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परीक्षा के मोदी मंत्र / पीएम मोदी ने कहा, नाकामी ही सफलता का रास्ता दिखाती है, लेकिन रुके नहीं, जो रुका वो फेल

Narendra Modi Pariksha Par Charcha Students Teacher Parents Today Latest News and Updates CBSE 10th 12th Board Exam 2020
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Dainik Bhaskar

Jan 20, 2020, 07:11 PM IST

एजुकेशन डेस्क. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार ‘परीक्षा पे चर्चा 2020’ कार्यक्रम में छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में एक घंटे 52 मिनट बात की। कार्यक्रम में दुनिया के 27 देशों से 30 करोड़ से अधिक छात्र जुड़े। 10वीं, 11वीं और 12वीं के छात्रों ने पीएम मोदी से परीक्षा की तैयारी, तनाव और करियर से जुड़े सवाल पूछे। कार्यक्रम की थीम थी #विदाउट फिल्टर यानी जैसे दोस्तों से बात करते हैं वैसे ही करेंगे। प्रधानमंत्री ने चंद्रयान-2 की नाकामी का जिक्र करते हुए यह भी कहा कि विफलता दिखाती है कि आप सफलता की ओर बढ़ गए। राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण और अनिल कुंबले के उदाहरण से समझाया कि कैसे उनके खेल ने बाकी खिलाड़ियों को मोटिवेट कर दिया।

छात्रों के सवाल और पीएम मोदी के जवाब

यशश्री, पीडीएस सीनियर सेकंड्री स्कूल, राजस्थान

पहला सवाल : मैं बोर्ड परीक्षा में शामिल हो रही हूं कैसे बिना तनाव के परीक्षा का सामना करूं और मूड खराब न हो, इसके लिए क्या करूं? - यशश्री, पीडीएस सीनियर सेकंड्री स्कूल, राजस्थान

मोदी मंत्र : क्या कभी सोचा है कि मूड ऑफ कैसे होता है। इसकी वजह हम हैं या कोई दूसरा। ज्यादातर मामलों में दिमाग खराब होने की वजह बाहरी परिस्थितियां होती हैं। इसे एक उदाहरण से समझें। एक बच्चा मां से कहता है, मैं पढ़ रहा हूं और मुझे 6 बजे चाय देना। पढ़ाई के दौरान वह बीच-बीच में घड़ी देखता है गड़बड़ी वहीं से शुरू होती है। फिर मां को देर हो जाती है तो वहीं से मूड खराब होना शुरू हो जाता है। इसी को समझने का एक और तरीका है। ऐसा होने पर सोचिए, मां इतनी मेहनत करती है पर जरूर कुछ हुआ होगा कि वह 6 बजे चाय नहीं ला पाईं। पता करें कि मां को दिक्कत तो नहीं है। अगर ऐसा करते हैं तो मूड चार्ज हो जाएगा। इसलिए खुश रहने के लिए अपेक्षा कम रखें। 

मयंक नेगी, ब्लूमिंग वैली पब्लिक स्कूल, उत्तराखंड

दूसरा सवाल : परीक्षा में अच्छे अंक के लिए हम कितनी मेहनत करें और क्या जीवन में सफलता का मापदंड परीक्षा ही है? मयंक नेगी, ब्लूमिंग वैली पब्लिक स्कूल, उत्तराखंड

मोदी मंत्र : ज्यादातर बच्चे यही सोचते हैं। कुछ परीक्षाओं के अंक जीवन के टर्निंग पॉइंट बन गए हैं। मां-बाप भी बच्चे पर कुछ परीक्षाओं में अंक हासिल करना का दबाव बनाते हैं। पहले 10वीं, 12वीं फिर एंट्रेंस एग्जाम। आज दुनिया में संभावनाएं बढ़ गई हैं। सिर्फ परीक्षा के अंक ही जिंदगी नहीं है। कोई एक परीक्षा पूरी जिंदगी नहीं है यह एक पड़ाव है। यही सबकुछ है यह नहीं मानना चाहिए। बहुत सारा स्कोप है जीवन के किसी भी क्षेत्र में जा सकते हैं। इसे ऐसे समझें कि एक किसान की स्कूली शिक्षा कम हुई है लेकिन तकनीक से वह अपने जीवन को कितना बेहतर बना देता है। इसीलिए परीक्षा का महत्व है लेकिन परीक्षा ही जिंदगी नहीं है।

अनामिका भूनिया, जवाहर नवोदय विद्यालय-कोलकाता
अनामिका भूनिया, जवाहर नवोदय विद्यालय- पश्चिम बंगाल

