दिल्ली / खुदाई में मिले पत्थरों पर कछुओं के चित्र थे, इनका मुस्लिम संस्कृति से काेई ताल्लुक नहीं : हिंदू पक्ष



Hearing on Supreme Court on Ram temple case
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Hearing on Supreme Court on Ram temple case

Dainik Bhaskar

Aug 21, 2019, 02:24 AM IST

नई दिल्ली . अयोध्या विवाद पर मंगलवार को आठवें दिन की सुनवाई में हिंदू पक्ष ने पुरातत्व विभाग की रिपाेर्ट अाैर विभिन्न पक्षाें की गवाहियाें के हवाले से विवादित जगह पर मंदिर का अस्तित्व साबित करने के लिए दलीलें दीं। रामलला विराजमान के वकील सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि विवादित स्थल की खुदाई में निकले पत्थरों पर मगरमच्छ अाैर कछुओं के चित्र भी बने थे। मगरमच्छ अाैर कछुअाें का मुस्लिम संस्कृति से काेई लेना-देना नहीं है। सुनवाई की कार्यवाही पढ़िए लाइव...

 

सुप्रीम काेर्ट लाइव } श्रद्धालु सदियों से अयाेध्या जाते रहे हैं: रामलला विराजमान

 

सीएस वैद्यनाथन (रामलला विराजमान के वकील): मस्जिद के नीचे एक विशाल निर्माण था। खुदाई में मिली चीजाें के मुताबिक वह हिंदू मंदिर था। इलाहाबाद हाइकोर्ट के फैसले में जस्टिस अग्रवाल ने लिखा है कि अयोध्या में भगवान राम का प्राचीन मंदिर ढहाकर मस्जिद बनाई गई थी। इसके बावजूद लोग वहां पहले की तरह पूजा अर्चना करते रहे।

जस्टिस एसए बाेबडे: इस ढांचे के बारे में दूसरे पक्ष का क्या मत है? 
 

वैद्यनाथन: पहले मुस्लिम पक्ष मंदिर के ढांचे से मना करता था। बाद में कहने लगे कि ढांचा इस्लामिक था। कोर्ट में पेश पुराने सभी तथ्य और रिकॉर्ड से साबित होता है कि यह भगवान राम का जन्म स्थान है। आज लोग फ्लाइट लेकर सुबह सबरीमाला के दर्शन काे जाते हैं अाैर शाम को लौट आते हैं। 

राम जन्मभूमि के दर्शन के लिए श्रद्धालु कई सदियों से जाते हैं। तब नदी पर कोई ब्रिज भी नहीं था। डॉ. केवी रमेश की रिपोर्ट दिखाती है कि विवादित स्थल पर एक पत्थर के स्लैब पर संस्कृत में कुछ लिखा है। मंदिर के ढांचे काे लेकर इसमे तमाम बातें लिखी थीं। यह पुरातत्व को थोड़ा देर से मिला पर दो लोग चश्मदीद हैं। इनमें पांचजन्य का एक पत्रकार भी है। इस पर लिखा है कि 12वीं सदी में अयोध्या साकेत मंडल की राजधानी था। यहां विष्णु हरी का एक विशालतम मंदिर था।
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़: क्या इस शिलालेख को भी लेकर चैलेंज किया गया है?
वैद्यनाथन: सवाल यह उठे हैं कि स्लैब विवादित ज़मीन से मिला है या नहीं। पांचजन्य के पत्रकार ने लिखा था कि 6 दिसंबर 1992 को विवादित ढांचा ढहाते वक्त यह स्लैब दक्षिणी गुंबद की पश्चिमी दीवार से गिरा था। रिपोर्टर ने इसका फाेटाे लिया था। पुलिस ने स्लैब जब्त कर लिया था। रिपोर्टर के अनुसार कई और स्लैब थी लेकिन पुलिस के आने से पहले कारसेवक उन्हें उठा ले गए थे। पत्रकार ने काेर्ट में कहा था कि स्लैब दक्षिणी गुंबद की पश्चिमी दीवार से गिरा था।

 

जस्टिस बाेबडे: क्या स्लैब हाईकोर्ट में पेश किया था?
वैैद्यनाथन: नहीं। सिर्फ इसकी तस्वीरें और इसपर लिखी जानकारी पेश की गई थी। 90 साल के गवाह रामनाथ ने कहा है कि अयोध्या में राेज त्यौहार का माहौल रहता था। हजाराें श्रद्धालु दर्शन के लिए आते और प्रति दिन राम जन्मभूमि की परिक्रमा करते।


जस्टिस अशोक भूषण: दक्षिण भारत के मंदिरों में पूजा के लिए गर्भगृह होता है लेकिन उत्तर भारत में ऐसा नहीं है।
जस्टिस बाेबडे: क्या विवादित जमीन पर नमाज पढ़ने का जिक्र किसी गवाह ने किया है?
वैद्यनाथन: एक मुस्लिम गवाह ने कहा है कि अगर मंदिर काे ढहाकर मस्जिद का निर्माण किया जाता है ताे मुस्लिम उसे मस्जिद नहीं मानते। जबरन ली जमीन पर मस्जिद नहीं बना सकते।
 

 इसके बाद सुनवाई बुधवार सुबह तक के लिए स्थगित कर दी गई

 

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