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CM विजयन के गांव से ग्राउंड रिपोर्ट:चारों तरफ CM के पोस्टर-बैनर, शादी जैसा माहौल; दूसरी तरफ राजनीतिक हिंसा में पति-बेटे को गंवाने वाली महिला आंसू पोंछ रही है

कन्नूर10 दिन पहलेलेखक: गौरव पांडेय
सीएम विजयन के गांव में एक तरफ जहां जश्न का माहौल है वहीं दूसरी तरफ थोड़ी दूर पर रहने वाली केसी नारायणी नाम की बुजुर्ग महिला मायूस और विवश है। नारायणी के पति और बेटा राजनीतिक हत्या का शिकार हो चुके हैं।
  • विजयन का जिला कन्नूर राजनीतिक हिंसा की कैपिटल, 5 साल में 34 लोग मारे गए, 200 से ज्यादा नेताओं- कार्यकर्ताओं के हाथ-पैर कटे हुए हैं
  • पिनराई में ही विजयन का परिवार रहता है, विजयन भी आजकल यहीं हैं, यहीं से कुछ किमी की दूरी पर कम्युनिस्ट पार्टी की जन्मभूमि पारापरम भी है

केरल का कन्नूर जिला, कम्युनिस्ट पार्टी का हार्ट लैंड है। भारत में कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सिस्ट का जन्म यहीं पारापरम गांव में 1939 में हुआ था। इसके बगल में ही मुख्यमंत्री विजयन का गांव पिनराई है, हालांकि अब यह गांव कम, शहर की शक्ल ज्यादा ले चुका है। विजयन अपने नाम के आगे अपने गांव का ही नाम पिनराई लिखते हैं।

कन्नूर को भारत की पॉलिटिकल मर्डर्स कैपिटल भी कहा जाता है, क्योंकि देश में सबसे ज्यादा राजनीतिक हिंसा अब तक यहीं हुई हैं। यहां राजनीतिक हिंसा का दौर 70 के दशक में शुरू हुआ था, जो अब तक जारी है। कन्नूर पुलिस के रिकॉर्डस के मुताबिक पिछले 5 सालों में 34 लोगों की राजनीतिक हिंसा में जान गई है। सरकारी रिकॉर्डस में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक कन्नूर में 2017 तक 186 लोगों की जान जा चुकी है। हाल के वर्षों में यहां ज्यादातर झगड़े संघ और सीपीएम वर्कर्स के बीच में ही हुए हैं।

तस्वीर में मुख्यमंत्री विजयन के गांव पिनराई की झलक। यहां डेवलपमेंट अच्छा-खासा हुआ है। इसलिए यह गांव की बजाय शहर की शक्ल ले चुका है।
तस्वीर में मुख्यमंत्री विजयन के गांव पिनराई की झलक। यहां डेवलपमेंट अच्छा-खासा हुआ है। इसलिए यह गांव की बजाय शहर की शक्ल ले चुका है।

कन्नूर के रिसर्च स्कॉलर सिहाद बताते हैं कि यहां हिंसा चुनाव के दौरान नहीं, चुनाव के बाद होती है या चुनाव से बहुत पहले होती है। कन्नूर में सीपीएम और संघ के कई ऐसे बड़े नेता हैं, जिनमें किसी का हाथ कटा है, तो किसी का पैर कटा हुआ है, कइयों के हाथ-पैर दोनों कटे हुए हैं। ऐसा आपसी हिंसा में हुआ है। पहले सीपीएम का कांग्रेस के साथ पंगा होता था, लेकिन अब संघ और भाजपा के साथ ज्यादा होता है, लेकिन दोनों ओर बराबर डैमेज होता है।

बहरहाल, चुनाव पर आते हैं। मुख्यमंत्री का पिनराई गांव और कम्युनिस्ट पार्टी की जन्मभूमि पारापरम गांव कन्नूर की धर्मदम सीट में आता है। मुख्यमंत्री विजयन यहीं से चुनाव लड़ रहे हैं। वैसे तो इस वक्त पूरा कन्नूर सीपीएम के झंडों-पोस्टरों और विजयन के होर्डिंग्स, बड़े-बड़े कटआउट्स से पटा पड़ा है, लेकिन धर्मदम में तो सिवाय विजयन और सीपीएम के पोस्टर के कुछ नहीं दिखता। हां, कहीं-कहीं कांग्रेस और भाजपा की मौजूदगी नजर आती है। यहां जितने भी बस स्टॉप और इमारतें हैं, सब लाल रंग में ही रंगी हैं। धर्मदम के सिवान कहते हैं कि भाजपा और कांग्रेस यहां नाम के लिए ही लड़ रहे हैं। दोनों को यहां से उम्मीदवार खोजने में बहुत मशक्कत करनी पड़ी है।

