खाना शेयरिंग से बढ़ाएं स्वाद, ट्विटर अनाड़ी भी डीएमआरसी से रहें अपडेट, इंडोर प्रदूषण जाने और कबाड़ बेचने का टाइम करें सेट

2 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
  • आईआईआईटी दिल्ली के छात्रों ने बनाए एप, प्रो. पोन्नुरंगम कुमारगुरु ने बताया 83 छात्रों ने 18 प्रोजेक्ट पेश किए

नई दिल्ली . आईआईआईटी दिल्ली के छात्रों ने बिल्डिंग बेटर इंटरफेसेस(बीबीआई) के तहत समाज की दिक्कतें, जीवन आसान करने वाले एप और स्टार्टअप शुक्रवार को कैंपस में डिस्प्ले किए। उसमें एक ही कैंपस या परिसर में वर्किंग या पढ़ाई करने वाले किस तरीके से डब्बागुल नाम के एप पर जुड़कर खाना शेयरिंग से स्वाद बदल सकते हैं और ट्विटर अकाउंट नहीं होने पर भी दिल्ली मेट्रो आवश्यक सूचनाएं आ सकती हैं इसका एप बनाया है।
 
साथ में दिल्ली सहित देशभर में किसी पब्लिक प्लेस के इनडोर तापमान, प्रदूषण का स्तर एक एप से जान सकते हैं तो वहीं आपके घर का पुराना सामान यानी कबाड़ी अपने टाइम के हिसाब से पूर्व निर्धारित कीमत पर बेच सकते हैं। आईआईआईटी दिल्ली के एसोसिएट प्रो. (सीएसई) पोन्नुरंगम कुमारगुरु ने बताया कि 83 छात्रों ने 18 प्रोजेक्ट पेश किए।
 

डब्बागुल: इस एप से लोग खाना शेयर कर सकते हैं
डब्बागुल ऐसा एप है जिसमें किसी एक निर्धारित क्षेत्र या दूरी में जुड़कर लोग खाना शेयर कर सकते हैं। मकसद ये है कि कई बार लोग एक स्वाद और एक हाथ का बना खाते-खाते बोर हो जाते हैं जबकि साथी का खाना अच्छा लगता है। ऐसे में स्वाद बदलने का इच्छुक या एक जगह बैठकर खाने का इच्छुक व्यक्ति एप में रजिस्ट्रेशन के बाद खाने की फोटो शेयर करेगा। आपस में फ्रेंड रिक्वेस्ट भी होगी और बल्क में कोई सबको बुलाना चाहता है साथ बैठकर खाने को तो ऐसा भी कर सकेगा।
 

अब इंडोर पॉल्यूशन एयर क्वालिटी एप बता देगा
इंडोर पॉल्यूशन या एयर क्वालिटी महज एक 500 रुपए का यंत्र और मोबाइल एप से परख सकेंगे। पब्लिक प्लेस या किसी घर में अगर वो डिवाइज लगा हुआ है तो घर में जलने वाले तेज, फिनाइल या अन्य तरह के प्रदूषण व वहां के तापमान का पता एप पर चल जाएगा। एप बनाने वाली टीम के सदस्य अभिजीत मिश्रा ने भास्कर को बताया कि भविष्य में इसमें किस वजह से प्रदूषण है इस फीचर भी जोड़ सकते हैं। कोई एजेंसी या सरकार हेल्प करेगी तो इसे आगे बढ़ा पाएंगे और स्टार्टअप की तरह बढ़ेंगे।
 

डीएमआरसी की जानकारी, यहां एप पर तुरंत मिलेगी
डीएमआरसी कनेक्ट एप बनाने वाली 5 सदस्यीय टीम के सदस्य रोहन राजपाल बताते हैं कि एप को इस तरह कोड किया गया है कि डीएमआरसी के ट्विटर हैंडल पर जो अनाउंसमेंट वाली सूचनाएं आएंगी वो खुद एप्प पर आ जाएंगी। अभी डीएमआरसी और यात्रियों के बीच जो गैप है वो भरेगा क्योंकि ट्विटर यूजर कम हैं और स्मार्टफोन रखने वालों की संख्या ज्यादा है। भविष्य में डीएमआरसी से बात करके इसमें शिकायत और उसके निपटारे का फीचर भी जोड़ सकते हैं। एप्प प्ले स्टोर पर है।
 

घर का कबाड़ बेचने का टाइम भी सेट करें
स्वेपको एप और बेवसाइट और कबाड़ी सही कीमत और सही तरीके से बेचने का समाधान निकालने वाले स्टार्टअप के चीफ ऑपरेशंस ऑफिसर व आईआईआईटी दिल्ली के छात्र विनीत कुमार बताते हैं कि कबाड़ी बेचना भी महानगर में बहुत दिक्कत का काम है। दक्षिण दिल्ली में पूरा ऑपरेशनल है और दिल्ली के अलग हिस्सों में भी सेवाएं हैं।

खबरें और भी हैं...