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डायबिटीज से लड़कर हासिल की ऑल इंडिया रैंक 1,सीएस फाउंडेशन की टॉपर्स ने बताए सफलता के सीक्रेट

2 वर्ष पहले
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एजुकेशन डेस्क. इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया (आईसीएसआई) ने शनिवार को फाउंडेशन परीक्षा 2019 के परिणाम घोषित किए। रिजल्ट में लड़कियों ने बाजी मारी है। भोपाल की मान्या श्रीवास्तव ने पहली, रूचि राकेश अग्रवाल ने दूसरी और श्रुति नागर तीसरी रैंक हासिल की है। टॉप 5 में एक लड़का शामिल नहीं है। कुल 299 स्टूडेंट्स ने टॉप 25 पोजिशन पर जगह हासिल की है। परीक्षा का आयोजन 28 और 29 दिसंबर 2019 को किया गया था। भोपाल के 6 स्टूडेंट्स ने आईसीएसआई मेरिट में ऑल इंडिया रैंक हासिल की है। 

1.3डी - डिवोशन, डेडिकेशन, डिटर्मिनेशन के आगे नहीं ठहरा डायबिटीज

  • मान्या श्रीवास्तव- ऑल इंडिया रैंक 1

पेरेंट्स- ज्योत्सना होममेकर, एमपी श्रीवास्तव बिजनेसमैन
सक्सेस मंत्र- मान्या को बचपन से टाइप-1 डायबिटीज है। रोज तीन बार इंसुलिन लेने वाली मान्या कहती हैं- डायबिटीज के कारण कई बार पढ़ाई में कई उतार-चढ़ाव आए, कई बार कोचिंग नहीं जा पाई। लेकिन, मैंने पढ़ाई कभी नहीं छोड़ी। पढ़ाई बहुत मुश्किल होती है, एडमिशन लेने के पहले यह भ्रम मेरे दिमाग में भी था। लेकिन मैंने सोचा- ऑल इंडिया रैंक हर साल किसी न किसी बच्चे की आती ही है और वह भी इंसान ही होता है। बस इसी सोच के साथ पहले दिन से ही ऑल इंडिया रैंक-1 के लिए मेहनत की। मैं 3डी यानी डिटर्मिनेशन, डिवोशन और डेडिकेशन पर यकीन करती हूं, और इसी यकीन ने मुझे यह रैंक भी दिलाई। समय के हिसाब से 4 विषयों को बांटकर पढ़ा। रोज पढ़ाई के बाद जो कुछ भी पढ़ा है, उसका एक पन्ने का सार लिख लेती थी, ताकि, अगले दिन की शुरुआत इसको रिवाइज करके करूं।

2.पेपर से एक दिन पहले खराब हो गई थी तबीयत

  • रिद्म शर्मा- ऑल इंडिया 11वीं रैंक

पेरेंट्स- मीना शर्मा होम मेकर, राजीव शर्मा रेलवे इंजीनियर
सक्सेस मंत्र-सीएस के एग्जाम में एक दिन में दो-दो पेपर देने होते हैं। ऐसे में पहले दिन से तैयारी को इस तरह रखा कि मैं एक दिन में पूरे एक सब्जेक्ट का रिवीजन कर सकूं। मैंने शुरुआत से ही शॉर्ट नोट्स बनाए, ताकि किसी टॉपिक की सारी जानकारी एक पेपर में समा सके। परीक्षा में पहले वह पेज पढ़कर भी पूरा पेपर रिवाइज कर सकूं। पेपर-1 के पहले ही मेरी तबीयत काफी खराब हो गई थी, इतनी कि मुझे लगा था कि मैं एग्जाम भी नहीं दे पाऊंगी। लेकिन, पेरेंट्स ने मेरा हौसला बढ़ाया। मेरी बहन ने पूरा पेपर मुझे सुनाकर रिवाइज करवाया।

3.ढेरों ऑनलाइन लेक्चर्स में से बेस्ट चुनना ही चैलेंज

  • हृदया एस अय्यर- ऑल इंडिया 18वीं रैंक

पेरेंट्स- रेबती श्रीनिवासन प्राइवेट जॉब, आर श्रीनिवासन कंसल्टेंट
सक्सेस मंत्र- लॉ की पढ़ाई पहली बार ही कर रही थी, इसलिए शुरुआत में थोड़ा डरी हुई थी। लेकिन, फिर सिलेबस पढ़ा, मॉड्यूल पढ़े और फिर ऑनलाइन लेक्चर्स देखने शुरू किए। शुरुआत में इसमें कई बार आपका काफी टाइम वेस्ट होता है, क्योंकि ऑनलाइन हजारों की संख्या में यू-ट्यूब लेक्चर्स के लिंक नजर आते हैं, लेकिन उनमें से आपको ऐसा लेक्चर ढूंढ़ना होता है, जो आपको आसानी से समझ में आ रहा हो। दोस्तों से हमेशा टॉपिक को लेकर डिस्कशन करती थी।

4.रिवीजन के लिए हर दिन 100 पेज के नोट्स बनाए

  • स्नेहा चौधरी- ऑल इंडिया 23वीं रैंक

पेरेंट्स- माधवी चौधरी होममेकर, महेश चौधरी बिजनेसमैन
सक्सेस मंत्र-सीए के साथ मैंने सीएस की पढ़ाई भी शुरू की थी। सीए का एग्जाम एक महीने पहले ही था, तो आखिरी के बचे एक महीने में ही मैंने सीएस की परीक्षा की तैयारी पर फोकस किया। यू-ट्यूब वीडियोज से तैयारी की और कई ऑनलाइन मॉक टेस्ट दिए। कोशिश की कि, हर दिन कम से कम 100 पन्ने तैयार करूं। बाद में रिवीजन के लिए सभी सब्जेक्ट्स को 2-2 दिनों का समय दिया। मेरा लक्ष्य है कि मैं एक पॉपुलर बिजनेस विमन बनूं।

5.सोशल मीडिया पर मॉक टेस्ट पेज से मदद मिली

  • एकता द्विवेदी- ऑल इंडिया 23वीं रैंक

पेरेंट्स- रश्मि द्विवेदी होममेकर, राजेन्द्र कुमार द्विवेदी सीनियर एकाउंट्स ऑफिसर
सक्सेस मंत्र- मैंने अप्रैल से ही सीएस की तैयारी शुरू कर दी थी। मैं सीएस और सीए दोनों की ही पढ़ाई कर रही हूं, इसमें ईको और एकाउंट्स का सिलेबस लगभग मिलता-जुलता है। पेपर-1 और पेपर-2 के लिए मुझे ज्यादा तैयारी करनी पड़ी। शॉर्ट नोट्स तैयार किए और ढेर सारे मॉक्स दिए। अमूमन लोग सोशल मीडिया को गलत मानते हैं, लेकिन मुझे सोशल मीडिया पर बने कई ऑनलाइन पेज पर ही मॉक टेस्ट को सॉल्व किया।