दिल्ली / हम आदेश देकर बात मनवा सकते हैं, पर मौका दे रहे कि आप सेना में महिलाओं को स्थाई कमीशन दें: जस्टिस चंद्रचूड़



You should give permanent commission to women in the army: Justice Chandrachud
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You should give permanent commission to women in the army: Justice Chandrachud

Dainik Bhaskar

Nov 20, 2019, 12:30 AM IST

नई दिल्ली . सेना की जिन 8 महिला अफसरों की याचिका पर केंद्र सरकार ने महिलाओं को सेना में स्थाई कमीशन देने पर विचार किया, उन्हें ही इसके लाभ से वंचित कर दिया गया है। इसकी जानकारी सामने आने पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और सेना को फटकार लगाई है। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंगलवार को कहा, हम चाहें तो आदेश कर अपनी बात मनवा सकते हैं, मगर हम आपको एक मौका दे रहे है कि आप खुद ये करें और इसका क्रेडिट ले लें। कोर्ट ने केंद्र सरकार को भी निर्देश दिया कि वह अगले गुरुवार तक कोर्ट को इस संबंध में सकारात्मक फैसले के साथ सूचित करें। 

 

 दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में सेना की 8 महिला अफसरों की वकील ऐश्वर्या भाटी ने मंगलवार को बताया कि केंद्र सरकार द्वारा सेना में महिला अधिकारियों को अागामी प्रभाव से अप्रैल 2020 से स्थाई कमीशन देने संबंधी कुछ रिपोर्ट मीडिया में आई हैं। इसका सीधा मतलब है कि जिन्होंने सेना में जेंडर असमानता के खिलाफ आवाज उठाते हुए स्थायी कमीशन की मांग की थी। उन्हें ही इससे वंचित किया जा रहा है। भाटी के इस तर्क पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस दिया। 
हाई कोर्ट ने 2010 तक एसएससी से आईं महिलाओं को स्थाई कमीशन का आदेश दिया था


8 महिला अधिकारियों की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार और सेना को आदेश दिया था कि वह मार्च 2010 तक एसएससी के माध्यम से नियुक्त हुई महिला अधिकारियों को परमानेंट कमीशन दे। इस निर्णय को सेना ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। जबकि वायु सेना ने अपनी महिला अफसरों के लिए परमानेंट कमीशन लागू कर दिया था। वहीं नेवी ने एसएससी से नियुक्त महिला अधिकारियों को परमानेंट कमीशन का पात्र मान लिया था।

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