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शारापोवा ने संन्यास लेने की घोषणा करते हुए कहा, टेनिस - मैं तुम्हें अलविदा कह रही हूं; इस मौके पर उन्होंने एक लेख लिखा, पढ़िए इसके कुछ प्रेरक अंश

एक वर्ष पहले
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एजुकेशन डेस्क. आप कैसे उस जिंदगी को अपने पीछे छोड़कर आगे बढ़ सकते हैं जिसे आपने हमेशा जिया है? आप कैसे उन कोर्ट्स से दूर हो सकते हैं जिन्होंने आपको अनगिनत खुशियां व आंसू दिए - जिन्होंने आपको परिवार के साथ 28 वर्ष से अधिक समय तक समर्थन करने वाले फैन्स दिए? टेनिस - मैं तुम्हें अलविदा कह रही हूं। इस मौके पर मारिया ने एक लेख लिखा, पढ़िए इसके कुछ प्रेरक अंश...


मैं शुरू से शुरुआत करती हूं। जब पहली बार मैंने टेनिस कोर्ट देखा तो मेरे पिता उस पर खेल रहेे थे। रूस के सोची में तब मैं चार वर्ष की थी। इतनी छोटी कि मेरे बगल में पड़ा रैकेट मुझसे दुगना बड़ा था। छह साल की उम्र में मैं धरती के दूसरे कोने, फ्लोरिडा आई। दुनिया तब बहुत बड़ी लग रही थी। हवाई जहाज, एयरपोर्ट, अमेरिका का विस्तार; सब कुछ बड़ा था - ठीक मेरे पेरेंट्स के त्याग की तरह।


जब मैंने पहली बार खेलना शुरू किया तो नेट के दूसरी तरफ मौजूद लड़कियां हमेशा बड़ी, लंबी और ताकतवर हुआ करती थीं। टीवी पर आने वाले टेनिस के बड़े खिलाड़ी पहुंच से दूर लगते थे, लेकिन प्रैक्टिस के हर दिन के साथ यह मिथकीय दुनिया सच बनती चली गई। जब 17 वर्ष की उम्र में मैंने विंबलडन जीता तो मुझे अपनी जीत की विशालता का अहसास तब तक नहीं हुआ जब तक मैं बड़ी नहीं हो गई - और मैं खुशकिस्मत हूं कि तब मुझे यह अहसास नहीं था।


मेरी ताकत यह थी कि मैं खुद को कभी अन्य खिलाड़ियों से बेहतर नहीं मानती थी। मुझे लगता था कि मैं किसी चट्टान से नीचे गिरने वाली हूं - यही वजह थी कि मैं बार-बार काेर्ट पर आती रही ताकि यह जान सकूं कि चट्टान पर चढ़ती कैसे रहूं। मेरी सफलता का एक कारण यह था कि न मैंने कभी पीछे मुड़कर देखा और न ही कभी आगे की ओर देखा। मुझे लगता था कि अगर मैं लगातार मेहनत करती रही ताे एक शानदार जगह जरूर पहुंच सकूंगी, लेकिन टेनिस को मास्टर करने का कोई तरीका नहीं होता - आपको बस कोर्ट्स की डिमांड्स पर ध्यान देते हुए दिमाग में लगातार चल रहे विचारों को चुप करने का प्रयास करना होता है।


मुझे कभी अपने काम, प्रयासों या दृढ़ता के बारे में बात करने की इच्छा नहीं हुई - हर एथलीट सफलता के लिए जरूरी अनकहे त्याग को समझता है, लेकिन मैं चाहती हूं कि वह हर इंसान जो किसी भी चीज में बेहतरीन बनना चाहता है, यह जाने कि आशंकाएं और मूल्यांकन अवश्यंभावी हैं: आप सैकड़ों बार विफल होंगे व दुनिया आपको देखेगी। इसे स्वीकारें। खुद पर भरोसा रखें। मैं वादा करती हूं कि आपकी जीत होगी।


आज मुझे लगता है कि टेनिस मेरा पर्वत था। मेरी राह घाटियों और घुमावदार रास्तों से भरी हुई थी, लेकिन इसकी चोटी से दिखते नजारे शानदार थे। 28 वर्षों व 5 ग्रैंड स्लैम टाइटल्स के बाद मैं एक और पर्वत चढ़ने के लिए तैयार हूं। टेनिस ने मुझे सब कुछ दिया - और इसने मुझे दिखाया कि मैं किस मिट्टी से बनी हूं। अब मेरा अगला पर्वत चाहे जो हो, मैं मेहनत करती रहूंगी। मैं चढ़ाई करती रहूंगी। मैं आगे बढ़ती रहूंगी।

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