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जज आसान टारगेट, न्यायपालिका की छवि धूमिल कर रहे लोग : सीजेआई

एक वर्ष पहले
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सुप्रीम काेर्ट ने जजों पर लगाए जाने वाले आरोपाें काे लेकर चिंता जताई है। - Dainik Bhaskar
सुप्रीम काेर्ट ने जजों पर लगाए जाने वाले आरोपाें काे लेकर चिंता जताई है।
  • जिला जज को बहाल किया, कहा-जज को केस के नतीजे के लिए जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते
  • सुप्रीम कोर्ट ने उप्र की पूर्व अतिरिक्त जिला जज साधना चौधरी की बर्खास्तगी के आदेश को रद्द कर दिया।

नई दिल्ली (पवन कुमार ). सुप्रीम काेर्ट ने जजों पर लगाए जाने वाले आरोपाें काे लेकर चिंता जताई है। भ्रष्टाचार की संभावना के चलते एक जज काे बर्खास्त करने के फैसले को पलटते हुए सुप्रीम काेर्ट ने जज को बहाल करने का आदेश दिया है। चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस बीआर गवई और सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि देश में एेसे अनगिनत लोग हैं, जो सस्ती लोकप्रियता के लिए न्यायपालिका की छवि को धूमिल करने में जरा भी नहीं हिचकिचाते। ऐसे लोगों से बार के असंतुष्ट सदस्य भी अकसर हाथ मिला लेते हैं। जज उनके लिए आसान टारगेट होते हैं।  

हाईकोर्ट देखे कि जजों पर हमले न हों
सुप्रीम कोर्ट ने उप्र की पूर्व अतिरिक्त जिला जज साधना चौधरी की बर्खास्तगी के आदेश को रद्द कर दिया। चीफ जस्टिस ने कहा- न्यायपालिका का सिद्धांत है कि जज को मुकदमे के नतीजे के लिए जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते। हाईकोर्ट सुनिश्चित करे कि ईमानदार जजों पर हमले न हों। 

यह था पूरा मामला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमीन अधिग्रहण में अनियमितता की जांच के लिए कमेटी बनाई थी। कमेटी ने 19 सितंबर 2004 को जज साधना चौधरी के खिलाफ एक रिपोर्ट दी थी। इसमें आरोप था कि उन्होंने दो मामलों में किसानों को सरकार द्वारा तय मुआवजे से अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश दिया। वे ईमानदारी के साथ न्यायिक कार्य करने में विफल रहीं। इस आधार पर उन्हें 17 जनवरी 2006 को बर्खास्त कर दिया गया। इसे उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

पुडुचेरी के सीएम और उपराज्यपाल मिलकर काम करें : हाईकोर्ट
 मद्रास हाईकाेर्ट ने पुडुचेरी की उपराज्यपाल किरण बेदी और मुख्यमंत्री वी नारायणसामी के बीच लंबे समय से चली आ रही खींचतान पर अहम फैसला दिया है। हाईकाेर्ट के चीफ जस्टिस एपी साही अाैर सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा कि मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल को एकजुट हाेकर काम करना चाहिए।   हाईकाेर्ट ने एकल जज के उस फैसले काे पलट िदया है, जिसमें उपराज्यपाल काे राज्य सरकार के राेजाना के कामकाज में दखल देने से राेक दिया था। 

 एकल पीठ ने कहा था कि उपराज्यपाल पुद्दुचेरी की निर्वाचित सरकार के राेजाना के कामकाज में दखल नहीं दे सकती हैं। एकल पीठ के फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार ने पहले सुप्रीम काेर्ट में याचिका दायर की थी। सुप्रीम काेर्ट ने सरकार काे मद्रास हाईकाेर्ट में ही जाने काे कहा था। 30 अप्रैल 2019 के अपने आदेश में जस्टिस आर महादेवन ने कहा था कि उपराज्यपाल केंद्रशासित राज्य की चुनी गई सरकार के राेजाना के कामकाज में दखल नहीं दे सकती हैं।

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