यहां हर जगह सीएम विजयन के पोस्टर और कटआउट्स नजर आ रहे हैं। कांग्रेस और दूसरी पार्टियों की मौजूदगी न के बराबर दिखती है।
यहां हर जगह सीएम विजयन के पोस्टर और कटआउट्स नजर आ रहे हैं। कांग्रेस और दूसरी पार्टियों की मौजूदगी न के बराबर दिखती है।

सीएम विजयन के गांव में इस वक्त शादी जैसा माहौल है। सीपीएम के कार्यकर्ता बड़े जतन से यहां होर्डिंग, पोस्टर, वोटर लिस्ट तैयार कर रहे हैं। इन्हीं में से एक का नाम स्मिथ है। कैसी चल रही है तैयारी? पूछने पर कहते हैं- देखिए ये अम्ब्रेला है, धूप न लगे इसलिए कार्यकर्ताओं को भेज रहे हैं, आज शहर में कामरेड विजयन की रैली है, शाम को यहां भी तो आने वाले हैं।

दरअसल, सीएम विजयन केरल में दो राउंड का कैंपेन पूरा करके अपनी सीट और गांव पिनराई लौट चुके हैं। सीएम का परिवार अभी यहीं पिनराई में रहता है। विजयन की यहीं पर कोठी है, सामने से एक संकरी पक्की सड़क गई है। हालांकि बिना किसी से पूछे आप यह नहीं जान सकते हैं कि यह मुख्यमंत्री का घर है। घर के सामने पुलिस की स्कार्ट तैनात है, जो घर की फोटो लेने से मना करती है। कहती है- यहां सीसीटीवी लगे हुए हैं, हम फोटो की इजाजत नहीं दे सकते हैं। पिनराई टाउन में पिनराई नाम से कई बड़ी इमारतें भी दिखती हैं, जैसे पिनराई कन्वेंशन सेंटर, ऑडिटोरियम, पिनराई सर्विस कोऑपरेटिव बैंक आदि।

विजयन की रैली में शामिल होने के लिए महिलाएं सीपीएम की कैप लगाकर जा रही हैं। पीछे अच्छी-खासी संख्या में पुरुष भी झंडे के साथ दिख रहे हैं।
विजयन की रैली में शामिल होने के लिए महिलाएं सीपीएम की कैप लगाकर जा रही हैं। पीछे अच्छी-खासी संख्या में पुरुष भी झंडे के साथ दिख रहे हैं।

पिनराई के घर से करीब डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर और सीपीएम कार्यालय से महज 200 मीटर की दूरी पर एक ऐसा भी घर है, जहां पर एक बूढ़ी मां अकेली रहती हैं और जिनके आंखों से आंसू पिछले 18 साल से रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। इनका नाम केसी नारायणी हैं, घर के बाहर लगी लोहे की जालियों से वह बार-बार सड़क की ओर निहारती हैं, शायद कोई उनसे बात करने को मिल जाए, लेकिन लोकतंत्र के इस उत्सव में भी वो सदमे में हैं और हो भी क्यों न, क्योंकि वो एक मां और पत्नी जो हैं।

दरअसल, नारायणी ने पहले पति को खोया, फिर इकलौते बेटे को। वह बताती हैं, '2002 में सीपीएम के लोगों ने मेरे पति को चलती बस में पीटकर मार डाला था, क्योंकि वह संघ से जुड़े थे। जब इससे भी इन लोगों का दिल नहीं भरा तो 2016 में चुनाव में जीत के बाद मेरी आंखों के सामने 8 से ज्यादा सीपीएम के गुंडों ने यहीं सड़क पर ही मेरे बेटे को पीट-पीटकर मार डाला। वह तो संघ से जुड़ा भी नहीं था, न ही सपोर्ट करता था। इसके बावजूद इन लोगों को लगता था कि पिता संघ से थे, तो बेटा भी बाद में संघ से न जुड़ जाए, बस इसलिए उसे मार डाला।'

