मंडे पॉजिटिव / शेल्टर होम्स के बच्चों को पढ़ाने से शुरू किया सफर, 70 सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा की सुविधा मुहैया की, 10 लाख छात्रों तक पहुंचने का लक्ष्य



journey started by teaching the children of Shelter Homes
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journey started by teaching the children of Shelter Homes

  • अभिषेक ने मुस्कान स्टार्टअप शुरू किया, फोर्ब्स ने एशिया के अंडर 30 सोशल कारोबारी में शामिल किया
  • शिक्षकों की ट्रेनिंग के लिए एप, स्कूलों में होने वाले काम पर ऑनलाइन नजर 

Dainik Bhaskar

Aug 12, 2019, 07:21 AM IST

नई दिल्ली . यह यकीन कर पाना मुश्किल होता है कि समाजसेवा भी कारोबार हो सकता है। लेकिन 26 साल के अभिषेक दुबे ने समाज सेवा को ही उद्यम बना लिया है। फोर्ब्स ने उनके इसी विचार को मानते हुए उन्हें एशिया अंडर 30 कारोबारी में शामिल किया है। 


महज चार साल पहले अभिषेक ने मुस्कान ड्रीम्स स्टार्टअप शुरू कर सोशल आंत्रप्रेन्योर की शुरुआत की। वेदांता, आयकर विभाग, मप्र सरकार जैसे कई क्लाइंट्स बेस की बदौलत वे सरकारी स्कूलों में पड़ने वाले बच्चों को डिजिटल एजुकेशन दे पा रहे हैं। अभिषेक और उनकी टीम ने तकनीक के जरिए सरकारी स्कूलों के एजुकेशन सिस्टम के नए तरीके पर काम किया। क्लाइंट बनकर पहले कॉरपोरेट कंपनियों से फंडिंग हासिल की और उसे बच्चों की पढ़ाई में लगाया। अभिषेक ने मप्र के ग्वालियर से मुस्कान ड्रीम्स की शुरुआत में वेदांता के कसर फंड से दो स्कूलों को डिजिटल किया।

 

अब भोपाल और ग्वालियर के 70 स्कूलों को डिजिटल करन केे प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। स्टार्टअप में 400 से ज्यादा लोग टीचर को ट्रेनिंग, डिजिटल क्लास रूम्स का इन्फ्रास्ट्रक्चर, छात्रों को नई तकनीक से पढ़ाने का काम करती है। वर्ष 2025 तक 10 लाख बच्चों, 10 हजार क्लास रूम्स और 3 हजार स्कूलों तक पहुंचने का लक्ष्य है। 

 

विजन:  डिजिटल एजुकेशन के लिए सरकार और कंपनियों को एक मंच पर लाना

 

बच्चों को अंग्रेजी सिखाने के दौरान आया आइडिया : 2013 में अभिषेक कम्प्यूटर साइंस में अपनी करियर बनाना चाहते थे। ग्वालियर के आईटीएम में एडमिशन लिया। इस दौरान वे कमजोर तबके के बच्चों को मुफ्त में पढ़ाने भी लगे। अभिषेक ने महसूस किया कि बच्चों की अंग्रेजी कमजोर है, तो उन्होंने इसके लिए डिजिटल तरीका अपनाया। वीडियाे और छोटे-छोटे प्रोग्राम बनाकर उनकी अंग्रेजी ठीक की। फिर टीचर्स को प्रशिक्षित करके स्कूलों को डिजिटल करने का आइडिया सूझा। यहीं से मुस्कान ड्रीम्स की शुरुआत हुई।

 

पिता ने दी थी चेतावनी;या तो पापा चुन लो या समाजसेवा : शुरुआत में न तो फंड मिल रहे थे और न ही खुद की पढ़ाई पूरा करने का समय।  इंजीनियरिंग की पढ़ाई में प्रोजेक्ट्स और होम वर्क भी मिल रहे थे। अभिषेक ने ठान लिया कि बच्चों का भविष्य सुधारेंगे, इसके लिए पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। अभिषेक के इस कदम से उनके पिताजी दुखी हुए। गुस्से में कह दिया कि या तो पापा चुन लो या फिर बच्चे। अभिषेक के लिए बहुत ही कठिन समय था, मगर हिम्मत नहीं हारी और बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लाने में लग गए। 

 

2014 में साथियों की मदद से शुरू किया स्टार्टअप : अभिषेक ने दोस्तों की मदद से 2014 में मुस्कान ड्रीम्स नाम की संस्था की स्थापना की। इसी बीच बच्चों को स्कूल किट देने का वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाया। इस काम में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और आईटीएम के प्रबंधक दौलत सिंह ने सहयोग किया। अभिषेक के साथ काम करने वाले ऋषिराज अब मुस्कान ड्रीम्स के को-फाउंडर हैं। अभिषेक बताते हैं की उनके उद्यम में कोई मालिक जैसी चीज नहीं है। इसलिए यहां कोई भी सबसे ऊपर पहुंच सकता है।

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