चुनावी चौपाल / टुकड़े टुकड़े गैंग का डर: ये देश कहीं टुकड़े-टुकड़े ना हो जाए; कन्हैया का जीतना मुश्किल



jnu students what think about on general election
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  • जेएनयू के गंगा ढाबे पर ‘थॉट विद फूड्स और फूड फॉर थॉट्स’ के कंफ्यूजन के साथ चुनावी मुद्दों की हकीकत
  • कन्हैया जीतेगा? मुश्किल है, क्योंकि वह अपनी जात को बेच नहीं पाएगा, वह भूमिहार है

Dainik Bhaskar

Apr 16, 2019, 04:10 AM IST

नई दिल्ली. आधुनिक भारत का तक्षशिला और नालंदा कहा जाने वाले जवाहर नेहरू विश्वविद्यालय के विशाल गेट को पार कर एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लाॅक के कुछ आगे बढ़ने पर दाईं ओर रुख करिए तो एक ऊबड़-खाबड़ घाटी दिखाई देती है। बस, यहीं कीकर के पेड़ों की अधमरी छांव में कंक्रीट के चौकोर बोल्डरों पर बैठकर जेएनयू के स्टूडेंट्स ‘थॉट विद फूड्स और फूड फॉर थॉट्स’ में कंफ्यूज रहते हैं। शाम को भी गंगा ढाबे पर वही चिरपरिचित मंजर था। समोसों, नूडल्स और सैंडविच के साथ शोधार्थियों ने छोटी-छोटी चौपाल जमा रखी थीं।

 

शाम का झुरमुटा, अप्रैल की गर्मी और सिर पर बवंडर की तरह घूमते मच्छरों के झुंड पेड़ की डाली तक जाते हैं। किसी गिटारिस्ट की तरह लम्बे बालों और चेहरे पर मोटे काले फ्रेम के चश्मे से झांकते हुए एक एमफिल का स्टूडेंट दोस्तों से कहता है- ये फर्जी मैसक्यूलिन राष्ट्रवाद नवयुवकों को खतरनाक रास्ते पर ले जा रहा है। यह अनकल्चर्ड जोश की जमीन ही बीजेपी के लिए जोरदार फर्टाइल लैंड है। वहां कमल फलफूल रहा है। इस झबरीले बालों वाले इंटलैक्चुअल से, उसके 3 दोस्त भी सहमत दिखते हैं।

 

'यही नवयुवक शर्ट के दो बटन खोलकर राष्ट्रवाद का झंडा लेकर खड़ा है' 

हार के कटिहार से जेएनयू तक का सफर नापकर आया सुप्रियो बहस में तड़का लगाता है। बोला- पता है पिछली बार गांव गया तो वहां नजारा बदल गया था। मेरा भांजा 18 का है। कटिहार में पहली बार दंगे हुए तो वह भी उसमें शामिल था। वजह यह थी कि उसकी स्कूटी को आग में झाेंक दिया गया था। इस बार मैं गांव गया तो देखा कि यही नवयुवक शर्ट के दो बटन खोलकर राष्ट्रवाद का झंडा लेकर खड़ा है।  

 

छात्र का भास्कर से सवाल

मैंने पूछा- मैं आपकी इस चर्चा में शामिल हो सकता हूं। मेरे इस विनम्र आग्रह को उस मंडली ने तुरंत स्वीकार कर लिया। लेकिन जवाबी सवाल बेहद टेढ़ा था- भास्कर किस पार्टी के लिए लिख रहा है? बरेली से आए चंद्रप्रकाश ने एकदम सहज भाव से पूछा। जवाब का उन्होंने इंतजार नहीं किया। उनका बोलना जस का तस जारी रहा- मीडिया तो ऐसा नेरेटिव पेश कर रहा है कि यह देश सिर्फ एक शख्स चलाता है।

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