तीसरा सवाल : पढ़ाई और एक्स्ट्रा-करिकुलर गतिविधियों के साथ कैसे तालमेल बनाएं। - प्रजक्ता अतंककर, केंद्रीय विद्यालय-जबलपुर, रिया नेगी, गवनर्मेंट गर्ल्स सीनियर सेकंड्री स्कूल-दिल्ली, अनामिका भूनिया, जवाहर नवोदय विद्यालय- पश्चिम बंगाल

मोदी मंत्र : हम शिक्षा व्यवस्था से जो शिक्षा प्राप्त करते हैं वो दुनिया के दरवाजे खोलने का रास्ता होती हैं। जैसे जब बच्चा क, ख, ग सीखता सीखकर नई दुनिया में प्रवेश करने की तैयारी करता है। धीरे-धीरे वह सब सीख जाता है। हमारी पूरी शिक्षा वो है हमे कुछ करने और जानने के लिए अवसर देती है, हम उसी को आधार बनाते हैं तो आगे बढ़ते हैं। हम रोज जो सीखते हैं उसे टीचर की नहीं जिंदगी की कसौटी पर कसना चाहिए। अगर कक्षा में पढ़ाया गया कि 'कम बोलनना फायदेमंद है' तो सोचना चाहिए मां-बाप की बहस के दौरान पर यह बात काम आएगी क्या। अगर आप एक्स्ट्रा एक्टिविटी नहीं करते हैं तो आप रोबोट बनकर रह जाएंगे। क्या चाहते हैं कि नौजवान रोबोट बन जाएं। हमारा नौजवान साहस और सामर्थ दिखाने वाला नहीं होगा तो क्या होगा। समय का मैनेजमेंट करना चाहिए लेकिन एक्स्ट्रा एक्टिवटी से दूरी नहीं बनानी चाहिए। पेरेंट्स बच्चों पर नई चीजों का दबाव डालने की जगह उन्हें उनकी रुचि को समझकर वो ही काम सिखाने में मदद करें। उन्हें उनकी पसंद की किसी न किसी एक्टविटी से जोड़ें। 

दीपेश, नेमची सीनियर सेकंड्री स्कूल-सिक्किम

चौथा सवाल : विज्ञापन और तकनीक छात्र के जीवन में किस तरह मददगार साबित होते हैं। - केदिव्या, गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकंड्री सकूल-अंडमान, दीपेश, दीपेश राय, नेमची सीनियर सेकंड्री स्कूल-सिक्किम

मोदी मंत्र : स्मार्टफोन आपका समय चोरी करता है उसमें रोजाना 10 मिनट कम करके यह समय दादा-दादी, पेरेंट्स के साथ बिताएं तो तकनीक ज्यादा फायदेमंद साबित होगी। तकनीक हमें नहीं हम तकनीक को कब्जे में रखें, ऐसी सोच बनाएं। इसे ऐसे समझ सकते हैं कि रेलवे की पूछताछ की विंडो पर इलेक्ट्रॉनिक स्क्रीन लगी है लेकिन फिर भी कई यात्री लाइन लगाकर ट्रेन की जानकारी हासिल करते हैं और तकनीक का फायदा नहीं उठाते। ऐसे मौकों पर तकनीक का फायदा उठाना चाहिए जैसे आज की पीढ़ी करती है। घर से ही गूगल से पूछते हैं कि कौन सी ट्रेन देरी से चल रही है। ये तय करें कि तकनीक का कितना इस्तेमाल करना है। तय करें कि मोबाइल की मदद से रोजाना 10 नए शब्द सीखेंगे। रोजाना एक तय समय निकालें और खुद को तकनीक से दूर रखें। इस टेक्नोलॉजी फ्री ऑवर को फॉलो करें। 

तापी अकू, अरुणाचल प्रदेश

पांचवा सवाल : देश के नागरिकों को उनके कर्तव्य कैसे याद दिलाएं? तापी अकू, अरुणाचल प्रदेश, शैलेश कुमार, केन्द्रीय विद्यालय, तमिलनाडु, गुनाक्षी शर्मा, महाराजा अग्रवाल विद्यालय, गुजरात

