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साथी की मौत हुई, जेल गए, लेकिन गंगा के लिए 30 जगह संघर्ष जारी

2 वर्ष पहले
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अनशन कर रहे स्वामी गोपालदास को शनिवार दोपहर बाद पुलिस जबर्दस्ती ले गई और एम्स में भर्ती करवा दिया।

धर्मेन्द्र सिंह भदौरिया, नई दिल्ली.  देश की सबसे पवित्र नदी गंगा को अविरल और निर्मल बनाने के लिए प्रो. जीडी अग्रवाल (स्वामी सानंद) ने 111 दिनों तक लगातार आमरण अनशन किया। अनशन के दौरान ही जान गंवा दी। गंगा के लिए देश में अलग-अलग लोग, अलग-अलग जगह संघर्ष कर रहे हैं। इनमें आईआईटी पासआउट बनारस के ओपी चौधरी और कई प्रिंसिपल, प्रोफेसर शामिल हैं। जल-जन जोड़ों अभियान के राष्ट्रीय संयोजक संजय सिंह ने बताया कि जहां स्वामी सानंद ने 111 दिन तक धरना दिया ठीक उसी स्थान पर फिर से धरना शुरू कर दिया गया है।

 

गंगा की यह लड़ाई और प्रखरता के साथ लड़ी जाएगी। देश में करीब 30 से अधिक स्थानों पर लोग और विभिन्न संस्थान गंगा सफाई के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इलाहबाद के कुंभ में इस बार गंगा की अविरलता और निर्मलता मुद्दा होगा। सिंह ने बताया कि स्वामी सानंद की इच्छा के अनुरूप गंगा सद्भावना यात्रा निकाली है। यह यात्रा गौमुख से दिल्ली तक पहुंच गई है और 14 अक्टूबर रविवार को दिल्ली से आगे बढ़ेगी। 14 जनवरी तक गंगासागर पहुंचेगी। यह यात्रा जलपुरुष राजेंद्र सिंह के नेतृत्व में होगी।

 

संजय सिंह कहते हैं कि आंदोलनकारी चाहते हैं कि गंगा लगातार बहे। गंगा सतत प्रवाहमान नदी है। यह नहीं रहती तो फिर जीवन रुक जाता है। जीव जिंदा नहीं रह पाते हैं। पीपुल्स साइंस इंस्टीट्यूट के निदेशक और मुंबई आईआईटी से पासआउट रवि चोपड़ा बताते हैं कि मिट्‌टी कण और वनस्पति के टुकड़े जो ऊपर से आते हैं इसके कारण ही गंगा का पानी कभी सड़ता नहीं है। पानी रुक जाएगा तो फिर यह विशेषता खत्म हो जाएगी।  

 

जहां सानंद ने अनशन किया था वहीं 110 दिन से बैठे गोपालदास : हरिद्वार में कनखल में मातृसदन के अध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती लगातार संघर्ष कर रहे हैं। उनके शिष्य निगमानंद 2012 में गंगा के लिए बलिदान दे चुके हैं। जिस कमरे में जीडी अग्रवाल का निधन हुआ उसी कमरे में उसी स्थान पर गोपालदास भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। 110 दिन से वे भी धरने पर थे और दो दिन से पानी नहीं पी रहे थे, उन्हें सदन के कार्यकर्ताओं ने जल पिलाया।

 

65 दिन तक जेल में रहीं, गंगा-हिमालय बचाना ही मकसद : केदारघाटी में 54 वर्षीय सुशीला भंडारी 2001 से आंदोलन कर रहीं हैं। 2011 में वे हाइड्रोपॉवर प्रोजेक्ट के खिलाफ प्रदर्शन में 65 दिन जेल में रहीं। सुशीला बताती हैं कि गंगाजी को तालाब बना दिया है। पहाड़ों को काट रहे हैं। अभी हरिद्वार में जीडी अग्रवाल की शोक सभा में शामिल होने आईं सुशीला कहती हैं कि मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री से भी मिलीं, कार्यवाही कोई नहीं करता।

 

सहायक नदियों की सफाई कर रहे, गंगा के लिए यात्रा निकाल रहे : इलाहाबाद के 39 वर्षीय आर्य शेखर जंतर-मंतर पर धरना दे रहे हैं। वे गंगा सद्भावना यात्रा पर दिल्ली पहुंचे हैं। वे बीते एक दशक से इसके लिए संघर्षरत हैं। शेखर कहते हैं कि गंगा तभी साफ रहेगी जब उसकी सहायक नदियां साफ होंगी। इसलिए सई, मालती, गोमती, लोनी आदि नदियों के लिए क्षेत्र में आंदोलन कर रहे हैं। जब गंगाजी के पानी को बेचना शुरू हुआ था तब मैंने प्रधानमंत्री को पत्र भी लिखा था।

 

गंगा पीस मार्च निकाला, बदाहाली पर राष्ट्रपति को दी रिपोर्ट : महाराष्ट्र सरकार की जलनायक डॉ. स्नेहल डोंडे ने बिहार से फरक्का (कोलकाता) तक गंगा नदी में जमा हुई गाद और उसके कटाव पर विस्तृत अध्ययन किया है। इसकी रिपोर्ट प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को भी दी है। वे कहती हैं कि अभी 29 सितंबर को ही गंगा पीस मार्च निकाला था। फरक्का में गंगा बचाओ आंदोलन चला रही हैं। हाल ही में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से भी मिलीं।

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