना, एनबीएफसी को अतिरिक्त नकदी सपोर्ट, एफ पीआई से सरचार्ज हटाना जैसे कदम सरकार उठा रही है। लेकिन इन उपायों का भी असर अभी कम दिख रहा है।

मात्र 19% कंपनियां दिसंबर तिमाही में नौकरियां देने की स्थिति में, फिर भी भारत चौथा सबसे आशावान देश

एजेंसी | नई दिल्ली

अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के दौरान 19% कंपनियां नई भर्तियों को लेकर आशान्वित हैं। जबकि 52% कंपनियों का मानना है कि अगली तिमाही में उनके कर्मचारियों की संख्या यथावत बनी रहेगी। इसमें कोई बदलाव नहीं होगा। वहीं शेष 28% कंपनियों ने कर्मचारियों की संख्या में बढ़ोतरी होने की संभावना पर अनिश्चितता व्यक्त की है। यह बात एक वैश्विक सर्वे में यह बात सामने आई है। इसके मुताबिक नई भर्तियों में यह सुस्ती भारत में ही नहीं, बल्कि दूसरे कई देशों में भी रहने की संभावना है। मैनपावर ग्रुप एम्प्लॉयमेंट आउटलुक सर्वे के नतीजे मंगलवार को जारी हुए। भारत में इसके तहत 5,131 कंपनियों की राय जानी गई। बहुत कम कंपनियों द्वारा रोजगार बढ़ाने की संभावना व्यक्त किए जाने के बावजूद पूरी दुनिया में अगले तीन महीनों में नौकरियों में बढ़ोतरी को लेकर भारत चौथा सबसे आशावान देश है। लेकिन जापान सबसे ज्यादा आशावान देश साबित हुआ है। पहले नंबर पर रहे जापान की 26% कंपनियों ने अगली तिमाही में स्टाफ बढ़ाने की संभावना जताई है। इसके बाद ताइवान और अमेरिका क्रमश: दूसरे और तीसरे नंबर पर हैं।

चीन में नई भर्तियों को लेकर 4% कंपनियां आशावान

चीन की कंपनियों ने अगली तिमाही में हायरिंग को लेकर सतर्क नजरिया अपनाने की बात कही है। वहां की सिर्फ 4% कंपनियों ने नई हायरिंग की बात कही है। जो दो साल का सबसे कमजोर रुख है। वहीं, स्पेन में किसी भी कंपनी ने नई नौकरियां देने की संभावना नहीं जताई। अर्जेंटीना और स्विटजरलैंड की कंपनियों ने भी दिसंबर में कमजोर हायरिंग की संभावना व्यक्त की है।

44 में से 43 देशों ने नई भर्तियों की संभावना जताई

मैनपावर ग्रुप ने पूरी दुनिया में 44 देशों में 59,000 कंपनियों के प्रमुखों से बातचीत की। इसमें 43 देशों की कंपनियों ने दिसंबर तिमाही में नई भर्तियां करने की संभावना जताई है। पिछली तिमाही की तुलना में इस बार 44 में से सिर्फ 15 देशों की कंपनियों ने ज्यादा हायरिंग की संभावना जताई है। वहीं, 23 देशों की कंपनियों ने कम हायरिंग की संभावना जताई थी।

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