चाइल्ड पोर्नोग्राफी / सुप्रीम कोर्ट के निर्देश, इंटरनेट; साेशल मीडिया की बैठक बुलाए केंद्र

सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

  • चीफ जस्टिस एसए बाेबडे की अध्यक्षता वाली पीठ हैदराबाद की एनजीओ प्रज्वला की एक चिट्ठी काे याचिका मानकर सुनवाई कर रही है
  • सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश पर सॉलिसिटर जनरल तुषर मेहता ने कहा- गृह मंत्रालय बैठक बुलाएगा

Dainik Bhaskar

Feb 12, 2020, 03:49 AM IST

नई दिल्ली | सुप्रीम काेर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह चाइल्ड पोर्नोग्राफी, दुष्कर्म के वीडियाे और तस्वीराें के ऑनलाइन प्रसार राेक लगाने के लिए इंटरनेट, साेशल कंपनियाें- गूगल, वाॅट्सएप और फेसबुक सहित अन्य संबंधित के साथ बैठक फिर से शुरू करे। चीफ जस्टिस एसए बाेबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंगलवार को हैदराबाद की एनजीओ प्रज्वला की एक चिट्ठी काे याचिका मानकर सुनवाई कर रही है।

प्रज्वला की ओर से वकील अपर्णा भट ने काेर्ट काे बताया कि साइट्स पर दुष्कर्म और अन्य पाेर्न वीडियो के प्रसार पर प्रभावी ढंग से राेक लगाने के मुद्दे पर केंद्र ने दिसंबर 2018 से संबंधित कंपनियाें की बैठक नहीं बुलाई है। इस संबंध में केंद्र काे निर्देश जारी किया जाए। इस पर केंद्र की ओर से साॅलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि गृह मंत्रालय बैठक बुलाएगा। इसके बाद सुप्रीम काेर्ट ने मामले की सुनवाई चार सप्ताह के लिए आगे बढ़ा दी।


प्रज्वला ने 2015 में तत्कालीन चीफ जस्टिस एचएल दत्तू काे एक चिट्ठी लिखी थी, जिसके साथ दुष्कर्म के दाे वीडियाे की पेनड्राइव भी देते हुए कहा था कि इंटरनेट पर ऐसे कंटेंट पर राेक लगाई जाए। इस पर सुप्रीम काेर्ट ने स्वत:संज्ञान लिया था।
 
पाेर्न वीडियाे पर तुरंत राेक लगे 
वकील भट ने सुप्रीम काेर्ट से कहा कि दुष्कर्म या पाेर्न वीडियाे, फाेटाे के प्रसार काे राेकने के उपाय पर इंटरनेट कंपनियाें का रवैया लचर है। एेसे वीडियाे काे शुरुआत में ही राेका जा सकता है, लेकिन इसमें 36 घंटे बाद कार्रवाई की जाती है। उस समय तक यह वायरल हाे जाता है। भट ने कहा कि चाइल्ड पोर्नोग्राफी का मुद्दा पाॅक्साे कानून के दायरे में है। इस पर तत्काल कदम उठाना जरूरी है।


वहीं न्याय मित्र वकील एनएस नप्पिनई ने सुझाव दिया कि सोशल मीडिया प्लेटफाॅर्म पाेर्न वीडियाे या तस्वीर के प्रसार काे एआई के जरिए शुरुआत में ही राेक सकते हैं। 2018 में सुप्रीम काेर्ट ने कहा था कि केंद्र चाइल्ड पोर्नोग्राफी और दुष्कर्म के वीडियो और फाेटाे काे इंटरनेट और अन्य साेशल साइट्स पर राेकने के लिए दिशा-निर्देश या मानक संचालन प्रक्रिया लागू किया जा सकता है।

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