निर्भया केस / गुनहगारों काे अलग-अलग फांसी पर सुप्रीम काेर्ट का नाेटिस, ट्रायल काेर्ट में डेथ वारंट पर सुनवाई आज

फाइल फोटो फाइल फोटो
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  • फिर ट्रायल कोर्ट पहुंचे निर्भया के माता-पिता, डेथ वारंट जारी करने का अनुरोध किया
  • फांसी से बचने के लिए दोषी विनय ने खुद को बताया मानसिक रोगी

दैनिक भास्कर

Feb 12, 2020, 07:09 AM IST

नई दिल्ली . निर्भया के गुनहगाराें काे अलग-अलग फांसी देने की मांग वाली केंद्र अाैर दिल्ली सरकार की याचिका पर सुप्रीम काेर्ट ने चाराें दाेषियाें काे नाेटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि इस सुनवाई का ट्रायल कोर्ट द्वारा नया डेथ वारंट जारी करने के मामले में असर नहीं पड़ेगा। जस्टिस आर भानुमति की अध्यक्षता वाली जस्टिस अशाेक भूषण अाैर एएस बाेपन्ना की पीठ ने इस मामले की सुनवाई 14 फरवरी को तय की है।

सुप्रीम काेर्ट के नाेटिस जारी करने के बाद निर्भया के माता-पिता और दिल्ली सरकार ने पटियाला हाउस कोर्ट में अर्जी दायर कर नया डेथ वारंट जारी करने का अनुराेध किया। कोर्ट ने सभी दोषियों को नोटिस जारी किया है। इस पर बुधवार दोपहर 2 बजे से सुनवाई हाेगी।  ट्रायल काेर्ट ने चाराें दोषियों की फांसी पर अगले आदेश तक रोक लगाई है। गुनहगाराें- विनय शर्मा, मुकेश कुमार सिंह, पवन गुप्ता और अक्षय ठाकुर को 1 फरवरी की सुबह 6 बजे फांसी दी जानी थी, लेकिन 31 जनवरी काे काेर्ट ने इसे अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया था।

केंद्र ने काेर्ट से कहा- न्याय प्रणाली में जनता का विश्वास कम हो रहा है 
केंद्र की ओर से साॅलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम काेर्ट से कहा कि दोषी रणनीति के तहत केस को लंबा खींच रहे हैं। दोषियों को एक साथ फांसी देने की बजाए, उन्हें अलग-अलग फांसी पर लटकाने की अनुमति दी जाए। मेहता ने कहा कि दुष्कर्मियों का एनकाउंटर होता है, तो जनता खुशी मनाती है। यह बात सामने आ रही है कि सजा में देरी से जनता का न्याय प्रणाली से विश्वास कम हो रहा है। मेहता ने कहा कि दिल्ली हाईकाेर्ट के अादेश के बावजूद देरी करने के लिए दाेषी पवन गुप्ता ने अभी तक दया याचिका दायर नहीं की है।  इस पर जस्टिस अशोक भूषण ने कहा कि आप जो मांग कर रहे हैं, उससे तो मामला और अधिक लंबा खिंचेगा, क्योंकि इस तरह की मांग उचित है या नहीं, इस पर कानूनी रूप से विचार करने में समय लग सकता है।

फांसी से बचने के लिए दोषी विनय ने खुद को बताया मानसिक रोगी

गुनहगार विनय ने अपने बचाव के लिए एक और कानूनी पैंतरा अपनाया है। उसने दया याचिका खारिज करने के राष्ट्रपति के निर्णय को सुप्रीम काेर्ट में चुनौती दी है। वकील एपी सिंह के जरिए दायर अर्जी में विनय ने कहा है कि वह मानिसक रूप से बीमार है और कानूनन मानसिक रोगी को फांसी नहीं दी जा सकती। याचिका में विनय शर्मा ने कहा है कि तिहाड़ जेल में लगातार टार्चर किए जाने से उसे 
इमेंस साइकोलॉजिकल ट्रॉमा नाम की मानसिक बीमारी हो गई है। उसने जेल में इलाज के दस्तावेज देते हुए फांसी की सजा काे अाजीवन कारावास में बदलने की मांग की है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 1 फरवरी को विनय की याचिका खारिज कर दी थी।

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