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भास्कर खास / ‘आप’ को परिणाम दोहराने, भाजपा को सीट बढ़ाने और कांग्रेेस पर वोट बैंक वापसी व खाता खोलने का दबाव

चुनाव के ऐलान के साथ ही तीनों राजनीतिक दल अपनी-अपनी सरकार बनाने के दावे कर रहे हैं। चुनाव के ऐलान के साथ ही तीनों राजनीतिक दल अपनी-अपनी सरकार बनाने के दावे कर रहे हैं।
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चुनाव के ऐलान के साथ ही तीनों राजनीतिक दल अपनी-अपनी सरकार बनाने के दावे कर रहे हैं।चुनाव के ऐलान के साथ ही तीनों राजनीतिक दल अपनी-अपनी सरकार बनाने के दावे कर रहे हैं।

  • विस चुनाव-2015 में आप को 67 सीट, भाजपा को 3 सीटें मिली थीं, कांग्रेस की 62 सीट पर जमानत जब्त हो गई थी

Dainik Bhaskar

Jan 10, 2020, 03:02 PM IST

नई दिल्ली . चुनाव के ऐलान के साथ ही तीनों राजनीतिक दल अपनी-अपनी सरकार बनाने के दावे कर रहे हैं। अब भाजपा की तरफ से केंद्र सरकार और आप की तरफ से राज्य सरकार के प्रोजेक्ट शिलान्यास और उद्घाटन व घोषणाएं बंद हो गई है।

अब दिल्ली में आप, भाजपा और कांग्रेस के बीच चुनावी दंगल शुरू हो रहा है। ऐसे में नेता अपने-अपने गुणा-भाग कर रहे हैं। विस 2015 में  आम आदमी पार्टी ने अकेले 54.34% वोट के साथ 67/70 सीट जीतकर इतिहास रहा जिसे दोहराने की चुनौती अरविंद केजरीवाल पर रहेगी। दूसरे नंबर की पार्टी भाजपा को 32.19% वोट मिले लेकिन सीटें सिर्फ तीन मिलीं। वोट प्रतिशत बेशक थोड़ा बढ़े लेकिन सीट बढ़ाने के लिए ताकत लगानी होगी क्योंकि 2013 में भाजपा को महज 33.7% वोट में 31 सीटें मिल गई थी। इसमें कांग्रेस को 24.55% वोट और 8 सीटें मिली थीं।

वोट प्रतिशत के लिहाज से 2015 में आप को 54.34% वोट, भाजपा को 32.19%, कांग्रेस को 9.65% वोट मिले थे

कांग्रेस को 2015 में सिर्फ 9.65% वोट मिले थे और 62 सीट पर जमानत जब्त हो गई थी। कांग्रेस को मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और झारखंड की तरह कुछ चमत्कार या खाता खोलने के लिए लड़ना होगा। दिल्ली की वर्तमान सरकार का कार्यकाल 22 फरवरी, 2020 तक है। दिल्ली की तीनों में से किसी भी राजनीतिक दल ने अपना घोषणा पत्र और प्रत्याशी अभी तक घोषित नहीं किया है। हालांकि आम आदमी पार्टी लगातार अपने कार्यक्रम कर रही है तो कांग्रेस भी लोकल कार्यक्रम में जुटी है। सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की रैली रामलीला मैदान में हुई तो पीएम नरेंद्र मोदी भी रामलीला मैदान में अनाधिकृत कालोनी के बहाने उतर चुके हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और दिल्ली के प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर लगातार दिल्ली में सक्रिय हैं। 

वोटिंग के दौरान सीएए की रहेगी अहम भूमिका

चुनावी विश्लेषक मान रहे हैं कि नागरिकता संशोधन कानून का विरोध प्रदर्शन में जुटे मुस्लिम समुदाय का वोट बैंक विस 2020 में काफी कुछ तय करेंगे। कांग्रेेस नेता उनके साथ प्रदर्शन में दिख रहे हैं तो भाजपा ध्रुवीकरण का कोई हथियार नहीं छोड़ रही है। लोस चुनाव, एमसीडी चुनाव के ट्रेंड की तरह वोट बैंक बंटता है तो भाजपा को फायदा मिलेगा। हालांकि फ्री बिजली-पानी, बच्चों के बोर्ड परीक्षा फीस, फ्री वाईफाई का पॉयलट प्रोजेक्ट, सीसीटीवी कैमरा, महिलाओं की फ्री बस यात्रा, बुजुर्गों की फ्री तीर्थ यात्रा सहित सुविधाओं को भेंदना भाजपा और कांग्रेस के लिए बहुत आसान भी नहीं होगा।

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