दिल्ली / रामलला के वकील बोले- जैसा मुस्लिमाें के लिए मक्का, वैसा हिंदुअाें के लिए अयोध्या



Ramlala's lawyer said - like Mecca for Muslims, Ayodhya for Hindus
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Ramlala's lawyer said - like Mecca for Muslims, Ayodhya for Hindus

Dainik Bhaskar

Aug 14, 2019, 02:41 AM IST

नई दिल्ली | अयोध्या विवाद पर सुप्रीम काेर्ट में मंगलवार को पांचवें दिन की सुनवाई हुई। पांच जजों की संविधान पीठ ने रामलला विराजमान के वकील से पूछा कि विवादित जगह पर भगवान राम के जन्म का सही स्थान कौन-सा है? वकील ने कहा कि इलाहाबाद हाईकाेर्ट ने ढहाई गई मस्जिद के केंद्रीय गुंबद के नीचे वाली जगह काे जन्म स्थान माना था। हिंदू पक्ष ने कहा कि मुस्लिमाें के लिए जाे महत्व मक्का मदीना का है, हिंदुअाें के लिए वैसा ही महत्व अयाेध्या का है।  -सुप्रीम काेर्ट लाइव |  

 

चीफ जस्टिस रंजन गाेगाेई की अध्यक्षता में पांच जजाें की संविधान पीठ ने सुबह 10:45 बजे सुनवाई शुरू की। मंगलवार काे रामलला विराजमान की अाेर से वरिष्ठ वकील के परासरन की दलीलें खत्म हाेने के बाद सीएस वैद्यनाथन ने दलीलें रखीं। पढ़िए लाइव कार्यवाही...


वैद्यनाथन : हिंदू धर्म में जन्मस्थान कैसे देवता की तरह पूजनीय है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के तीन जजों की बेंच ने माना था कि विवादित जगह पर मंदिर था।
जस्टिस अशाेक भूषण : विवादित जगह पर कौन से क्षेत्र को भगवान राम का जन्म स्थान कहते हैं?
 

वैद्यनाथन : हाईकोर्ट ने मस्जिद के केंद्रीय गुंबद को राम जन्म स्थान माना है। 16 दिसंबर 1949 से पहले विवादित जगह पर नमाज हाेती थी। तब वहां मूर्ति नहीं थी। मस्जिद से पहले वहां मंदिर था। हाईकोर्ट के अनुसार विवादित भूमि पर हिंदू-मुस्लिम दोनों का कब्जा था। वक्फ बोर्ड का दावा है कि मस्जिद खाली जमीन पर बनी। परंतु कोर्ट ने माना-वहां मस्जिद से पहले एक मंदिर था।
जस्टिस भूषण : मस्जिद में क्या नमाज के साथ पूजा-पाठ भी होती थी?
 

वैद्यनाथन : नमाज सिर्फ अंदरूनी हिस्से में होती थी। मुस्लिमाें ने माना था कि मस्जिद के बाहरी हिस्से में 3 गैर इस्लामिक ढांचे थे। वहां हिंदू पूजा करते थे।  
जस्टिस भूषण: जैसे चित्रकूट में कमदगिरी पर्वत की परिक्रमा। लोगों का मानना है कि वनवास में भगवान राम, लक्ष्मण और सीता वहां गए थे।
 

वैद्यनाथन : बिलकुल सही। मूर्ति या मंदिर तोड़कर वहां मस्जिद बनाने से उस जगह को देवता और मंदिर के स्वामित्व से वंचित नहीं कर सकते। 
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तो तीनों ही पक्षों काे विवादित जमीन पर कब्जा दिया था। हम आपकी बात किस आधार पर मानें?
 

वैद्यनाथन: वहां हिंदू देवता की स्थापना साबित नहीं हुई। मुस्लिम पक्षकारों का कब्जा भी साबित नहीं हुआ। जब भी हिंदुओं को वहां पूजा से रोकने की मांग की गई तो वहां प्रदर्शन अाैर झगड़े हुए।
जस्टिस भूषण: मुस्लिम पक्षकारों ने भी ताे कब्जे का दावा किया था।
 

वैद्यनाथन: परंतु उसे इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वीकार नहीं किया। यह जमीन न कभी मुस्लिम पक्ष को अलॉट हुई और न ही निर्मोही अखाड़े को। हिंदुओं ने कभी जमीन से निष्कासन स्वीकार नहीं किया।
जस्टिस चंद्रचूड़: हाईकोर्ट से डिक्री किस आधार पर हुई? क्या यह लिमिटेशन पर आधारित थी? जमीन पर पक्षों का अस्तित्व कैसे स्थापित किया गया?
 

चीफ जस्टिस: यह बताएं कि अगर विवादित स्थल पर मुस्लिम पक्षकार के साथ अापका भी कब्जा था ताे आपका एक्सक्लूसिव राइट कैसे हो सकता है?
वैद्यनाथन: पूरे मामले को देखने की तीन अवधारणाएं हैं। पहली देवता का निवास, दूसरी देवता की संपत्ति और तीसरी स्वयं स्थान का देवता हाेना। हमारा दावा है कि वह जगह खुद देवता की तरह है।
 

जस्टिस चंद्रचूड़: आपके अनुसार जमीन खुद देवता है। दूसरा पक्ष यह है कि यह पूजा का स्थान है और उसके अपने कुछ अधिकार हैं। यहां दो अलग-अलग विचार हो सकते हैं।
वैद्यनाथन: सुप्रीम कोर्ट और प्रीवी काउंसिल ने कहा है कि देवता की संपत्ति विभाजित नहीं की जा सकती। इसलिए देवता भी विभाजित नहीं किए जा सकते। यहां मस्जिद बनाने से लोगों का विश्वास और आस्था देवता के प्रति कभी कम नहीं हुई।
 

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