मोदी मंत्र : ज्यादातर लोग सोचते हैं कि कर्तव्य और अधिकार अलग हैं जबकि ये एक ही हैं। कर्तव्य में ही अधिकार शामिल होते हैं। जैसे अगर मैं शिक्षक का कर्तव्य निभाता हूं तो बच्चों के अधिकार की रक्षा होती है। गांधी कहते हैं मूलभूत कर्तव्य होते हैं अधिकार नहीं। देश को आगे बढ़ाने के लिए अपने कर्तव्य निभाएं। अगर हम अपने कर्तव्य निभाएं तो किसी को अधिकार मांगने नहीं पड़ेंगे, क्योंकि कर्तव्य से ही अधिकार संरक्षित होंगे। राष्ट्र के लिए हमें कुछ कर्तव्य निभाने चाहिए। 2022 में आजादी के 75 साल पूरे होंगे। हमें 2047 में आजादी के 100 साल होंगे। जब आजादी के 100 साल होंगे। तो आप कहां होंगे? आप कहीं न कहीं लीडरशिप में होंगे। आज जो 10वीं-12वीं के विद्यार्थी 2047 में लीडरशिप की पोजिशन में होंगे। जब आप लीडर होंगे, तब आपको बिल्कुल टूटी-फूटी व्यवस्था मिल जाए तो कैसा लगेगा। इस देश के लिए कई लोगों ने अपनी जान की बाजी लगा दी। कुछ अंडमान-निकोबार की जेल में बंद रहे। मैं देश के लिए कर्तव्य निभा सकूं, उन कर्तव्यों का पालन करना चाहिए। 
क्या हम यह फैसला कर सकते हैं कि हमें आगे मेड इन इंडिया खरीदेंगे। इससे देश की इकोनॉमी को ताकत मिलेगी। अगर पटाखे भी बाहर से लाकर धमाका करेंगे तो क्या होगा। मैं बिजली फालतू नहीं जाने देता, पानी नहीं बहने देता, बिना टिकट ट्रेन में सफर नहीं करता। अगर हर हिंदुस्तानी यह करे, तो बहुत कुछ बदल सकता है। हम लोग जब पढ़ते थे, तो नागरिक शास्त्र पढ़ाया जाता था, अब वो नहीं पढ़ाया जाता। लेकिन हमें नागरिक के तौर पर जिम्मेदारियां निभानी चाहिए। एयरपोर्ट पर हम कतार नहीं तोड़ते, क्योंकि वह हमारे अनुशासन का हिस्सा है। अगर यही अनुशासन सब के जीवन में आ जाता है, तो बहुत कुछ बदल सकता है।

छठा सवाल : परीक्षा के समय पेरेंट्स की उम्मीदों कैसे खरें उतरें और एक शिक्षक को स्टूडेंट के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए कि इस दबाव से उबरा जा सके? जावेद पवार, जवाहर नवोदय विद्यालय-आंध्र प्रदेश, करिश्मा, गवर्नमेंट गर्ल्स स्कूल-जम्मू-कश्मीर, मोनिका बैगा, डीएवी पब्लिक स्कूल-छत्तीसगढ़

मोदी मंत्र : स्टील की स्प्रिंग को एक सीमा तक खींचते रहेंगे तो ठीक है लेकिन अधिक खींचा तो तार बन जाएगा। माता-पिता और टीचर को यह सोचना चाहिए जिस बच्चे पर दबाव बना रहे हैं उसकी क्षमता कितनी है। पेरेंट्स को सोचना चाहिए कि जब बच्चा 2 साल का था तो उनके साथ कैसा बर्ताव करते थे। वे बिना दबाव के उसे चलना सिखाते थे। गिरने पर वे उत्साहित करते थे। बच्चे बड़े हो गए हैं ये स्वीकारिए लेकिन उनके साथ बचपन जैसा व्यवहार करिए। उस भावना को जीवित रखिए उसे खत्म नहीं होने दीजिए। बच्चे जिनके साथ सहज महसूस करते हैं उन्हें घर बुलाएं। बच्चे उनके साथ खुलकर बाते करेंगे तो उनके मन को समझेगा। बच्चों को प्रात्सोहित करने की मानसिकता जिंदा रखना जरूरी है।

