ग्लैंडर्स बीमारी / दिल्ली में बारातों में घोड़े के इस्तेमाल पर फिर लग सकती है रोक



use of horse in barat can ban again in Delhi
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use of horse in barat can ban again in Delhi

  • अप्रैल में 8 घोड़े पाए गए थे ग्लैंडर्स से पीड़ित, इनमें से 7 घोड़ों की दोबारा जांच की गई, मिले पॉजिटिव 
  • दिल्ली में करीब 3000 हजार घोड़े हैं, पिछले साल करीब 40 घोड़े थे ग्लैंडर्स से पीड़ित 

Dainik Bhaskar

Jun 14, 2019, 03:31 AM IST

नई दिल्ली (तरुण सिसोदिया). जानलेवा बीमारी ग्लैंडर्स का हमला एक बार फिर दिल्ली के घोड़ों पर हुआ है। जांच में एक बार पॉजिटिव पाए जाने के बाद तसल्ली के लिए दोबारा हुई जांच में भी घोड़े पॉजिटिव पाए गए हैं। अब सरकार इसे नोटिफाई करने की तैयारी में जुट गई है। एनिमल हसबेंडरी विभाग इसी काम में लगा है।

 

नोटिफाई करने के बाद घोड़ों की मूवमेंट पूरी तरह से बंद हो जाएगी। दिल्ली में करीब 3000 हजार घोड़े हैं, पिछले साल करीब 40 घोड़े ग्लैंडर्स से पीड़ित थे। घोड़ों के दोबारा पॉजिटिव पाए जाने की रिपोर्ट हाल ही में सामने आई है। इसमें 7 घोड़े ग्लैंडर्स पीड़ित पाए गए हैं। इससे पहले मई में 18 में से 8 घोड़े पॉजिटिव पाए थे। यह घोड़े नेब सराय और मंगोलपुरी इलाके के बताए जा रहे हैं। इनके ब्लड सैंपल की जाच नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन एक्वाइंस (एनआरसीए), हिसार ने की है।

 

जानकारी के मुताबिक एक सामाजिक संस्था ने 26 अप्रैल को दिल्ली के 18 घोड़ों का सैंपल लिया था। इसकी रिपोर्ट 7 मई को आई, जिसमें 8 घोड़े ग्लैंडर्स पीड़ित मिले। इनमें से 7 घोड़ों का सैंपल दोबारा गया, जिनकी रिपोर्ट अब आ गई है। इसमें भी यह पॉजिटिव पाए गए हैं। एक को लेकर अधिकारी विश्वस्त थे। पूरी दिल्ली में घोड़ों में जांच में तेजी लाई गई है। साथ ही घोड़ा मालिकों को एडवाइजरी भी जारी की गई है। 


घोड़ों से इंसान में भी रहता है खतरा 
पशु चिकित्सक के मुताबिक ग्लैंडर्स के बैक्टीरिया बहुत छोटे होते हैं, जो आसानी से शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। इस बीमारी में घोड़े को बुखार के साथ शरीर पर चकत्ते आते हैं। वह खाना पीना छोड़ देता है और उसकी हालत लगातार गिरती जाती है। नाक भी बहने लगती है। कोई जानवर या इंसान अगर इन घोड़ों के संपर्क में आ जाए तो उनमें भी इस बीमारी के पनपने का खतरा रहता है। फिलहाल दिल्ली में किसी इंसान को यह बीमारी नहीं हुई है। 

 

 

कुछ घोड़ों में ग्लैंडर्स की पुष्टि हुई है। इनकी मॉनिटरिंग की जा रही है। इसमें कोई भी आर्मी या पुलिस का घोड़ा नहीं है। ग्लैंडर्स को नोटिफाई करने के बारे में भी गंभीरता से विचार हो रहा है। जिनमें ग्लैंडर्स पाया गया है वह गंदी जगहों पर रह रहे थे। घोड़े पालने वालों को विभाग की ओर से सावधान और सतर्क रहने के लिए भी कहा गया है। साथ ही उन्हें गाइडलाइन भी जारी की गई है। -डॉ. एल दास, डायरेक्टर, एनीमल हसबेंडरी, दिल्ली सरकार

 

इनका रखें ध्यान

  • ग्लैंडर्स पीड़ित को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें। 
  • बीमार और स्वस्थ पशुओं को भोजन और पानी अलग-अलग दें। 
  • पीड़ित पशु द्वारा छोड़े गए चारे या पानी को खुलें में न छोड़ें, मिट्टी में दबा दें। बीमार और स्वस्थ जानवरों की देखरेख के लिए अलग-अलग लोगों को लगाएं। 
  • बीमारी के लक्षण जैसे नाक और आंख से पानी आना, सांस लेने में तकलीफ और त्वचा के घावों का ध्यान रखें। संदिग्ध पशुओं के केयरटेकर को हर बार साबुन से हाथ धोना चाहिए।
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