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जन्म से ही नहीं सुन पाती थी साउथ अफ्रीका की एंजिला, डॉक्टरों ने ब्रेन में कोक्लियर इंप्लांट कर दी नई जिंदगी

2 वर्ष पहले
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  • कान में मौजूद नहीं थी सुनने वाली नर्व इसलिए डॉक्टरों ने ब्रेन में किया इंप्लांट

नई दिल्ली . साउथ अफ्रीका की 6 साल की एंजिला जन्म से सुन नहीं पाती थी। इसकी वजह उसके कान में सुनने वाली नर्व (कोकलिया) का नहीं होना था। स्टैंडर्ड कोक्लियर इंप्लांट से उसका इलाज संभव नहीं था, क्योंकि बच्ची में हियरिंग नर्व ही नहीं थी। ऐसे में आॅडिटरी ब्रेन स्टेम इंप्लांट ही उसके उपचार का एकमात्र विकल्प था।


दिल्ली के अपाेलाे अस्पताल में उसका उपचार किया गया। बच्ची काे अब सुनाई देने लगा है। हालांकि, उसे शब्दों या आवाज का अर्थ समझने में वक्त लगेगा। जानकारी के मुताबिक मोजांबिक, दक्षिणी अफ्रीका से आई एंजिला को जन्म से ही सुनाई नहीं देता था। एंजिला की मां ने जब उसका चेकअप कराया तो पता चला कि उसकी हियरिंग नर्व ही नहीं थी। डॉक्टरों का कहना है कि एंजिला जैसी स्थिति बहुत रेयर होती है। डाॅ. (प्रोफेसर) अमित किशोर ने कहा कि आॅडिटरी ब्रेन स्टेम इंप्लांट एक हाई रिस्क सर्जरी है। इसमें आॅडिटरी डिवाइस को सर्जरी से ब्रेनस्टैम में इंप्लांट किया जाता है।

कान में सुनने वाली नर्व न होने के आते हैं दुर्लभ मामले, बहुत रिस्की है सर्जरी की प्रक्रिया

मरीज की उम्र का कम होना थी बड़ी चुनौती
डॉ. नीविता नारायण कहती हैं कि सर्जरी में सबसे पहले इंप्लांट को प्लेस किया जाता है। फिर ब्रेन स्टेम में आॅडिटरी सेंटर जोड़ा जाता है, ये दोनों प्रक्रियाएं बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। डाॅ. प्रणव कुमार ने कहा कि मरीज की उम्र का कम होना भी चुनौती थी। डाॅक्टरों की टीम को पूरी सावधानी के साथ आपसी तालमेल में काम करते हुए सुनिश्चित करना था कि इंप्लांट ब्रेन स्टेम में ठीक से प्लेस किया जाए और शरीर के अन्य कार्यों जैसे हार्टबीट, ब्लड प्रेशर आदि से जुड़ी नर्वस पर सही नियंत्रण बना रहे।

जोखिमभरी है यह सर्जरी 
ऐसी सर्जरी में कई जोखिम हो सकते हैं जैसे सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूड का रिसाव, तंत्रिकाओं को नुकसान पहुंचने के कारण चेहरे की गतियां खत्म हो सकती हैं। दिल की धड़कन, ब्लड प्रेशर पर नियंत्रण जरूरी है। यह सर्जरी डाॅ. (प्रोफेसर) अमित किशोर, डॉ. नीविता नारायण, डाॅ. प्रणव कुमार सहित कई सीनियर कन्सलटेन्ट और न्यूरोसर्जन ने की।

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