"पिछली बार सीपीएम समर्थकों ने चुनाव के बाद बहुत तांडव मचाया था। उन्होंने ऐसे 35 घरों में तोड़फोड़ की थी, जिन पर उन्हें भाजपा समर्थक होने का शक था। मेरे घर की भी खिड़कियां तोड़ डाली थीं, यहां सब विजयन के इशारे पर होता है।"

चुनाव प्रचार को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। सीपीएम और मुख्यमंत्री विजयन के पोस्टर और बैनर बनाए जा रहे हैं।
चुनाव प्रचार को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। सीपीएम और मुख्यमंत्री विजयन के पोस्टर और बैनर बनाए जा रहे हैं।

नारायणी यह बताते हुए बार-बार साड़ी के पल्लू से बस आंसू पोछती रहती हैं। इस बार क्या वह वोट डालेंगी? इस पर कहती हैं कि नहीं डालूंगी। यहां वैसे भी कोई किसी को वोट नहीं डाल सकता है, बस सीपीएम को ही वोट पड़ता है। घर में और कौन है? इस पर नारायणी कहती हैं, एक बेटी है, जो कन्नूर शहर में अपने परिवार के साथ रहती है। नारायणी को अब कहीं से भी न्याय की उम्मीद नहीं है, कहती हैं कि अब तो सिर्फ ऊपर वाला ही न्याय करेगा। घर के सामने की अलमारी में पति और बेटे की तस्वीरें हैं। वहीं, घर के बाहर सड़क पार विजयन का एक बड़ा पोस्टर टंगा हुआ है।

भाजपा के कन्नूर जिला के अध्यक्ष एन हरिदास कहते हैं कि सीपीएम के लोग हमें कमजोर करना चाहते हैं, हमारे 200 से ज्यादा कार्यकर्ताओं के हाथ-पैर इन्होंने काट दिए हैं।
भाजपा के कन्नूर जिला के अध्यक्ष एन हरिदास कहते हैं कि सीपीएम के लोग हमें कमजोर करना चाहते हैं, हमारे 200 से ज्यादा कार्यकर्ताओं के हाथ-पैर इन्होंने काट दिए हैं।

एन हरिदास भाजपा के कन्नूर जिला अध्यक्ष हैं, यहां की थालासेरी विधानसभा सीट से चुनाव भी लड़ रहे थे, लेकिन चुनाव आयोग ने टिकट रिजेक्ट कर दिया। फिलहाल, अब वह जिले की बाकी सीटों पर प्रचार-प्रसार की कमान संभाल रहे हैं। सीपीएम और भाजपा के बीच हिंसा के सवाल पर कहते हैं, 'देखिए वो हमें कमजोर करना चाहते हैं, लेकिन हम डरते थोड़े हैं। अभी 6 महीने पहले सीपीएम के लोगों ने मेरे घर पर अटैक किया था। सब कुछ तोड़ डाला है। फिर हमने भी बदला लिया। सीपीएम के सेक्रेटरी का बेटा मर्डर के केस में जेल में है। यहां हमारे करीब 200 से ज्यादा कार्यकर्ता ऐसे हैं, जिनके शरीर का कोई न कोई अंग सीपीएम वालों ने काट रखा है, हम उन सभी लोगों को लेकर एक बार दिल्ली भी जा चुके हैं।'

ये पारापरम स्थित सीपीएम का दफ्तर है, जहां कुछ बुजुर्ग बैठे हुए हैं और चुनाव को लेकर आपस में बातचीत कर रहे हैं।
ये पारापरम स्थित सीपीएम का दफ्तर है, जहां कुछ बुजुर्ग बैठे हुए हैं और चुनाव को लेकर आपस में बातचीत कर रहे हैं।

हरिदास बताते हैं कि हमारे स्टेट उपाध्यक्ष हैं मास्टर सदानंद, वह अभी कुट्मपारम से चुनाव भी लड़ रहे हैं। सीपीएम के लोगों ने उनके दोनों पैर काट दिए थे। पिछले साल उन्होंने हमारे कार्यकर्ता की पिनराई टाउन में हत्या की थी, विरोध में हमारे नेता अमित शाह यहां आए थे। और हम विजयन के टाउन से यहां तक पैदल मार्च किए थे। लेकिन यहां तो पुलिस सीपीएम की कार्यकर्ता बनी हुई है, लेकिन अभी माहौल बदल रहा है, हिंदू सीपीएम से ज्यादा भाजपा के साथ आ रहा है। मुस्लिम लीग यहां बीफ फेस्टिवल मनाती है, तो सीपीएम उन्हें सपोर्ट करती है।

