आक्रोश / मैं ‘निर्भया’ क्यों, दरिंदे निर्भय क्यों

Why I am 'Nirbhaya'
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Why I am 'Nirbhaya'

  • महिलाओं के खिलाफ अपराधाें के विराेध में जंतर-मंतर पर भारी प्रदर्शन, महिलाओं ने सवाल भी पूछे, दरिंदों के लिए सजा भी बताई
  • देश में हर16 मिनट में एक दुष्कर्म, 15 नवंबर तक इस साल दिल्ली में 2 हजार से ज्यादा दुष्कर्म के केस दर्ज

Dainik Bhaskar

Dec 04, 2019, 01:47 AM IST

नई दिल्ली . तेलंगाना में वेटरनरी डॉक्टर से सामूहिक दुष्कर्म कर हत्या। राजस्थान के टाेंक में 6 साल की बच्ची से दुष्कर्म के बाद हत्या। दिल्ली के गुलाबीबाग इलाके में 22 साल के एक युवक ने 55 साल की महिला से दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर दी। ... घटनाओं का न कोई सिरा है न अंत। है तो केवल दर्द, चीखें और सिस्टम से लेकर समाज तक का दोगलापन। दिल्ली से लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में दुष्कर्म सहित महिलाओं के खिलाफ बढ़ रही हिंसा के खिलाफ आवाज बुलंद करने के लिए जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया। बेटियों से दरिंदगी करने वालों को सख्त सजा देने की मांग के साथ पूरा इलाका नारों से गूंज रहा था।

हाथों में तख्तियां और दिल में एक ही सवाल- मैं ‘निर्भया’ क्यों, दरिंदे निर्भय क्यों? यहां छात्र-छात्राएं भी थीं, पूर्व सैनिक, वरिष्ठ नागरिक समेत तमाम संगठन के लोग भी। सबको उम्मीद है कि प्रजा की आवाज से तंत्र जाग जाए। भास्कर ने मंगलवार को यहां आए लोगों से उनके मन की बात सुनी।

मालीवाल ने शुरू किया अनशन, शाम 5 बजे के बाद पुलिस के एतराज जताने पर जंतर-मंतर से समता स्थल पर पहुंचीं

महिला सुरक्षा की मांग के साथ दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल मंगलवार को आमरण अनशन पर बैठ गईं। जंतर-मंतर पर शाम 5 बजे के बाद प्रदर्शन नहीं करने के कोर्ट का आदेश का पालन कराने के लिए पुलिस बल धरना स्थल पर पहुंचा। वहीं, मालीवाल ने दूसरी जगह न बताने तक उठने से इंकार कर दिया। लेकिन बाद में उन्हें समता स्थल भेज दिया गया। इस बीच मालीवाल ने पीएम को पत्र लिखकर निर्भया कांड के दोषियों को जल्द फांसी और दुष्कर्म के दोषियों को छह महीने में फांसी देने की मांग की।

तख्तियों पर लिखा- बेटी से कहते हो- कभी घर की इज्जत मत खराब करना, बेटे से क्यों नहीं कहा- किसी के घर की इज्जत खराब मत करना

चौराहे पर जिंदा जलाने की सजा हो
मैं दो बहनों का भाई हूं। अब मुझे डर लगने लगा है। न समाज को, न सिस्टम को कोई फर्क पड़ रहा। सिर्फ कुछ दिन के लिए शोर मचता है फिर निर्भया के दोषी जेल में आराम से समय काटते हैं। सरकार का कानून सख्त नहीं है। ऐेसे दरिंदों को चौराहे पर जिंदा क्यों नहीं जलाया जाता। क्यों महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वालों की परिणाम जानकार ही रूह नहीं कांपती? 

6 महीने में दें दोषियों को फांसी

हमेशा लड़कियों को ही कमजोर बोला जाता है। यह बोलकर उनके दिमाग में उनके कमजोर होने की बात डाल दी जाती है। जिसका फायदा महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वाले उठाते है। छोटी-छोटी बच्चियों के साथ दुष्कर्म की घटनाएं हो रही हैं। वह ताे मासूम हैं। उनको किस अपराध की सजा बचपन में मिल जाती है। ऐसे मामलों के दोषी अपराधियों को सरकार 6 महीने में फांसी की सजा का क्यों प्रावधान नहीं करती। इस तरह के अपराध के लिए सिर्फ मौत की सजा होनी चाहिए। मेरा सरकार से निवेदन है कि देश की बेटियों को सुरक्षित माहौल देने के लिए अब कुछ कीजिए। हम चाहते हैं कि भविष्य में किसी के साथ निर्भया जैसा बर्ताव न हो।

सजा देने को ‘भेड़िये’ जनता को सौंपे जाएं 
मैं लड़की हूं, क्या इसलिए मुझे डरना चाहिए। क्या घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। मैं नौकरीपेशा हूं।  अरे जब वोट के लिए कानून कुछ घंटों में बदल सकता है तो बेटियों की सुरक्षा के लिए कठोर कानून क्यों नहीं बन सकता? महिलाओं को इंसान नहीं समझने वाले इन भेड़ियों को सजा देने के लिए जनता को सौंपने का कानून बने। 

घर से आजादी, फिर बाहर पाबंदी क्यों?

मेरे परिवार से मुझे पूरी आजादी मिली है।  मैं कॉलेज की पढ़ाई के साथ सोशल वर्क भी करती हूं। ऐसे में घर लौटने में कभी शाम भी हो जाती है, लेकिन घर के बाहर मैं अपने आप को आजाद महसूस नहीं करती। मुझे हमेशा डर लगता है। हमारा समाज लड़कियों को सुरक्षित माहौल क्यों उपलब्ध नहीं कराता। इस तरह कितनी निर्भया दीया जलाने और प्रदर्शन करके याद की जाती रहेंगी।

दरिंदों का बनाएं मौत का वीडियो 

मुझे अपने आप पर शर्म आती है। मुझे अब अपने परिवार के बच्चों के स्कूल या परिवार के सदस्य के बाहर जाने के बाद, घर लौटने तक डर लगता है। हम किस समाज में रह रहे हैं। यदि लोगों को कानून का डर नहीं है तो सरकार को ऐसे कानून को बदल देना चाहिए। ऐसे लोगों के लिए समाज में कोई दया नहीं होनी चाहिए। इनकी चौराहे पर जला कर तड़पा-तड़पा कर मारना चाहिए। इनका वीडियो बनाकर भी दिखाना चाहिए। ताकि ऐसे अपराध करने से पहले लोगों में डर का माहौल बने। एक बात यह भी अब समाज को भी बदलना होगा। लोगों को घर के अंदर लड़कों को बताना होगा कि स्त्री का सम्मान करो, उसे एक इंसान समझो। 

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