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धनोआ ने कहा- हमारी कार्रवाई के दौरान 150 किलोमीटर की रेंज में पाकिस्तान का कोई एयरक्राफ्ट नहीं था

9 महीने पहलेलेखक: मुकेश कौशिक
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पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ।
  • एयर चीफ मार्शल भदौरिया ने कहा- जंग जरूरत के समय वर्दीधारी योद्धाओं के सामूहिक साहस और प्रयासों के दम पर लड़ी जाती
  • बीएस धनोआ- पायलटाें के राेजाना उड़ान अभ्यास में असली युद्धक प्रशिक्षण शामिल हाेता है

नई दिल्ली. पूर्व वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ ने कहा कि पिछले साल 26 फरवरी को पाकिस्तान के बालाकोट में हुई एयर स्ट्राइक के दौरान 150 किलोमीटर के रेंज में कोई भी पाकिस्तानी एयरक्राफ्ट नहीं था। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को भारत द्वारा किए जा रहे एयर स्ट्राइक की जानकारी ही नहीं थी। उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि हम किस तरह के हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं। जब उनकी पहली तस्वीर सामने आईं, तो मुझे यह स्पष्ट हो गया था कि उन्हें पता नहीं है कि उन्हें कैसे मारा गया है।


श्रीनगर में बुधवार को वायुसेना प्रमुख एयर चिफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने मिराज-2000 और स्क्वाड्रन कमांडिंग ऑफिसर ग्रुप कैप्टन नजीर ने सुखोई-30 एमकेआई पर उड़ान भरी। इस दौरान भदौरिया ने कहा कि संदेश साफ है कि यदि सीमापार से कोई हमला होता है तो उसका जवाब दिया जाएगा और मजबूत जवाब दिया जाएगा। राफेल गेम-चेंजर साबित होगा, जब हम इसका इस्तेमाल हमारे पास मौजूद अन्य एयरक्राफ्ट के साथ करेंगे। तब हम एक अलग ही वायुसेना होंगे।


ठीक एक साल पहले आज ही के दिन यानी 26 फरवरी की रात भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान से पुलवामा हमले का बदला बालाकोट एयर स्ट्राइक से लिया था। 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हमला हुआ था। हमारे 40 जवान शहीद हो गए थे। देश में गुस्सा था। आम चुनाव भी करीब थे। जांच में पाकिस्तान का हाथ सामने आया। भारत सरकार ने दुश्मन को करारा जवाब देने का संकल्प लिया। 26 फरवरी यानी पुलवामा हमले के करीब दो हफ्ते बाद भारतीय वायुसेना ने आधी रात को पाकिस्तान के बालाकोट में हवाई हमला किया। आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के ट्रेनिंग सेंटर को नेस्तनाबूद कर दिया। यहां इस हमले के सूत्रधार रहे तत्कालीन वायुसेना प्रमुख बीएस. धनोआ और वर्तमान एयर फोर्स चीफ आरकेएस. भदौरिया से दैनिक भास्कर की खास बातचीत। 

आरकेएस भदौरिया, एयर चीफ मार्शल 
बालाकोट एयर स्ट्राइक का 26 फरवरी को एक साल पूरा हाे रहा है। मेरा मानना है- ‘जंग जरूरत के समय वर्दीधारी योद्धाओं के सामूहिक साहस और प्रयासों के दम पर लड़ी जाती है। बालाकोट एयर स्ट्राइक सीमा पार से चलाए जा रहे आतंकवाद के खिलाफ भारत की सामरिक कार्रवाई में महत्वपूर्ण बदलाव दिखाता है। इस कार्रवाई ने पारंपरिक जंग से अलग हालात में एयर पावर के इस्तेमाल की रणनीति बदल दी है। हमने दुश्मन को स्पष्ट संदेश दिया कि कोई भी नापाक हरकत करने पर वायुसेना घर में घुसकर मार सकती है। हम हर तरह की जंग के लिए तैयार हैं।’ हम विभिन्न क्षेत्रों में एक साथ कारगर कार्रवाई करने और जंग से लेकर आतंकवाद जैसी कम स्तर की लड़ाइयों से निपटने के लिए भी पूरी तरह सक्षम है। अगले दो दशकों में हमारी वायुसेना ऐसे अत्याधुनिक संसाधनों से सुसज्जित हो जाएगी, जिससे हमारी दुनिया में अलग पहचान बनेगी। इसमें लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट-एलसीए एमके-2, एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट-एम्का, एडवांस्ड सेंसर टेक्नोलॉजी, स्मार्ट विंगमैन कॉन्सैप्ट, बहुउद्देश्यी ड्रोन, हाइपर सोनिक यानों और डायरेक्टेड एनर्जी वेपंस शामिल हैं। डिफेंस मैनुफेक्चरिंग और प्रोडक्शन में आत्मनिर्भरता हासिल करने के मिशन के लिए भी वायुसेना पूरी तरह से तैयार है। 

असली जंग जैसे हालात में राेज प्रैक्टिस करते हैं वायुसेना के लड़ाकू पायलट : बीएस धनोआ, तत्कालीन वायुसेनाध्यक्ष
‘बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद पाकिस्तानी एफ-16 विमान को गिराने वाले जांबाज पायलट विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान आज देश के सशस्त्र बलाें की मजबूती का चेहरा बन गए हैं। चयन और प्रशिक्षण, इन दो आधार पर ही पायलट तैयार होते हैं। किसी भी पायलट काे ऑपरेशन के लिए पूरी तरह तैयार घाेषित करने से पहले यह सुनिश्चित किया जाता है कि वह हर तरह के मिशन के लिए सक्षम है या नहीं। काॅम्बैट मिशन में जाे हालात पैदा हाेने की आशंका रहती है, उन सभी हालात से गुजारकर पायलट की प्रतिक्रियाओंका आकलन किया जाता है। शुरू में उन्हें दिन के मिशन का प्रशिक्षण दिया जाता है। उसके बाद चांदनी रात, फिर अंधेरी रात और सबसे आखिरी में सूर्याेदय और सूर्यास्त के वक्त मिशनाें के लिए प्रशिक्षण देते हैं। पूरी तरह ऑपरेशनल घाेषित हाेने के बाद पायलट काे किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहना हाेता है। पायलटाें के राेजाना उड़ान अभ्यास में असली युद्धक प्रशिक्षण शामिल हाेता है। इसमें इजेक्शन काे छाेड़ बाकी सभी हालात का अभ्यास किया जाता है। पायलटाें काे जंगल और बर्फ में गिरने के बाद जिंदा रहने और दुश्मन की कैद से बचकर निकलना भी सिखाया जाता है।’

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