स्टेंजिन नॉर्बू, गवर्नमेंट हाइयर सेकेंड्री स्कूल-लद्दाख

सातवां सवाल : माता-पिता कहते हैं सुबह जल्दी उठना चाहिए और पढाई का बेहतर समय क्या है? शुभाषीश, जवाहर नवोदय विद्यालय-त्रिपुरा, स्टेंजिन नॉर्बो, गवर्नमेंट हाइयर सेकेंड्री स्कूल-लद्दाख
मोदी मंत्र : मेरा मानना है कि सुबह के समय ज्यादा शांति होती है और इस दौरान पढ़ी गईं सारी बातें दिमाग में आसानी से बैठ जाती हैं। थकान बिल्कुल नहीं होती। हालांकि रात और दिन में पढ़ने की अपनी विशेषता होती है। जिस समय स्टूडेंट ज्यादा सहज महसूस करे उस समय पढ़ना बेहतर है। दिक्कत तब आती है जब स्टूडेंट अपना समय ही नहीं तय कर पाता। जैसे स्कूल की शुरुआत में वे तय करते हैं कि रोज पढ़ाई करनी है, फिर कहते हैं अगले महीने पूरी कर लूंगा। धीरे-धीरे इसे टालते चले जाते हैं। घर पर कहते हैं मां खाना हैवी मत बनाना, पास्ता चल जाएगा। मां बना देती है। फिर कहते हैं मां सुबह 6 बजे उठा देना। मां सुबह 5 बजे उठकर बच्चे के लिए तैयारी शुरू कर करती है। बच्चा सुबह 6 बजे उठकर कहता है कि मां रात को नींद नहीं आई रात में पढूंगा। ऐसा करके वह खुद के साथ अन्याय करता है। इस तरह पढ़ने की जगह न पढ़ने के बहाने ढूंढते हैं।

शोभित रस्तोगी, केंद्रीय विद्यालय नई दिल्ली

आठवां सवाल : जब हम परीक्षा हाल में जाते हैं तो उत्तर भूलने लगते हैं, इससे कैसे निपटें? शायखा खान, इंडियन स्कूल डेर-एस-सलाम, तंजानिया, शोभित रस्तोगी, केंद्रीय विद्यालय नई दिल्ली
मोदी मंत्र : अक्सर ऐसा होता है कि सुबह-सुबह पिता या भाई स्कूटर स्टार्ट करते हैं लेकिन यह स्टार्ट नहीं होती। वो स्कूटर को इधर-उधर हिलाते हैं। खुद को तैयार करते हैं, किक मारते हैं और स्कूटर चल पड़ती है। इसका कोई विज्ञान नहीं है लेकिन सभी लोग ऐसा करते हैं। ऐसा ही खिलाड़ी भी करता है। टेनिस का खिलाड़ी जब टेबल के पास आता है तो हाथ हिलाता है बाद में सामने वाला करता है वो भी बिना बॉल के। क्योंकि इससे उन्हें एक कंफर्ट जोन मिलता है। आप भी यही करें, परीक्षा हाल में प्रश्न पत्र सामने आने के बाद पिता जी के स्कूटर को याद कीजिए। एक-दो मिनट ऐसे निकाल दीजिए फिर उसे बिना तनाव के पढ़िए और जवाब लिखिए।

रिन डोमिनिक-कार्मल पब्लिक स्कूल, केरल

नवां सवाल :  करियर कैसे चुनें और खुद में छिपी क्षमता का आंकलन कैसे करें? अभिषेक कुमार गुप्ता, सेंट्रल बॉयज स्कूल-वाराणसी, जोली सागर, जवाहर नवोदय विद्यालय-बिहार, इरिन डोमिनिक-कार्मल पब्लिक स्कूल, केरल
मोदी मंत्र : जीवन में हर किसी को कुछ न कुछ जिम्मेदारियां निभानी होती हैं। अगर आप किसी की देखादेखी में कोई काम करते हैं, तो बहुत निराशा हाथ लगेगी। अगर अपने मन का काम करेंगे, तो मजा आएगा। जिंदगी में अगर एकाध एंट्रेंस में रह गए तो क्या। लाखों लोग पीछे रह जाते हैं। लेकिन अगर हम डर के कारण कदम ही न रखें तो उससे बुरा कुछ नहीं। हमेशा अपने अंदर के विद्यार्थी को जीवित रखें। जीवन जीने का यही मार्ग है, नया-नया जानना।

अरदीप कौर, गवर्नमेंट गर्ल्स सीनियर सेकंड्री, पंजाब

दसवां सवाल : बोर्ड परीक्षा आ रही हैं लेकिन प्रतियोगी परीक्षा के बारे में सोचती हूं, इसके लिए कैसे तैयारी करूं? निशा अग्रवाल, झारखंड, अरदीप कौर, गवर्नमेंट गर्ल्स सीनियर सेकंड्री, पंजाब
मोदी मंत्र : 10वीं या 12वीं के बाद जो तनाव रहता है वह परीक्षा का नहीं है। दरअसल यह तनाव आपके मन की आकांक्षा का है। जो छात्रों के लिए जीवन-मरण का मुद्दा बन जाता है। उन्हें लगता है कि मैं विफल रहा तो सारे दरवाजे बंद हो जाएंगे। जीवन में सिर्फ कुछ बनने की जगह कुछ अच्छा करने के सपने देखें तो परीक्षा का तनाव नहीं बढ़ेगा।

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