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सेल्फ एनालिसिस / ग्रुपथिंक को इग्नोर कर बनाएं खुद अलग की पहचान, डेवलप करें अपनी थिंकिंग स्किल्स

habit of groupthink prevents the development of Independent thinking  skills, try to make your identity
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habit of groupthink prevents the development of Independent thinking  skills, try to make your identity

Dainik Bhaskar

Feb 11, 2020, 05:52 PM IST

एजुकेशन डेस्क. अधिकांश लोग अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलने से कतराते हैं। ऐसा ही एक कम्फर्ट जोन है ग्रुपथिंक। इस परिस्थिति में लोग वर्कप्लेस पर ऐसे फैसले लेते हैं जो दूसरों के अनुकूल हों ताकि वे आपसी तनाव से बच सकें, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ग्रुपथिंक के नुकसान भी हैं? ऐसा कर आप इंडिपेंडेंट थिंकिंग स्किल्स डेवलप नहीं कर पाते और न ही टीम के बीच आपका अपने विचारों के लिए सम्मान होता है। अगर आप भी ग्रुपथिंक के शिकार हैं तो ये टिप्स आपके काम आएंगी।

कभी भी सवाल पूछने में झिझक महसूस न करें 
सवाल, लोगों को सोचने पर मजबूर करते हैं। ये उन्हें नई इंफॉर्मेशन के बारे में विचार करने और रचनात्मक फैसले लेने में मदद कर सकते हैं। एक इंडिपेंडेंट थिंकर के तौर पर आपका काम है, दूसरों को इस बारे में सोचने पर विवश करना कि कहीं उन्होंने विषय के किसी पहलू को नजरअंदाज तो नहीं कर दिया। यह देखने पर कि आपके विचार उन्हें बेहतर फैसले लेने में मदद करते हैं, वे आपकी और आपके विचारों की कद्र जरूर करेंगे। हां, अगर आपकी ऑडिएंस अथॉरिटेटिव पोजिशन पर हो तो इसी बात को थोड़ा डिप्लोमैटिक रूप से कहना सही रहेगा।

न बदलने वाली बातों पर जरूर जताएं संदेह 
कंफर्ट जोन से बाहर निकलने और नई संभावनाएं तलाशने में टीम की मदद थोड़ा सा संदेह जताकर की जा सकती है। उदाहरण के लिए, आपकी टीम को किसी प्रोजेक्ट में किसी वेंडर का चुनाव करने की जरूरत है और सभी उसी वेंडर को चुनना चाहते हैं जिसके साथ वे अब तक काम करते आए हैं। ऐसे में आप यह पॉइंट आगे रख सकते हैं कि क्या अन्य वेंडर उससे बेहतर काम नहीं कर सकते और क्या पुराने वेंडर के साथ काम करना कंपनी के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्णय है। ऐसा करके आप नए आइडिया देने वाले कलीग के तौर पर पहचान बना सकते हैं।

अपने विचारों के साथ कंफर्टेबल बनें
किसी भी मुद्दे पर अपनी राय व्यक्त करने में अगर आप झिझक महसूस कर रहे हों तो खुद से ये सवाल पूछें - अगर मैं अभी अकेला होता तो मैं इस बारे में क्या कहता, अगर मैं इंचार्ज होता तो मेरे विचार क्या होते, अगर मुझे किसी परिणाम की परवाह न होती तो मैं क्या करता? इस तरह अपने विचारों और धारणाओं के प्रति कंफर्टेबल हो जाएं ताकि आपके अंदर इतना कॉन्फिडेंस आ सके कि आप उन पर एक्ट कर सकें। आप अपनी टीम की मदद तभी कर पाएंगे जब आप अपने सबसे अच्छेसुझाव उनके साथ शेयर कर सकें।

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