इंटरेस्टिंग फैक्ट्स / आदर्शवादी, देशभक्त, दूरदर्शी, समदर्शी, पिरामिड, प्रिज्म- ये महज शब्द नहीं, पार्टियों के नाम हैं साहब!



Idealist, patriot, visionary, parallel, pyramid, prism - these are not mere words, the names of the parties
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Idealist, patriot, visionary, parallel, pyramid, prism - these are not mere words, the names of the parties

  • 1996 में सबसे ज्यादा 50 और 1977 में सबसे कम 5 दल थे मैदान में, इस बार नामांकन के बाद साफ होगी तस्वीर
  • आपकी अपनी पार्टी, हाकिम अपना पार्टी, हमारी अपनी पार्टी, सबसे अच्छी पार्टी ने भी करा रखा है रजिस्ट्रेशन

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2019, 03:45 AM IST

नई दिल्ली. इन दिनों दिल्ली लोकसभा चुनाव में केवल भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को लेकर चर्चाएं हो रही हैं। इस बार वैसे तो 114 दल रजिस्टर्ड हैं लेकिन कितनी पार्टियां और प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतरते हैं, इसका असल पता तो 26 अप्रैल के बाद चलेगा। यह नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख है। आपको जानकर हैरानी होगी कि दिल्ली लोस चुनाव में एक बार में 50 पार्टियां (1996) दो-दो हाथ कर चुकी हैं।

 

1951 से लेकर 2014 तक हुए 16 लोकसभा चुनावों में सबसे कम 5 पार्टियां 1977 और 1984 में लड़ी थीं। 1996 की 50 पार्टियों के बाद दूसरे और तीसरे नंबर पर 2009 (46 दल) और 2014 (43 दल) के लोस चुनाव आते हैं। पार्टियों के नाम भी पिरामिड, आदर्शवादी, देशभक्त, मानव सेवा और दूरदर्शी पार्टियां आिद हैं। 

1967 के चुनाव में टूट गया था कांग्रेस का वर्चस्व

  1. अगर कुल उम्मीदवारों की बात करें तो सबसे ज्यादा 64 प्रत्याशी 1971 के चुनाव मैदान में थे। ये वो उम्मीदवार हैं जो चुनाव में किस्मत आजमा रहे थे। पर्चे तो 103 उम्मीदवारों ने भरे थे। इनमें 3 महिलाएं भी थीं। बाद में 1 पुरुष का पर्चा रद्द कर दिया गया और 38 ने नाम वापस ले लिए। सबसे पहली लोकसभा यानी 1951 में दिल्ली में 3 सीटें थीं तब 19 उम्मीदवार थे। 1957 में दिल्ली में 4 सीट हो गईं और प्रत्याशी 30। 1962 में 5 सीटों पर 46 ने किस्मत आजमाई। 1967 में यहां सीटें 7 हुईं और उम्मीदवार 50। इस चुनाव में ही कांग्रेस का वृचस्व टूट गया और आउटर दिल्ली को छोड़कर भारतीय जनसंघ ने उससे सभी सीटें हथिया लीं।

  2. चुनाव में तमाम दल ऐसे भी जो शून्य पर सिमट गए

    1991 में 36 दल मैदान में थे 10 शून्य पर सिमट गए। 1996 में 50 में से 31 दलों को शून्य वोट मिला। इस साल 523 उम्मीदवार थे। 1998 में 35 में से 25 दलों को शून्य वोट मिले। 1998 में पहली बार भाजपा ने कांग्रेस से सातों सीटें झटक लीं। 2004 में कांग्रेस ने वापसी की और 6 सीटें जीतीं। चुनाव तो 32 दलों ने लड़े लेकिन 8 को शून्य वोट मिला। 2009 में भाजपा की सारी सीटें चलीं गईं। इस साल 46 में से 9 दलों को कोई वोट नहीं मिला। 2014 के चुनाव में एक ट्रेंड बदला। इस साल 43 दल मैदान में थे। वोटर्स ने अपना वोट केवल 7 दलों को ही दिया। 

  3. बीएलडी के टिकट पर जीते थे अटल नई दिल्ली सीट से

    1977 के आम चुनाव में दिल्ली स्टेट, नेशनल कैपिटल टेरेटरी ऑफ दिल्ली हो गया था और 5 दल लड़ रहे थे। इसमें भारतीय लोकदल ने 68.1 प्रतिशत वोट के साथ कांग्रेस का सूपड़ा साफ कर दिया। इस साल अटल बिहारी बाजपेई ने भारतीय लोकदल से नई दिल्ली सीट से जीत हासिल की थी। 1980 में 9 पार्टियां लड़ीं और कांग्रेस (आई) ने 6 सीटें जीतते हुए वापसी की।

  4. कुछ ऐसे दल जिनके बारे में शायद कम जानते होंगे

    अखिल भारतीय राम राज्य परिषद, दूरदर्शी पार्टी, समदर्शी पार्टी, देशभक्त पार्टी, जवान किसान मजदूर पार्टी, आल इंडिया उर्दू मोर्चा, मानव सेवा संघ, भ्रष्टाचार विरोधी दल, पिरामिड पार्टी ऑफ इंडिया, प्रिज्म, आदर्शवादी पार्टी, खुसरो सेना पार्टी, वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल, आपकी अपनी पार्टी, हाकिम अपना पार्टी, भारत महापरिवार पार्टी, हमारी अपनी पार्टी, सबसे अच्छी पार्टी, नेशनल फिफ्टी फिफ्टी फ्रंट, राष्ट्रीय चाणक्य पार्टी, नेशनल वुमेंस पार्टी, जय जवान जय किसान पार्टी, नेशनल अपनी पार्टी, अहिंसा पार्टी, भारतीय अनारक्षित पार्टी, वोटर्स इंडिपेंडेंट पार्टी।

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