यहां से निकलकर कम्युनिस्ट जन्मभूमि पारापरम पहुंचते हैं, यहां पर सड़क के दोनों किनारे पर कुछ छोटी-मोटी दुकानें हैं। बगल में ही दो-तीन छोटी बिल्डिंग बनी हुई हैं, जो हल्के लाल रंग से रंगी हुई हैं। दूर से ही देखकर पता चल जाता है कि सीपीएम ऑफिस है। अभी शाम का वक्त था, यहां कार्यकर्ताओं की भीड़ तो बिल्कुल नहीं है। बस कुछ बुजुर्ग कामरेड ही वहां बैठे आपस में बातचीत कर रहे हैं। यहीं पर अशोक बैठे हैं, पूछने पर कहते हैं कि यह कम्युनिस्ट पार्टी की लाइब्रेरी है, आइए दिखाते हैं- अंदर कम्युनिस्ट पार्टी की आइडियोलॉजी से जुड़ी तमाम किताबें हैं। अंदर एक कम्प्यूटर रखा है, जिस पर दो लड़कियां टाइपिंग कर रही होती हैं। पूछने पर कहती हैं- हम यहां प्रोजेक्ट वर्क पूरा करने आई हुई हैं।

यह कम्युनिस्ट पार्टी की लाइब्रेरी है, जहां कम्युनिस्ट पार्टी की आइडियोलॉजी से जुड़ी तमाम किताबें रखी हुई हैं।
यह कम्युनिस्ट पार्टी की लाइब्रेरी है, जहां कम्युनिस्ट पार्टी की आइडियोलॉजी से जुड़ी तमाम किताबें रखी हुई हैं।

लाइब्रेरी के सामने सड़क उस पार रीडिंग हॉल है, जहां ढेर सारे अखबार पड़े हैं, एक टीवी भी है, जिस पर सीएम विजयन का भाषण आ रहा है, दो-तीन बुजुर्ग उसे गौर से सुन रहे होते हैं। अशोक बताते हैं कि पार्टी ऑफिस थोड़ा दूर है, वहां ताला लगा है, क्योंकि सब वर्कर्स फील्ड में हैं। आइए हम वह जगह दिखाते हैं। जहां से सीपीएम पार्टी शुरू हुई है। यहां पहुंचने पर एक कुंए के किनारे चबूतरे पर सीपीएम के चुनाव चिन्ह के साथ मुटठी बंद हाथ का स्टैच्यू बना हुआ है। और 1939 लिखा हुआ है, इसी साल सीपीएम का गठन हुआ था।

अशोक मलयालम में लिखी हुई पटि्टका दिखाते हैं, कहते हैं कि यही 12 लोगों ने सीपीएम को बनाया था। तभी एक बुजुर्ग दिखाई देते हैं, अशोक बताते हैं कि विजयन के पॉलिटिकल फ्रेंड बालन हैं, इमरजेंसी मेंं विजयन के साथ जेल भी गए थे। बालन के बेटे विनीत इसी पारापरम में एक दुकान चलाते हैं।

कम्युनिस्ट पार्टी की लाइब्रेरी के पास ही चबूतरे पर सीपीएम के चुनाव चिन्ह के साथ मुटठी बंद हाथ का स्टैच्यू बना हुआ है। यहीं पारापरम में सीपीएम का जन्म हुआ था।
कम्युनिस्ट पार्टी की लाइब्रेरी के पास ही चबूतरे पर सीपीएम के चुनाव चिन्ह के साथ मुटठी बंद हाथ का स्टैच्यू बना हुआ है। यहीं पारापरम में सीपीएम का जन्म हुआ था।

पारापरम कम्युनिस्ट की जन्मभूमि है। लेकिन इलाके में काफी गरीबी नजर आती है। कुछ महिलाएं यहां सब्जी की छोटी दुकानें खोलकर ग्राहक के इंतजार में बैठी हैं। उनके हाल देखकर आप भी सोचेंगे कि क्या ये वही पारापरम है, जहां से कम्युनिस्ट पार्टी पैदा हुई है और समानता जिसका नारा है। बहरहाल, कुछ ऐसा ही चुनावी मौसम है, विजयन के गांव, कम्युनिस्ट पार्टी की जन्मभूमि और सीएम की सीट पर।

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